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Mau News: 5 अस्पतालों में कहीं छह तो कहीं आठ महीने से डॉक्टर नहीं, फार्मासिस्ट कर रहे इलाज

Tue, 27 Aug 2024 01:46 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 27 Aug 2024 01:46 AM IST
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In 5 hospitals, there are no doctors for six or eight months, pharmacists are providing treatment
जिले में होमियोपैथी विधा से जिले के नौ ब्ल़ॉकों में 23 अस्पताल संचालित हो रहे हैं। लेकिन इसमें पांच ऐसे होमियोपैथिक अस्पताल ऐसे हैं जिसमें तीन में छह माह तो दो में आठ माह से अधिक समय से डॉक्टर नहीं हैं। चौंकाने वाली बात है कि रतनपुरा ब्लॉक के पांच में से तीन अस्पताल ऐसे हैं, इसमें डॉक्टर ही नहीं है। ऐसे में यहां फार्मासिस्ट और उनके भी न रहने पर वार्ड बॉय द्वारा इलाज किया जाता है। ऐसे में अब इन अस्पतालों में आने वाले मरीजों की संख्या भी नाम मात्र की रह गई है। इतना ही नहीं इन अस्पतालों में डॉक्टर न होने का फायदा भी तैनात कर्मचारियों द्वारा उठाया जाता है।
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जिले की 25 लाख की आबादी को होमियोपैथी विधा से उपचार दिलाने के उद्देश्य से 24 होमियोपैथिक अस्पताल संचालित हो रहे हैं। इसमें जिला अस्पताल परिसर के अलावा रतनपुरा ब्लॉक के नगवा, मानिकपुर, सिधवल, कुडसर, अरदौना के साथ कोईरियापार, मूगमास, सरसेना में अस्पताल है। वहीं सौसवा, पकड़ी बुजुर्ग, पूनापार, सौदी, सुल्तानीपुर, कुड़सर, सरायगगनेश, खालिसपुर, सहरोज, पिपरीडीह, पलिगढ़, परसूपुर, कटघरा महलू, अन्नूपार, सिरसा में अस्पताल संचालित हो रहा है। लेकिन रतनपुरा ब्लॉक के सिधवल, अरदौना के साथ खालिसपुर, पिपरीडीह, पलिगढ़ में बीते कई माह से डॉक्टर की तैनाती ही नहीं हुई है। ऐसे में इन अस्पतालों में अधिकांश समय या तो ताला बंद रहता है या मौजूद फार्मासिस्ट और उनके न रहने पर वार्ड बॉय द्वारा ही इलाज किया जाता है। पिपरीडीह निवासी धीरेंद्र तो पलिगढ़ निवासी सुनील और सिधवल के राममनोहर और खालिसपुर के मुस्कान ने बताया कि उनके गांव में भले ही होमियोपैथिक अस्पताल है, लेकिन इसमें डॉक्टर ही नहीं है। ऐसे में बहुत ही कम ही लोग इस अस्पताल में इलाज को प्राथमिकता देते हैं, अगर कोई मरीज भी चला जाता है तो डॉक्टर न होने से वह बैरंग लौट जाता है।
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