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संदिग्ध मरीजों के इंतजार में आईसोलेशन कोच, 45 दिन से बना है शोपीस
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मऊ रेलवे स्टेशन पर खड़ी कोविड के संदिग्ध मरीजों के लिए खड़ी कोच।
- फोटो : MAU
मऊ। कोरोना संक्रमण के बढ़ते ग्राफ को देखते हुए रेलवे ने सुविधा के लिए आसोलेशन कोच की व्यवस्था किया, लेकिन होम आईसोलेशन की व्यवस्था होने से रेलवे आईसोलेशन कोच शो पीस बना हुआ है। हालांकि पहले कोच में संक्रमित मरीजों के कांट्रेक्ट ट्रेसिंग में आने वाले मरीजों को रखा जाता था। लेकिन होम आईसोलेशन की व्यवस्था होने के कारण अब कांट्रेक्ट ट्रेसिंग वालों को भी क्वारंटीन करने की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में मरीजों को सुविधा पहुंचाने के लिए रेलवे स्टेशन पर आए रेलवे आईसोलेशन कोच बीते 45 दिनों से शो पीस बनकर खड़ा है। उधर रेलवे प्रशासन ने आईसोलेशन कोच को सैनिटाइज कर जिला प्रशासन के संदिग्ध मरीजों के भेजे जाने के संबंध में किसी सूचना के इंतजार में हैं।
देश में कोरोना संक्रमण के बढ़ते ग्राफ को देखते हुए रेलवे ने अपने कोचों का कोविड केयर सेंटर के रूप में परिवर्तित कर कई जगहों पर भेजा। इसी क्रम में रेलवे ने मऊ जंक्शन पर 12 कोच का आईसोलेशन कोच भेजा। सकारात्मक बात है कि पूरे देश में रेलवे आईसोलेशन कोच में संदिग्ध मरीज रखने वाला पहला जिला बना था। बीते छह जुलाई को संक्रमित मरीज ज्यादा होने तथा कोविड अस्पताल में जगह न होने पर स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमित मरीज भी शिफ्ट किया था।
हालांकि विभाग ने इसके लिए दो कोच अलग से चिहिन्त किए थे, जो कि संदिग्ध मरीजों के कोच से दूर थे। आठ जुलाई को जिला प्रशासन ने इस पर नराजगी जताई, जिसके बाद से रात में पूरे संक्रमित मरीजों को कोविड अस्पताल बापू मेडिकल में शिफ्ट कर दिया गया। जबकि संदिग्ध मरीजों को फातिमा क्वारंटीन सेंटर में भेज दिया गया था। उसके बाद से रेलवे आईसोलेशन कोच खाली पड़ा है। इस बाबत रेलवे के वाराणसी मंडल के पीआरओ अशोक कुमार का कहना है कि आईसोलेशन कोच खाली होने के बाद रेलवे स्टेशन पर अपनी जगह पर खड़ा है। जिला प्रशासन इसका इस्तेमाल अपनी आवश्यकतानुसार कर सकता है।
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देश में कोरोना संक्रमण के बढ़ते ग्राफ को देखते हुए रेलवे ने अपने कोचों का कोविड केयर सेंटर के रूप में परिवर्तित कर कई जगहों पर भेजा। इसी क्रम में रेलवे ने मऊ जंक्शन पर 12 कोच का आईसोलेशन कोच भेजा। सकारात्मक बात है कि पूरे देश में रेलवे आईसोलेशन कोच में संदिग्ध मरीज रखने वाला पहला जिला बना था। बीते छह जुलाई को संक्रमित मरीज ज्यादा होने तथा कोविड अस्पताल में जगह न होने पर स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमित मरीज भी शिफ्ट किया था।
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हालांकि विभाग ने इसके लिए दो कोच अलग से चिहिन्त किए थे, जो कि संदिग्ध मरीजों के कोच से दूर थे। आठ जुलाई को जिला प्रशासन ने इस पर नराजगी जताई, जिसके बाद से रात में पूरे संक्रमित मरीजों को कोविड अस्पताल बापू मेडिकल में शिफ्ट कर दिया गया। जबकि संदिग्ध मरीजों को फातिमा क्वारंटीन सेंटर में भेज दिया गया था। उसके बाद से रेलवे आईसोलेशन कोच खाली पड़ा है। इस बाबत रेलवे के वाराणसी मंडल के पीआरओ अशोक कुमार का कहना है कि आईसोलेशन कोच खाली होने के बाद रेलवे स्टेशन पर अपनी जगह पर खड़ा है। जिला प्रशासन इसका इस्तेमाल अपनी आवश्यकतानुसार कर सकता है।
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