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Mau News: गैरइरादतन हत्या के मामले में पिता और तीन पुत्रों को 10-10 साल की सजा

Tue, 31 Mar 2026 11:57 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 31 Mar 2026 11:57 PM IST
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Father and three sons sentenced to 10 years each for culpable homicide
जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजय कुमार यादव ने बांस काटने के विवाद में 13 साल पहले हुई मारपीट में घायल छोटेलाल की मौत के मामले में गैरइरादतन हत्या का प्रयास, बलवा, गाली व धमकी में पिता व उसके तीन पुत्रों को दोषी पाया।
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सभी को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा के साथ ही कुल 26-26 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया। अर्थदंड न देने पर 3-3 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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वहीं, अर्थदंड जमा हो जाने पर वादी मुकदमा सुब्बा को आधी धनराशि देने का आदेश दिया गया। एक आरोपी के नाबालिग होने के चलते उसकी पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई थी। मामला चिरैयाकोट थाना क्षेत्र का है।
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अभियोजन के अनुसार, मनाजीत चिरैयाकोट निवासी सुब्बा पुत्र रामदरस की तहरीर पर एफआईआर दर्ज हुई। वादी का कथन है कि बांस काटने के विवाद को लेकर उसके पड़ोसी अच्छेलाल पुत्र रामदरस, सुरेंद्र, जितेंद्र और अंगद पुत्रगण अच्छेलाल व एक अन्य ने 8 मई 2012 को मारपीट की।
जिसमें वादी सुब्बा, सुनीता, मंती, यशवंत और छोटेलाल को गंभीर चोटें आईं। इलाज के दौरान छोटेलाल की मौत हो गई। पुलिस ने मामले की विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। न्यायालय में कुल 11 गवाहों को पेश कर अभियोजन का पक्ष रखा गया। बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है।
जिला जज ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपीगण अच्छेलाल, सुरेंद्र, जितेंद्र और अंगद को बलवा, मारपीट, गैरइरादतन हत्या, गैरइरादतन हत्या का प्रयास, गाली, धमकी व गंभीर चोट पहुंचाने के मामले में दोषी पाया।
सभी को गैरइरादतन हत्या के मामले में 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा के साथ ही 10-10 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया। गैरइरादतन हत्या के प्रयास के मामले में सात-सात वर्ष की सजा के साथ ही 8-8 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया।

गंभीर चोट पहुंचाने के मामले में पांच-पांच वर्ष की सजा के साथ ही 5-5 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया। मारपीट के मामले में 1-1 वर्ष की सजा तथा बलवा, गाली व धमकी देने के मामले में क्रमशः 2-2 वर्ष की सजा के साथ ही 1-1 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया।
अर्थदंड न देने पर 3-3 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। एक आरोपी के नाबालिग होने के चलते उसकी पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई थी।
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