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Mau News: संपति के लिए पिता की हत्या करने वाले दो पुत्रों को आजीवन कारावास
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12 वर्ष पूर्व संपत्ति के बंटवारे के विवाद को लेकर पिता की हत्या के मामले में दो पुत्रों अच्छेलाल चौहान व सत्यप्रकाश चौहान को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर एक जनार्दन यादव ने सजा सुनाने के साथ ही 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। वहीं अच्छेलाल चौहान को रिश्तेदार वादी मुकदमा आशीष चौहान की हत्या के प्रयास का दोषी पाते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा के साथ ही 5 हजार रुपये अर्थदंड लगाया। अर्थदंड न देने पर दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। मामला मधुबन थाना क्षेत्र का है।
अभियोजन के अनुसार गाजीपुर के कासिमाबाद थाना क्षेत्र के खेताबपुर निवासी आशीष चौहान की तहरीर पर एफआईआर दर्ज हुई। इसमें मधुबन थाना क्षेत्र के नुरुल्लाहपुर गांव निवासी अच्छेलाल चौहान व सत्यप्रकाश चौहान को आरोपी बनाया गया। वादी का आरोप है कि वह अपनी बुआ की ससुराल में उनके ससुर रामअधार के साथ आया था। संपत्ति के बंटवारे के विवाद को लेकर 24 अक्टूबर 2012 की शाम को आरोपियों ने पिता के ऊपर गंडासा से हमला कर हत्या कर दी। इस दौरान वादी आशीष उन्हें बचाने आया तो आरोपी ने उसके ऊपर भी जान से मारने की नियत से प्रहार किया। पुलिस ने मामले की विवेचना कर आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से कुल 9 गवाहों को पेशकर अभियोजन का पक्ष रखा गया। बचाव पक्ष से कहा गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। एडीजे ने उपरोक्त सजा का निर्णय सुनाई।
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अभियोजन के अनुसार गाजीपुर के कासिमाबाद थाना क्षेत्र के खेताबपुर निवासी आशीष चौहान की तहरीर पर एफआईआर दर्ज हुई। इसमें मधुबन थाना क्षेत्र के नुरुल्लाहपुर गांव निवासी अच्छेलाल चौहान व सत्यप्रकाश चौहान को आरोपी बनाया गया। वादी का आरोप है कि वह अपनी बुआ की ससुराल में उनके ससुर रामअधार के साथ आया था। संपत्ति के बंटवारे के विवाद को लेकर 24 अक्टूबर 2012 की शाम को आरोपियों ने पिता के ऊपर गंडासा से हमला कर हत्या कर दी। इस दौरान वादी आशीष उन्हें बचाने आया तो आरोपी ने उसके ऊपर भी जान से मारने की नियत से प्रहार किया। पुलिस ने मामले की विवेचना कर आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से कुल 9 गवाहों को पेशकर अभियोजन का पक्ष रखा गया। बचाव पक्ष से कहा गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। एडीजे ने उपरोक्त सजा का निर्णय सुनाई।
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