मऊ /दोहरीघाट। पहाड़ों पर हो रही भीषण बारिश के चलते तमसा तथा घाघरा का जलस्तर बढ़ने से कस्बा सहित तटवर्ती इलाके के लोगों की धड़कनें बढ़ने लगी है। घाघरा नदी के जलस्तर में 24 घंटे में 25 सेमी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। नदी के रौद्र रुप धारण करने से ऐतिहासिक धरोहरों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। घाघरा तथा तमसा नदी में उफान आने से तटवर्ती इलाके के लोगों की बेचैनी बढ़ती ही जा रही है। तमसा नदी में पानी तलहटी तक पहुंच गया था। बारिश के बाद से नगर के ढेकुलियाघाट, सत्तीघाट सहित विभिन्न घाटों पर जलस्तर बढ़ने लगा है। घाघरा नदी के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो सोमवार को गौरीशंकर घाट पर घाघरा का जलस्तर 68.90 मीटर रहा। जबकि मंगलवार को जलस्तर 25 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। नदी 69.15 मीटर पर बह रही थी। नदी के उग्र होने से तटवर्ती इलाकों के लोगों की धड़कने बढ़ने लगी है। नदी के रौद्र रुप धारण करने से नगर के मुक्तिधाम, खाकी बाबा की कुटी, संतोषी माता का मंदिर, लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला सहित विभिन्न ऐतिहासिक धरोहरों के आस्तिव पर खतरा मंडराने लगा है। हालाकि घाघरा अभी खतरा बिंदु 69.90 मीटर से 75 सेमी नीचे बह रही है। नदी में तेजी से बढ़ रहे जलस्तर से बहादुरपुर, रामपुर धनौली, नई बाजार, नवली, सरया, पतनई, ठाकुरगाव, गोधनी बीवीपुर ताहिरपुर,जमीरा चौराडीह, कोरौली, बेलौली, ठीकरहिया, रसूलपुर,सूरजपुर सहिततटवर्ती इलाकों के लोगों को नदी में बाढ़ आने की चिंता सताने लगी है। खेतों में रोपी गई धान के फसल के डूबने की आशंका से किसानों की नींद उड़ गई है।