{"_id":"6a74d6176fdf6838c90e6824","slug":"har-ghar-tiranga-campaign-146-women-from-the-group-will-stitch-215-lakh-flags-mau-news-c-295-1-mau1002-149863-2026-08-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"हर घर तिरंगा अभियान: समूह की 146 महिलाएं सिलेंगी 2.15 लाख झंडे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हर घर तिरंगा अभियान: समूह की 146 महिलाएं सिलेंगी 2.15 लाख झंडे
विज्ञापन
घोसी ब्लॉक क्षेत्र में झंडा की सिलाई करतीं स्वयं सहायता समूह की महिलाएं। संवाद
मऊ। स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर जिले में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की तैयारियां तेज हो गई हैं। शासन के निर्देश पर इस वर्ष भी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं 2.15 लाख तिरंगे तैयार करेंगी। इस पहल से जहां महिलाओं को रोजगार मिलेगा, वहीं उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता भी मजबूत होगी।
जिले के 52 स्वयं सहायता समूहों की 146 महिलाओं को तिरंगा तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अभियान के तहत तीन अलग-अलग आकार के राष्ट्रीय ध्वज तैयार किए जा रहे हैं। प्रत्येक तिरंगा बनाने पर महिलाओं को 20 रुपये का भुगतान किया जाएगा। झंडों के निर्माण में कॉटन अथवा पॉलिएस्टर कपड़े का उपयोग किया जा रहा है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन सभी तैयार तिरंगों की खरीद करेगा और भुगतान की राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में भेजी जाएगी। इसके बाद इन तिरंगों का जिलेभर में निशुल्क वितरण किया जाएगा।
विज्ञापन
अभियान के तहत जिले में तिरंगा रैली, कॉन्सर्ट, तिरंगा प्रदर्शनी, रंगोली प्रतियोगिता सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों के लिए शासन ने पांच लाख रुपये तक खर्च की अनुमति प्रदान की है। अभियान का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और नई पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति एवं स्वतंत्रता संग्राम के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
तिरंगा निर्माण का कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। 4 अगस्त तक स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने 66,995 तिरंगे तैयार कर लिए थे। इनमें दोहरीघाट ब्लॉक की महिलाओं ने सबसे अधिक 15,200 तिरंगे बनाए। वहीं 5 अगस्त तक जिले में तैयार तिरंगों की संख्या बढ़कर 87,117 पहुंच गई, जिससे अभियान ने गति पकड़ ली है।
विज्ञापन
जिले के 52 स्वयं सहायता समूहों की 146 महिलाओं को तिरंगा तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अभियान के तहत तीन अलग-अलग आकार के राष्ट्रीय ध्वज तैयार किए जा रहे हैं। प्रत्येक तिरंगा बनाने पर महिलाओं को 20 रुपये का भुगतान किया जाएगा। झंडों के निर्माण में कॉटन अथवा पॉलिएस्टर कपड़े का उपयोग किया जा रहा है।
विज्ञापन
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन सभी तैयार तिरंगों की खरीद करेगा और भुगतान की राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में भेजी जाएगी। इसके बाद इन तिरंगों का जिलेभर में निशुल्क वितरण किया जाएगा।
विज्ञापन
अभियान के तहत जिले में तिरंगा रैली, कॉन्सर्ट, तिरंगा प्रदर्शनी, रंगोली प्रतियोगिता सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों के लिए शासन ने पांच लाख रुपये तक खर्च की अनुमति प्रदान की है। अभियान का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और नई पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति एवं स्वतंत्रता संग्राम के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
तिरंगा निर्माण का कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। 4 अगस्त तक स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने 66,995 तिरंगे तैयार कर लिए थे। इनमें दोहरीघाट ब्लॉक की महिलाओं ने सबसे अधिक 15,200 तिरंगे बनाए। वहीं 5 अगस्त तक जिले में तैयार तिरंगों की संख्या बढ़कर 87,117 पहुंच गई, जिससे अभियान ने गति पकड़ ली है।