मऊ। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर सीएए, एनआरसी, एनपीआर को लेकर वामपंथी दलों के कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। साथ ही राष्ट्रपति को संबोधित पांच सूत्री मांग पत्र जिलाधिकारी को सौंपा। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि भारत के संविधान जनतंत्र, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना वास्तविक देश भक्ति का स्वरूप है। संविधान विरोधी कानून का विरोध करने वाले सभी लोगों को देशद्रोही कहना, बोलने की आजादी पर हमला है।
आजादी के 70 सालों में यह पहला मौका है जब धर्म को नागरिकता देने का आधार बनाया गया है, यह कानून न सिर्फ असंवैधानिक है बल्कि संविधान विरोधी है। यह हिंदू मुसलमान का सवाल नहीं है, बल्कि हिंदुस्तान का सवाल है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जिस तरह से विरोध करने वालों से बदला लेने की बात कह रहे हैं वह निंदनीय है। मोदी सरकार जनता के जीवन के ज्वलंत सवालों बढ़ती महंगाई, भयंकर बेरोजगारी, आर्थिक बदहाली, कृषि संकट से ध्यान हटाने के लिए आए दिन जन विरोधी कानूनों को लागू कर रही है। सभा को भाकपा के राम सोच यादव, माकपा के शेर मोहम्मद, भाकपा (माले) के बसंत कुमार, किसान नेता अर्चना उपाध्याय, रेशमा वीरेंद्र कुमार, नौजवान भारत सभा के अनिरुद्ध एस यूसीआई(सी) के शैलेंद्र कुमार, त्रिभुवन ने संबोधित किया। इस अवसर पर शिव मूरत गुप्ता, जयप्रकाश धूमकेतु, समसुलहक चौधरी, छविनाथ शर्मा, जयप्रकाश, राजेश, दुर्ग विजय आदि शामिल रहे।