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अस्पतालों में अग्निशमन के पुख्ता इंतजाम नहीं
mau news
Updated Sun, 16 Jul 2017 11:47 PM IST
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सहादतपुरा स्थित अली बिल्डिंग मार्केट में नही है कोई अग्निशमन का इंतजाम।
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मऊ। लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में आग की घटना से मौत और मची तबाही के बाद जिले के अस्पतालों में अग्निशमन की लचर व्यवस्था पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। हालांकि अभी तक किसी अस्पताल में आग की घटना नहीं हुई है लेकिन अगर ऐसा हुआ तो बड़े पैमाने पर तबाही होगी। इसकी वजह दो को छोड़ अन्य अस्पतालों में अग्निशमन का पुख्ता इंतजाम नहीं होना है। इसके अलावा अधिकतर निजी अस्पतालों के भवन अग्निशमन विभाग के मानक नक्शे के आधार पर नहीं बने हैं।
जिला अस्पताल में आग लगने की स्थिति में उसपर काबू पाने के लिए एक भी अग्निशमन यंत्र नहीं है। शहर के एक बड़े निजी अस्पताल में अग्निशमन यंत्र तो है लेकिन इनकी संख्या अपर्याप्त है। अग्निशमन के मानक के अनुसार मल्टीस्टोरी बिल्डिंग या सार्वजनिक भवनों का गेट इतना चौड़ा होना चाहिए कि कोई हादसा होने पर लोग आसानी से निकल सकें। लेकिन शहर के प्रतिष्ठित निजी अस्पताल का गेट काफी संकरा है जिससे एक साथ कई लोग नहीं निकल सकते हैं। रात में तो सिर्फ इमरजेंसी गेट ही खुला रहता है। यदि यहां आग लग गई तो भारी क्षति हो सकती है। इसी प्रकार शहर के बीचोबीच स्थित अली बिल्डिंग का हाल है। इस बिल्डिंग में 350 दूकानें हैं। संकरी गलियां हैं। इस बाजार से निकलने के लिए मात्र चार रास्ते हैं। वे इतने संकरे और घुमावदार हैं कि कोई भी घटना होने पर भगदड़ मच सकती है और कई लोगों की जानें जा सकती हैं। ऐसे ही कई मार्केट शहर के भीतरी इलाके में हैं जो व्यावसायिक तो हैं पर मास्टर प्लान के मानकों के अनुसार नहीं हैं और न ही आग से बचाव के सुरक्षा मानकों को ही पूरा करते हैं। इस बाबत अग्निशमन विभाग की ओर से इन्हें नोटिस देने के बाद भी अग्निशमन व्यवस्था पर अमल नहीं किया जा रहा है।
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सत्रह निजी अस्पतालों, छह व्यावसायिक भवनों के स्वामियों को नोटिस दिया गया है लेकिन भवन स्वामियों ने अग्निशमन व्यवस्था पर अमल नहीं किया है। इसकी रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी जाएगी।-धर्मचंद्र, अग्निशमन अधिकारी
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जिला अस्पताल में आग लगने की स्थिति में उसपर काबू पाने के लिए एक भी अग्निशमन यंत्र नहीं है। शहर के एक बड़े निजी अस्पताल में अग्निशमन यंत्र तो है लेकिन इनकी संख्या अपर्याप्त है। अग्निशमन के मानक के अनुसार मल्टीस्टोरी बिल्डिंग या सार्वजनिक भवनों का गेट इतना चौड़ा होना चाहिए कि कोई हादसा होने पर लोग आसानी से निकल सकें। लेकिन शहर के प्रतिष्ठित निजी अस्पताल का गेट काफी संकरा है जिससे एक साथ कई लोग नहीं निकल सकते हैं। रात में तो सिर्फ इमरजेंसी गेट ही खुला रहता है। यदि यहां आग लग गई तो भारी क्षति हो सकती है। इसी प्रकार शहर के बीचोबीच स्थित अली बिल्डिंग का हाल है। इस बिल्डिंग में 350 दूकानें हैं। संकरी गलियां हैं। इस बाजार से निकलने के लिए मात्र चार रास्ते हैं। वे इतने संकरे और घुमावदार हैं कि कोई भी घटना होने पर भगदड़ मच सकती है और कई लोगों की जानें जा सकती हैं। ऐसे ही कई मार्केट शहर के भीतरी इलाके में हैं जो व्यावसायिक तो हैं पर मास्टर प्लान के मानकों के अनुसार नहीं हैं और न ही आग से बचाव के सुरक्षा मानकों को ही पूरा करते हैं। इस बाबत अग्निशमन विभाग की ओर से इन्हें नोटिस देने के बाद भी अग्निशमन व्यवस्था पर अमल नहीं किया जा रहा है।
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सत्रह निजी अस्पतालों, छह व्यावसायिक भवनों के स्वामियों को नोटिस दिया गया है लेकिन भवन स्वामियों ने अग्निशमन व्यवस्था पर अमल नहीं किया है। इसकी रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी जाएगी।-धर्मचंद्र, अग्निशमन अधिकारी
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