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किन हवाओं ने बदल डाली है चमन की तहजीब.
मऊ/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 31 May 2016 12:24 AM IST
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kavi samelan
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कस्बा के काव्यमुखी साहित्य अकादमी व विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ के संयुक्त तत्वाधान में रविवार की रात आदर्श नगर मुहल्ला स्थित शाह गोला दिवान प्राथमिक विद्यालय में अदवी मुशायरा/ कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पूर्वांचल के विभिन्न जनपदों से आये शायरों व कवियों ने अपनी रचनाओं से समाज के विभिन्न पहलुओं से रूबरू कराते हुए श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया।
सबसे पहले शायर आदिल गालिबपुरी ने अपनी रचना पढ़ते हुए कहा, सैकडों निकलतें है दाने एक दाने से, रख दिया कमाल उसने एक दाने में। स्थानीय शायर मतीन खैराबादी की रचना भी काफी पसंद की गयी। अपना कलाम पेश करते हुए पढा़, गुमराह कर सकेगी कहां तीरगी मुझे, अपनी पनाह में है लिए रोशनी मुझे।
डा. कमर मुहम्मदाबादी ने बेहतरीन कलाम पेश कर वाहवाही लूटी। उनका कलाम कुछ इस तरह रहा। देखे थे उसने ख्वाब महल्लात के मगर, आयी गरीबी चुपके से सपने बिखर गये।ं। सामाजिक विसंगतियों पर नश्तरी चाकू की तरह कई शायरों ने रचना पढा़ उसमें से एक असद निजामी की गजल पर श्रोता वाह वाह कर उठे। हंसते हंसते रो भी सोकते थे, हम अदाकार हो भी सकते थे,, हाथ छोडा़ नहीं बडो़ का कभी, वरना मेले में खो भी सकते थे।।
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एहसान एम ए ने अपना कलाम पेश किया, किन हवाओं ने बदल डाली चमन की तहजीब, फूल मसरूफ हैं कांटो की सनासानी में। काव्यमुखी साहित्य अकादमी के निदेशक डा. मध्ुर नज्मी ने अपना कलाम पेश किया तो लोग वाहवाह कहने पर मजबूर हो गये। गजल के फूल खिले और शाइरी महके, तेरे खयाल की खूशबू से जिन्दगी महके।
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सबसे पहले शायर आदिल गालिबपुरी ने अपनी रचना पढ़ते हुए कहा, सैकडों निकलतें है दाने एक दाने से, रख दिया कमाल उसने एक दाने में। स्थानीय शायर मतीन खैराबादी की रचना भी काफी पसंद की गयी। अपना कलाम पेश करते हुए पढा़, गुमराह कर सकेगी कहां तीरगी मुझे, अपनी पनाह में है लिए रोशनी मुझे।
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डा. कमर मुहम्मदाबादी ने बेहतरीन कलाम पेश कर वाहवाही लूटी। उनका कलाम कुछ इस तरह रहा। देखे थे उसने ख्वाब महल्लात के मगर, आयी गरीबी चुपके से सपने बिखर गये।ं। सामाजिक विसंगतियों पर नश्तरी चाकू की तरह कई शायरों ने रचना पढा़ उसमें से एक असद निजामी की गजल पर श्रोता वाह वाह कर उठे। हंसते हंसते रो भी सोकते थे, हम अदाकार हो भी सकते थे,, हाथ छोडा़ नहीं बडो़ का कभी, वरना मेले में खो भी सकते थे।।
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एहसान एम ए ने अपना कलाम पेश किया, किन हवाओं ने बदल डाली चमन की तहजीब, फूल मसरूफ हैं कांटो की सनासानी में। काव्यमुखी साहित्य अकादमी के निदेशक डा. मध्ुर नज्मी ने अपना कलाम पेश किया तो लोग वाहवाह कहने पर मजबूर हो गये। गजल के फूल खिले और शाइरी महके, तेरे खयाल की खूशबू से जिन्दगी महके।