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बुजुर्गों के बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल में शुरू हुआ जेरिएट्रिक वार्ड
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मऊ। बुजुर्गों को इलाज के लिए जिला अस्पताल में अब परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी। उनके लिए अस्पताल में अलग से जेरियेट्रिक वार्ड के रूप में विशेष व्यवस्था की गई है। इस वार्ड में बुजुर्ग मरीजों के इलाज व उनकी देखभाल लिए 24 घंटे चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मचारी की व्यवस्था है। शासन के आदेश के क्रम में 60 वर्ष व उससे ऊपर की उम्र के मरीजों के लिए 10 बेड का अत्याधुनिक जेरियाट्रिक बनाया गया है।
इस वार्ड में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हार्टअटैक सहित कई बीमारियों से ग्रसित बुजुर्ग मरीजों का इलाज किया जा रहा है। इस वार्ड में मरीजों के बेहतर इलाज व देखभाल के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर, तीन स्टाफ नर्स, दो सेनेट्ररी अटेंडेंट की तैनाती की गई है। ओपीडी में आने वाले मरीजों में गंभीर रूप से बीमार मरीजों को इस वार्ड में भर्ती किया जा रहा है। इस वार्ड के बन जाने से बेसहारा व वृद्धा आश्रम में रहने वाले वृद्धों को इलाज में काफी सहूलियत मिलेगी। इस वार्ड में सांस की समस्या के कारण भर्ती बलिया जनपद के सोनाडीह निवासी अवध बिहारी तिवारी ने बताया कि वह काफी गंभीर अवस्था में इस वार्ड में भर्ती किए गए थे। लेकिन बेहतर देखभाल के कारण उनके स्वास्थ्य में काफी सुधार हुआ है।
बेड पर नहीं लगाया गया कॉलिंग बेल
मऊ। जेरिएट्रिक वार्ड में शासन की मंशा के अनुसार प्रत्येक बेड के पास मरीजों की सहूलियत के लिए कॉल बेल लगाया जाना था। लेकिन वार्ड में सभी सुविधाएं तो मुहैया कराई गई है लेकिन कॉलिंग बेल नहीं लगाया जा सका है। इस बेल के द्वारा मरीज दिक्कत होने या जरूरत होने पर घंटी बजाकर अटेंडर व स्वास्थ्य कर्मी को तत्काल अपने पास बुला लेता।
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इस वार्ड में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हार्टअटैक सहित कई बीमारियों से ग्रसित बुजुर्ग मरीजों का इलाज किया जा रहा है। इस वार्ड में मरीजों के बेहतर इलाज व देखभाल के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर, तीन स्टाफ नर्स, दो सेनेट्ररी अटेंडेंट की तैनाती की गई है। ओपीडी में आने वाले मरीजों में गंभीर रूप से बीमार मरीजों को इस वार्ड में भर्ती किया जा रहा है। इस वार्ड के बन जाने से बेसहारा व वृद्धा आश्रम में रहने वाले वृद्धों को इलाज में काफी सहूलियत मिलेगी। इस वार्ड में सांस की समस्या के कारण भर्ती बलिया जनपद के सोनाडीह निवासी अवध बिहारी तिवारी ने बताया कि वह काफी गंभीर अवस्था में इस वार्ड में भर्ती किए गए थे। लेकिन बेहतर देखभाल के कारण उनके स्वास्थ्य में काफी सुधार हुआ है।
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बेड पर नहीं लगाया गया कॉलिंग बेल
मऊ। जेरिएट्रिक वार्ड में शासन की मंशा के अनुसार प्रत्येक बेड के पास मरीजों की सहूलियत के लिए कॉल बेल लगाया जाना था। लेकिन वार्ड में सभी सुविधाएं तो मुहैया कराई गई है लेकिन कॉलिंग बेल नहीं लगाया जा सका है। इस बेल के द्वारा मरीज दिक्कत होने या जरूरत होने पर घंटी बजाकर अटेंडर व स्वास्थ्य कर्मी को तत्काल अपने पास बुला लेता।
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