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फालोअप: फर्जी वरासत में कई लोगों की है मिली भगत

Tue, 13 Apr 2021 11:22 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 13 Apr 2021 11:22 PM IST
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Heritage will be investigated in a fake manner
मऊ। गोंठा निवासी हबीबुल्लाह को मृत दिखा कर दो लोगों की ओर से उसकी जमीन अपने नाम कराने के मामले की जांच होगी। एसडीएम ने मामले की जांच कराने के लिए समिति गठित करने और दोषी पाए गए व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है।
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नियमानुसार पात्र लोगों को वरासत के लिए लेखपाल महीनों दौड़ाते हैं लेकिन गोंठा वाले मामले में राजस्वकर्मियों ने त्वरित गति से न सिर्फ वरासत दर्ज कर उसे खतौनी में दर्ज कर दिया। यह मामला उजागर होने के बाद मंगलवार को भी कोई संशोधन नहीं किया गया।
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राजस्व संहिता के अनुसार वरासत दर्ज करने के लिए मृतक के अंतिम संस्कार की रसीद, म़ृत्यु प्रमाण पत्र, आधार की फोटो कापी, परिवार रजिस्टर की नकल, ग्राम प्रधान द्वारा जारी प्रमाणपत्र आवेदन के साथ संलग्न करना होता है। इसके बाद लेखपाल को गांव में जाकर संबंधित व्यक्ति की मृत्यु तथा वारिस का सत्यापन करना होता है। लेखपाल की रिपोर्ट पर राजस्व निरीक्षक आदेश पारित करते हैं। इसके बाद आदेश मालिकान रजिस्टर पर चढ़ता है और कंप्यूटर में खतौनी पर चढ़ाया जाता है। गोंठा के प्रकरण में जिंदा हबीबुल्लाह पुत्र हफीज को मृतक दर्शा कर उसका नाम निरस्त कर अबुदुल हई और अब्दुल अलीम का नाम दर्ज करने का आदेश 15 दिसंबर 2020 को पारित कर दिया गया है और 18 जनवरी 2021 को उस आदेश का अनुपालन करके कंप्यूटर पर अपलोड कर दिया गया है। 33 दिनों में ही जीवित व्यक्ति को मृत दर्शाकर फर्जी वरासत दर्ज कर दी गई।
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इस मामले में तत्कालीन ग्राम प्रधान रामजन्म गुप्त का कहना है कि हमने कोई प्रमाण नहीं दिया है। अगर इस मामले में उनकी तरफ से कोई प्रमाणपत्र लगाया गया है तो वह फर्जी होगा। इस संबंध में तहसीलदार पीसी श्रीवास्तव का पक्ष जानने के लिए उनको फोन किया गया लेकिन उन्होंने सरकारी मोबाइल रिसीव नहीं किया।

कोट.
यह प्रकरण काफी गंभीर है। इसकी जांच के लिए समिति गठित की जाएगी। दोषियों का पता लगाकर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। -डॉ.सीएल सोनकर, उपजिलाधिकारी घोसी।
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