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दूसरे दिन भी तेज हवा के साथ रुक-रुक कर होती रही बारिश

Mon, 18 Oct 2021 10:30 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 18 Oct 2021 10:30 PM IST
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Intermittent rain with strong wind for the second day
मऊ। रविवार को दोपहर बाद तेज हवा के साथ शुरू हुई बारिश किसानों के लिए मुसीबत की सबब बन गई। विभिन्न इलाकों में खेतों में तैयार हजारों एकड़ धान की फसल लोट गई। बारिश का सिलसिला सोमवार को भी जारी रहा। इससे धान की पैदावार सीधे तौर पर प्रभावित होने की बात कही जा रही है। किसानों का कहना है कि मौसम ने उनकी महीनों की मेहनत और उम्मीदों पर बारिश कर दी है। खेतों में बर्बात फसल को देखकर किसानों ने सिर पकड़ लिया। कहा जा रहा है कि इससे तिलहन एवं दलहन की फसल की बुआई भी पिछड़ जाएगी।
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जिले में लगभग 90 हजार हेक्टेयर में धान की बोआई की गई है। गत माह भारी बारिश से हुए नुकसान से किसान अभी उबरे भी नहीं थे कि रविवार को दोपहर बाद तेज हवा के साथ हुई बारिश से एक बार फिर हजारों एकड़ तैयार धान की फसल खेत में गिर गई। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीर उभर आईं। अगैती धान की फसल जो काटने योग्य हो गई थी, उसके पूरी तरह खराब होने की बात कही जा रही है। कई किसानों के खेत में धान की कटाई चल रही थी। फसल खेत में ही पड़ी थी, बारिश से खेत में पानी भरने के कारण पूरी फसल भीग गई। इससे बड़ा नुकसान तय माना जा रहा है।
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बारिश से तिलहनी तथा दलहनी फसलों की बुआई के पिछड़ने की संभावना प्रबल हो गई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि खेत में ज्यादा नमी होने से इस समय पक कर तैयार धान की फसल में देरी होगी एवं दलहनी एवं तिलहनी फसलों की बोआई में विलंब होगा। इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार का कहना था कि खेतों में खड़ी धान की फसल गिरने से दाने की क्वालिटी प्रभावित हो सकती है।
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पिपरीडीह: क्षेत्र के ताजपुर उस्मान, कहिनौर, सुअराबोझ, रैकवारडीह, बबुआपुर सहित विभिन्न इलाकों में तेज हवा के साथ हुई बारिश से सैकड़ों एकड़ धान की तैयार फसल गिर गई है। इस संबंध में ताजपुर उस्मानपुर गांव के किसान राधे यादव, चंद्रपति यादव का कहना है कि कर्ज लेकर धान की खेती की थी। प्राकृतिक प्रकोप से खेतों में फसल गिर गई है। ऐसे में लागत निकलना भी अब मुश्किल ही लग रहा है।
मझवारा: तेज हवा के साथ हुई बारिश से क्षेत्र के पवनी, मझवारा, सिकरौर, सेमरीजमालपुर, चचाईपार सहित विभिन्न इलाकों के खेतों में तैयार सैकड़ों एकड़ फसल गिर गई है। कटी फसल भी बारिश से भीग गई है। किसानों ने फसल क्षति का आकलन कर मुआवजा देने की मांग की। बढुआगोदाम: क्षेत्र के ताजोपुर, डुमरांव, इमिलियाडीह, पनियरा सहित क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में दूसरे दिन सोमवार को तेज हवा के साथ बारिश के चलते खेतों में धान की फसल गिरने से किसानों को उत्पादन प्रभावित होने की चिंता सताने लगी है। खेतों में काटकर छोड़ी गई धान की फसल भीगने से किसान परेशान नजर आए।
मधुबन। तहसील क्षेत्र में लगातार दो दिनों से हो रही बारिश से धान की बची खुची फ़सल भी बर्बाद हो गई। क्षेत्र में सितंबर माह में हुई बारिश के चलते धान के खेत में हुए जलजमाव की समस्या से किसान उबर भी नहीं पाए थे कि अक्टूबर माह के दूसरे पखवारे में रविवार से बारिश ने किसानों पर वज्रपात गिराने का काम किया। किसान वीर बहादुर सिंह, चंद्रिका यादव, शिव शंकर उपाध्याय ने बताया कि दो दिन से तेज हवा के बीच हो रही बारिश से धान की फसल खेत में गिर गई है। इससे धान की पैदावार पर विपरीत असर पड़ने से लोगों को महंगे चावल की खरीदारी करनी पड़ेगी। वहीं हरी सब्जियों का मूल्य भी बारिश के चलते आसमान पर पहुंच गया है।
दोहरीघाट। रुक-रुक कर दूसरे दिन भी हो रही बारिश से किसानों की चिंता बढ़ गई है। तेज हवा चलने से धान की फसल खेत में गिर गई। कोरौली निवासी किसान बेचन यादवव और पवन राय ने बताया कि इस बार अच्छी बारिश हुई थी। धान की फसल अच्छी थी। पैदावार बेहतर होने की उम्मीद थी, लेकिन मौसम ने सब चौपट कर दिया है। फसल खेत में गिर गई है। ऐसे में खेतों में फसल की कटाई कर पाना काफी मुश्किल होगा। क्षेत्र के गोंठा, पाउस, हरिपरा, तारनपुर, गोडौली, सियरही, पतनई, वुढ़ावर, फरसरा अन्य गांवों में धान की फसल खेतों में गिर गई। दूर से देखने पर खेत मैदान की तरह दिख रहे हैं। किसान सुनील सत्येंद्र राय, आकाश यादव, राम कुमार,अनंत राम, सुशील कुमार ने बताया कि धान की फसल बर्बाद होने से काफी नुकसान हो गया। धान की फसल तैयार करने में लगी सारी लागत डूब गई।

तीन डिग्री गिरा तापमान, मौसम सुहावना बना
मऊ। सोमवार को सुबह से बादल छाए रहे। इस दौरान रुक-रुक कर बारिश होती रही। दिन भर मौसम सुहावना बना रहा। इससे इस दिन अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस रहा। आर्द्रता 87 प्रतिशत रही। जबकि 19 किमी की प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल रही थी। तेज हवा के साथ बारिश होने के चलते धान की फसल खेतों में गिर जाने से किसानों को नुकसान की की चिंता खाए जा रही है। वहीं खेतों में काटकर छोड़ी गई धान की फसल भींग गई।
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