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चमत्कार से कम नहीं हुसैन का ग़म
mau
Updated Mon, 02 Jul 2018 12:41 AM IST
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घोसी नगर के सदर इमामबाड़ा में तकरीर करते शिया पर्सनल बोर्ड के सदस्य मौलाना मिर्जा यासूब अब्बास।
- फोटो : mau
राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित सदर इमाम बारगाह बड़ागांव में शनिवार की देर शाम आल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना मिर्जा यासूब अब्बास ने मजलिस को खिताब किया। कहा कि इमाम हुसैन का गम किसी मोजिजे (चमत्कार) से कम नहीं है। जिसे यह चमत्कार देखना हो वह मजलिसों में शिरकत करे। मौलाना अब्बास, मौलाना तहजीबुल हसन मरहूम के चालीसवें की मजलिस को खिताब कर रहे थे।
मजलिस का आगाज अली हुसैन करबलाई की र्सियख्वानी से हुआ। अजादारों को खिताब करते हुए मौलाना अब्बास ने कहा कि 14 सदियों से इमाम और उनके साथियों की शहादत की दास्तां सुनाई जाती है, लेकिन जब भी कहीं मजलिस में कर्बला के शहीदों का जिक्र होता है ग़मे इमाम हुसैन ताजा हो जाता है। लोग फूट-फूट के रोने लगते हैं। मौलाना ने कहा कि इंसान की फितरत है कि रोता उसी को है जिसे देखे हो और जिसे नहीं देखता उसे नहीं रोता। न हमने अली अकबर की जवानी देखी, न हमने क़ासिम का बचपना देखा, न हमने असग़र का मचलना देखा, न हमने सैयदे सज्जाद के हाथों में हथकड़ियां देखी, न हमने अब्बास के कटे हुए हाथ देखे और न ही हमने इमाम हुसैन की शहादत देखी। फिर भी जब कभी मजलिसों में इनकी शहादत का तजकिरा होता है तो बेसाख्ता आंखों से आंसू निकल पड़ते हैं।
मजलिस के बाद अजादारों ने नौहा और मातम कर शहीदाने कर्बला को खिराजे अकीदत पेश की। इस अवसर पर मौलाना मजाहिर हुसैन, मौलाना नासिमुल हसन, मौलाना औन मोहम्मद, एडवोकेट शमसुल हसन, आले एबा, अब्बास खां, कामरान, जरगाम हुसैन, नसीम हैदर, सलमान हैदर आदि शामिल रहे।
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मजलिस का आगाज अली हुसैन करबलाई की र्सियख्वानी से हुआ। अजादारों को खिताब करते हुए मौलाना अब्बास ने कहा कि 14 सदियों से इमाम और उनके साथियों की शहादत की दास्तां सुनाई जाती है, लेकिन जब भी कहीं मजलिस में कर्बला के शहीदों का जिक्र होता है ग़मे इमाम हुसैन ताजा हो जाता है। लोग फूट-फूट के रोने लगते हैं। मौलाना ने कहा कि इंसान की फितरत है कि रोता उसी को है जिसे देखे हो और जिसे नहीं देखता उसे नहीं रोता। न हमने अली अकबर की जवानी देखी, न हमने क़ासिम का बचपना देखा, न हमने असग़र का मचलना देखा, न हमने सैयदे सज्जाद के हाथों में हथकड़ियां देखी, न हमने अब्बास के कटे हुए हाथ देखे और न ही हमने इमाम हुसैन की शहादत देखी। फिर भी जब कभी मजलिसों में इनकी शहादत का तजकिरा होता है तो बेसाख्ता आंखों से आंसू निकल पड़ते हैं।
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मजलिस के बाद अजादारों ने नौहा और मातम कर शहीदाने कर्बला को खिराजे अकीदत पेश की। इस अवसर पर मौलाना मजाहिर हुसैन, मौलाना नासिमुल हसन, मौलाना औन मोहम्मद, एडवोकेट शमसुल हसन, आले एबा, अब्बास खां, कामरान, जरगाम हुसैन, नसीम हैदर, सलमान हैदर आदि शामिल रहे।
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