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हनुमान को विरासत में नही मिली थी अपराधिक प्रवृत्ति

Mon, 10 Aug 2020 11:51 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 10 Aug 2020 11:51 PM IST
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Hanuman did not inherit the criminal tendency
मऊ। हनुमान पांडेय के परिवार में कोई अपराधिक पृष्ठभूमि का व्यक्ति नहीं है। वह बचपन से ही मनटांठ किस्म का था। वह चाहता था कि लोग उसके सामने झुक के रहें, चलें। वह न तो किसी प्रतिशोध में अपराधी बना और न ही अपराध उसे विरासत में ही मिला। वह शौकिया अपराध के दल दल में फंसता चला गया। लखनऊ में पढ़ाई के दौरान गलत सोहबत में पड़कर अपराध की ओर उसका झुकाव हो गया।
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लखनऊ में ही हुई एक हत्या में वह जेल चला गया। जेल में उसकी मुलाकात कुख्यात अभय सिंह जैसे बदमाश से हुई। अभय सिंह ने उसे मुन्ना बजरंगी से मिलवाया और बजरंगी ने उसे मुख्तार से मिलवाया। उसकी निशानेबाजी और वफादारी से मुख्तार ने उसे अपने साथ मिला लिया और हनुमान मुख्तार के लिए काम करने लगा। बचपन में गांव में वह लोगों पर अपना सिक्का जमाने की कोशिश करता रहा। वह मुख्तार का दाहिना हाथ माना जाता था। बीजेपी विधायक कृष्णानंद हत्याकांड में उसका नाम आया था।
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1995-2000 के आसपास मुख्तार अंसारी और कृष्णानंद राय की दुश्मनी चरम पर थी। उस दौरान बृजेश सिंह भूमिगत थे और कृष्णानंद राय फ्रंट फुट पर। ठेके-पट्टे को लेकर आए दिन गोलियां चलती रहती थीं। मुख्तार अंसारी, बृजेश सिंह और कृष्णानंद राय की चर्चा होती रहती थी। हनुमान पांडेय भी उसी दौर प्रभावित हो रहा था।
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बताया जाता है कि अभय सिंह ने हनुमान पांडेय को मुन्ना के पास भेजा और यहीं से दोनों की दोस्ती परवान चढ़ी। हनुमान की वफादारी मुन्ना को भा गई और दोनों साथ-साथ वारदात को अंजाम देने लगे। मुन्ना बजरंगी ने हनुमान को मुख्तार अंसारी से मिलवाया। मुख्तार को भी हर समय ऐसे आदमी की जरूरत होती है जो चुनाव में उसका साथ दे सके।
मुख्तार से भी खराब होने लगे थे रिश्ते:
हनुमान खुद राजनीति में आना चाहता था ,इसकी शुरुआत वह वह ब्लाक प्रमुख पद का चुनाव लड़कर करना चाहता था लेकिन यह मुख्तार को यह मंजूर नहीं था। इससे कुछ समय के लिए उससे मुख्तार से रिश्ते खराब हो गए थे। उधर एसटीएफ और पुलिस मुन्ना बजरंगी के पीछे पड़ी थी. वह मुंबई चला गया। मुन्ना की कमी हनुमान पांडेय ने मुख्तार का साथ देकर पूरी किया।
हनुमान का शव गांव न लाने देने पर नाराजगी:
हनुमान के पिता बाल दत्त पांडेय ने बताया कि एक तो पुलिस ने बेटे का फर्जी एनकाउंटर में मार दिया। दूसरे उसका शव भी गांव नहीं लाने दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा पुलिस ने तानाशाही रवैया अपना है। बेटे का शव गांव आता तो पारंपरिक रीति रिवाज के अंतिम संस्कार किया गया होता लेकिन ऐसा न करके पुलिस ने अंग्रेजों के कारनामों को पीछे छोड़ दिया है।

सीबीआई जांच के लिए याचिका:
हनुमान के पिता ने बताया कि एसटीएफ के इस फर्जी एनकाउंटर की सीबाईआई जांच कराने की बात उन्होंने कही है। चूंकि इसका आदेश सरकार नहीं देती और न ही सरकार पर उन्हें भरोसा है, इसलिए एक अधिवक्ता के माध्यम से उन्होंने सीबीआई जांच के लिए याचिका दायर करा दी है।
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