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कुशाडीह माइनर में पानी न आने से किसान परेशान
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हलधरपुर। दोहरीघाट पंप कैनाल से कुशाडीह माइनर में पानी न आने से गन्ना की फसल, हरे चारे और पेड़ी तथा धान की नर्सरी डालने में किसानों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
कुशाडीह माइनर से संबद्ध गहना ,मलपुर, छिछोर, अइलख, विलौंझा और नसीराबाद आदि दर्जनों गांवों के हजारों किसानों की हजारों हेक्टेएयर भूमि की सिंचाई की जाती है किसानों के अनुसार मई माह में गन्ने की बोई गई फसल, पेड़ी, हरे चारे को बचाने तथा धान की नर्सरी डालने को लेकर किसान चिंता में हैं। नहर में पानी नहीं आ रहा है , थोड़ा पानी आ भी रहा है तो उसका प्रवाह इतना कम रहा रहा है कि वह कुलाबों से होकर नालियों तक नहीं पहुंच पा रहा है। सफाई न होने से नहर में बड़ी बड़ी घास उग आई है जिससे माइनर के टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। किसानों का कहना है कि पंपिंग सेट से सिंचाई करने पर डेढ़ सौ रुपया प्रति घंटा दे पाना हर छोटे किसानों के बश की बात नहीं है। वहीं बिजली कटौती के निजी नलकूप शोपीस बनकर रह गए हैं। इस संबंध में क्षेत्र के अमरजीत यादव ,नरेंद्र सिंह ,भगवान सिंह, पारस यादव, रिंकू सिंह और कमलेश सिंह का कहना है कि किसानों की जरूरत पर माइनर में पानी नहीं छोड़ा जाता है धान की नर्सरी डालने की चिंता हर किसानों को सता रही है। इन किसानों का कहना है कि नहर में भरपूर पानी अभिलंब नहीं छोड़ा गया तो सड़क पर निकलने को विवश होंगे।
भरपूर पानी छोड़ा जा रहा
उधर सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता वीरेंद्र सरोज का कहना है कि माइनर में भरपूर पानी छोड़ा जा रहा है। उनका कहना है कि माइनर में पहले के गांवों के किसानों द्वारा अवरोध बनाकर पानी के प्रवाह को रोक दिया जा रहा है जिससे आगे के गांवों के किसानों को भरपूर पानी मिल पाने में बाधा हो रही है। लोगों को भी चाहिए कि नहर के पानी के प्रवाह को बाधित न करें और आगे के किसानों के हितों के बारे में भी ध्यान दें।
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कुशाडीह माइनर से संबद्ध गहना ,मलपुर, छिछोर, अइलख, विलौंझा और नसीराबाद आदि दर्जनों गांवों के हजारों किसानों की हजारों हेक्टेएयर भूमि की सिंचाई की जाती है किसानों के अनुसार मई माह में गन्ने की बोई गई फसल, पेड़ी, हरे चारे को बचाने तथा धान की नर्सरी डालने को लेकर किसान चिंता में हैं। नहर में पानी नहीं आ रहा है , थोड़ा पानी आ भी रहा है तो उसका प्रवाह इतना कम रहा रहा है कि वह कुलाबों से होकर नालियों तक नहीं पहुंच पा रहा है। सफाई न होने से नहर में बड़ी बड़ी घास उग आई है जिससे माइनर के टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। किसानों का कहना है कि पंपिंग सेट से सिंचाई करने पर डेढ़ सौ रुपया प्रति घंटा दे पाना हर छोटे किसानों के बश की बात नहीं है। वहीं बिजली कटौती के निजी नलकूप शोपीस बनकर रह गए हैं। इस संबंध में क्षेत्र के अमरजीत यादव ,नरेंद्र सिंह ,भगवान सिंह, पारस यादव, रिंकू सिंह और कमलेश सिंह का कहना है कि किसानों की जरूरत पर माइनर में पानी नहीं छोड़ा जाता है धान की नर्सरी डालने की चिंता हर किसानों को सता रही है। इन किसानों का कहना है कि नहर में भरपूर पानी अभिलंब नहीं छोड़ा गया तो सड़क पर निकलने को विवश होंगे।
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भरपूर पानी छोड़ा जा रहा
उधर सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता वीरेंद्र सरोज का कहना है कि माइनर में भरपूर पानी छोड़ा जा रहा है। उनका कहना है कि माइनर में पहले के गांवों के किसानों द्वारा अवरोध बनाकर पानी के प्रवाह को रोक दिया जा रहा है जिससे आगे के गांवों के किसानों को भरपूर पानी मिल पाने में बाधा हो रही है। लोगों को भी चाहिए कि नहर के पानी के प्रवाह को बाधित न करें और आगे के किसानों के हितों के बारे में भी ध्यान दें।
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