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भूमि अधिग्रहण बिल किसान विरोधी
ब्यूरो, मऊ, अमर उजाला
Updated Wed, 15 Apr 2015 12:10 AM IST
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संवाददाता
रानीपुर। केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा हठवादी रवैये के तहत लाए जा रहे भूमि अधिग्रहण बिल के विरोध में रानीपुर बाजार में किसानों की विरोध सभा हुई। सभा में किसानों को इस बिल से सावधान करते हुए वक्ताओं ने कहा कि लगता है कि भाजपा के साथ साथ सहित कई राजनीतिक दल भी परोक्ष रूप से इस बिल का समर्थन कर रहे हैं। लेकिन इसका काफी दुष्प्रभाव छोटे और मझोले किसानों पर पडे़गा।
पूर्व ब्लाक प्रमुख और समाज सेवी अशोक सिंह सिंंहेल ने कहा कि अंग्रेजी शासन काल के बने भूमि अधिग्रहण कानून के तहत सरकारी परियाजनाओं तथा कल कारखानों के लिए किसानों की भूमि अधिग्रहीत की जाती रही है। लेकिन यूपी में भरट्ठा पारसौल की घटना के बाद वर्ष 2013 में कांग्रेस नीत सरकार ने नया भूमि अधिग्रहण कानून बनाया। लेकिन केंद्र में आते ही भाजपा ने महज एक साल पुराने क ानून में भारी परिवर्तन करके किसान हितों को दरकिनार करते हुए भूमि अध्यादेश लागू कर दिया। नये कानून के बारे में श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। सभा में डा.दशरथ चौहान,कामरेड रणविजय सिंह, हुमैरा खातून, धनंजय सिंह, पप्ूखान और बनवारी राम आदि मौजूद रहे।
रानीपुर। केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा हठवादी रवैये के तहत लाए जा रहे भूमि अधिग्रहण बिल के विरोध में रानीपुर बाजार में किसानों की विरोध सभा हुई। सभा में किसानों को इस बिल से सावधान करते हुए वक्ताओं ने कहा कि लगता है कि भाजपा के साथ साथ सहित कई राजनीतिक दल भी परोक्ष रूप से इस बिल का समर्थन कर रहे हैं। लेकिन इसका काफी दुष्प्रभाव छोटे और मझोले किसानों पर पडे़गा।
पूर्व ब्लाक प्रमुख और समाज सेवी अशोक सिंह सिंंहेल ने कहा कि अंग्रेजी शासन काल के बने भूमि अधिग्रहण कानून के तहत सरकारी परियाजनाओं तथा कल कारखानों के लिए किसानों की भूमि अधिग्रहीत की जाती रही है। लेकिन यूपी में भरट्ठा पारसौल की घटना के बाद वर्ष 2013 में कांग्रेस नीत सरकार ने नया भूमि अधिग्रहण कानून बनाया। लेकिन केंद्र में आते ही भाजपा ने महज एक साल पुराने क ानून में भारी परिवर्तन करके किसान हितों को दरकिनार करते हुए भूमि अध्यादेश लागू कर दिया। नये कानून के बारे में श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। सभा में डा.दशरथ चौहान,कामरेड रणविजय सिंह, हुमैरा खातून, धनंजय सिंह, पप्ूखान और बनवारी राम आदि मौजूद रहे।
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