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महामंडलेश्वर ने मंदिर के लिए किया भूमिपूजन
ब्यूरो, मऊ, अमर उजाला
Updated Fri, 15 May 2015 10:23 PM IST
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परदहां ब्लाक अंतर्गत कहिनौर गांव स्थित प्राचीन वनदेवी मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए शुक्रवार को हथियाराम मठ के महंत व महामंडलेश्वर भवानी नंदन यति जी महाराज ने भूमिपूजन और शिलापूजन किया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुई पूजा में महाराज जी ने कहा पौराणिक मंदिरों को संवारना व सजाना चाहिए।
भौगोलिक साक्ष्यों के आधार पर प्राचीन मंदिर व पौराणिक वनदेवी धाम महर्षि वाल्मीकि की साधना स्थली रही है। कहा जाता है कि जगत जननी मां सीता ने भी अपने अखंड पतिव्रत धर्म का पालन करते हुए यहीं पर लव कुश को जन्म दिया था।
इस मौके पर महामंडलेश्वर भवानी नंदन यति जी ने कहा कि नए मंदिर बनते जा रहे हैं, लेकिन प्राचीन व पौराणिक मंदिर जीर्णशीर्ण होते जा रहे हैं।
आज जरूरत है इन पौराणिक मंदिरों को सजाने और संवारने की। कहा कि 10 नए मंदिर बनाने से जितना पुण्य मिलेगा उतना एक प्राचीन व पौराणिक मंदिर को सजाने संवारने से पुण्य मिलेगा।
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नगरों व गांवों में गगनचुंबी इमारतें बन रही हैं, लेकिन प्राचीन व पौराणिक मंदिर गिरने की स्थिति में पहुंच गए हैं यह धर्म के प्रति अरुचि को दर्शा रहा है।
घरों में लगाए जाने वाले तुलसी के पौधे गायब होते जा रहे हैं। इस अवसर पर सुनील गिरी, विनय राय, राजेंद्र प्रसाद सिंह, रामेश्वर चौहान, रत्नाकर त्रिपाठी, रामध्यान यादव, रविंद्र त्रिपाठी आदि शामिल थे।
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भौगोलिक साक्ष्यों के आधार पर प्राचीन मंदिर व पौराणिक वनदेवी धाम महर्षि वाल्मीकि की साधना स्थली रही है। कहा जाता है कि जगत जननी मां सीता ने भी अपने अखंड पतिव्रत धर्म का पालन करते हुए यहीं पर लव कुश को जन्म दिया था।
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इस मौके पर महामंडलेश्वर भवानी नंदन यति जी ने कहा कि नए मंदिर बनते जा रहे हैं, लेकिन प्राचीन व पौराणिक मंदिर जीर्णशीर्ण होते जा रहे हैं।
आज जरूरत है इन पौराणिक मंदिरों को सजाने और संवारने की। कहा कि 10 नए मंदिर बनाने से जितना पुण्य मिलेगा उतना एक प्राचीन व पौराणिक मंदिर को सजाने संवारने से पुण्य मिलेगा।
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नगरों व गांवों में गगनचुंबी इमारतें बन रही हैं, लेकिन प्राचीन व पौराणिक मंदिर गिरने की स्थिति में पहुंच गए हैं यह धर्म के प्रति अरुचि को दर्शा रहा है।
घरों में लगाए जाने वाले तुलसी के पौधे गायब होते जा रहे हैं। इस अवसर पर सुनील गिरी, विनय राय, राजेंद्र प्रसाद सिंह, रामेश्वर चौहान, रत्नाकर त्रिपाठी, रामध्यान यादव, रविंद्र त्रिपाठी आदि शामिल थे।