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जुलाई-अगस्त में बेल की बागवानी लगाने को शुरू करें अभी से तैयारी:
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बेल की बगवानी लगाने के लिए जुलाई व अगस्त सबसे बेहतर
संवाद न्यूज एजेंसी
मऊ। पिलखी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एलसी वर्मा ने कहा कि बेल औषधीय गुणों से भरपूर होता है। इसकी खेती में मुनाफे की अपार संभावनाएं हैं। बेल की बगवानी लगाकर किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। उन्होंने कहा कि बेल की बगवानी लगाने के लिए जुलाई व अगस्त का महीना सबसे बेहतर है। किसान अभी से बगवानी की तैयारी शुरू कर दें। उन्होंने कहा कि मई जून में तपन अधिक रहता है। इस महीने में बेल की खेती नुुकदायक है। उन्होंने बताया की बेल का सेवन करने से कफ-वात अपच पेचिश, डायबिटीज, ल्यूकोरिया, पीलिया, आंखों के रोग आदि बीमारियों से निजात दिलाने में सहायक है। उन्होंने बताया कि बेल के फल, पत्ते, फूल, जड़ व छाल में प्रोटीन, बीटा केरोटिन, थायमिन, राइबोफ्लेविन, विटामिन व खनिज तत्व प्रचूर मात्रा में होते है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. जितेंद्र कुशवाहा ने बताया कि बेल की बागवानी करते समय किसानों को उर्वरक की मात्रा कम रखनी चाहिए। कृषि वैज्ञानिक डॉ. अंगद प्रसाद ने बताया कि बेल की बगवानी बंजर भूमि भी आसानी से लगाई जा सकती है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मऊ। पिलखी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एलसी वर्मा ने कहा कि बेल औषधीय गुणों से भरपूर होता है। इसकी खेती में मुनाफे की अपार संभावनाएं हैं। बेल की बगवानी लगाकर किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। उन्होंने कहा कि बेल की बगवानी लगाने के लिए जुलाई व अगस्त का महीना सबसे बेहतर है। किसान अभी से बगवानी की तैयारी शुरू कर दें। उन्होंने कहा कि मई जून में तपन अधिक रहता है। इस महीने में बेल की खेती नुुकदायक है। उन्होंने बताया की बेल का सेवन करने से कफ-वात अपच पेचिश, डायबिटीज, ल्यूकोरिया, पीलिया, आंखों के रोग आदि बीमारियों से निजात दिलाने में सहायक है। उन्होंने बताया कि बेल के फल, पत्ते, फूल, जड़ व छाल में प्रोटीन, बीटा केरोटिन, थायमिन, राइबोफ्लेविन, विटामिन व खनिज तत्व प्रचूर मात्रा में होते है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. जितेंद्र कुशवाहा ने बताया कि बेल की बागवानी करते समय किसानों को उर्वरक की मात्रा कम रखनी चाहिए। कृषि वैज्ञानिक डॉ. अंगद प्रसाद ने बताया कि बेल की बगवानी बंजर भूमि भी आसानी से लगाई जा सकती है।