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समर्थन मूल्य से 350 रुपये कम पर बिचौलियों को धान बेच रहे किसान
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मऊ। जनपद में धान की सरकारी खरीद का लाभ किसानों को नहीं मिल रहा है। क्रय केंद्रों पर खरीद न होने से किसान लाचारी में बिचौलियों को धान बेच रहे हैं। समर्थन मूल्य से प्रति क्विंटल साढ़े तीन सौ रुपये कम पर किसानों को धान बेचना पड़ रहा है। वह भी दो महीने में कीमत चुकाने की शर्त पर किसानों को धान बिचौलियों को बेचने को विवश होना पड़ रहा है। प्रशासन क्रय केंद्रों पर बोरों का अभाव बता कर पल्ला झाड़ रहा है।
जनपद में साधन सहकारी समितियों, एग्रो और पीसीएफ के कुल 34 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। क्रय केंद्रों पर धान बेचने के लिए किसानों ने आनलाइन रजिस्ट्रेशन कराकर टोकन लिया। क्रय केंद्रों पर दो चार दिनों तक धीमी गति से धान क्रय किया गया इसके बाद खरीदारी बंद कर दी गई। केंद्र प्रभारियों ने किसानों से कहा कि बोरे खत्म हो गए हैं। कहीं गोदाम भर जाने की बात कही गई। धान का सरकारी समर्थन मूल्य 1868 रुपये प्रति क्विंटल है।
किसान धान कटवाकर घर पर रख लिए हैं। मौसम खराब होने से धान के भीगने के डर से किसान परेशान हैं। शुरुआती दौर धान की खरीद हुई लेकिन एक सप्ताह के बाद बंद हो गई। इसके बाद बिचौलियों ने धान खरीदने के लिए किसानों से संपर्क करना शुरू किया। शुरुआती दिनों में 1300 रुपये प्रति क्विंटल तक धान बिचौलियों ने खरीद लिया। अब भी अधिकतम 1500 रुपये प्रति क्विंटल धान बिचौलिये खरीद रहे हैं। इस प्रकार समर्थन मूल्य से 368 रुपये प्रति क्विंटल कम कीमत किसानों को मिल रही है।
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बोरे उपलब्ध कराती हैं चार एजेंसियां
धान की खरीद के लिए चार एजेंसियां बोरे उपलब्ध कराती हैं। खाद्य विभाग, एग्रो, पीसीएफ और भारतीय खाद्य निगम। इनमें से तीन एजेंसियां तो बोरों की उपलब्धता कर रही हैं। लेकिन पीसीएफ इसमें सबसे पीछे है।
लक्ष्य के सापेक्ष अब तक हुई खरीद
जनपद में धान खरीद का लक्ष्य पांच लाख क्विंटल है। इसके सापेक्ष अब तक 2423 किसानों से दस हजार आठ सौ ग्यारह एमटी खरीद की जा चुकी है। इनमें से 62 प्रतिशत किसानों के खाते में भुगतान भेज दिया गया है। जनपद में 8963 किसानों ने धान खरीद के लिए पंजीकरण कराया है।
इंदारा ब्राह्मणपुरा निवासी सुनील कुमार सिंह ने धान की अच्छी खेती करते हैं। एक महीना पहले कसारा स्थित क्रय केंद्र पर पंजीकरण कराये थे। क्रय केंद्र पर खरीद नहीं हुई तो बिचौलिये के हाथ 1500 रुपये प्रति क्विंटल में धान बेच दिया।
मुहम्मदपुर बाबूपुर निवासी विवेक सिंह का कहना है कि 24 दिन पहले रजिस्ट्रेशन कराकर क्रय केंद्र पर धान बेचने की उम्मीद कर रहे थे। धान खरीद की धीमी प्रक्रिया से निराश होने पर धान बिचौलिये को बेच दिया।
जरूरत वाले केंद्रों पर रोजाना बोरे भेजवाए जा रहे हैं। लक्ष्य के सापेक्ष धान की खरीद की जाएगी। किसान घबराएं नहीं। किसानों के खातों में भुगतान भी आ रहा है। अभी तक 62 प्रतिशत किसानों को भुगतान किया जा चुका है।
- एके सिंहा, डिप्टी आरएमओ, मऊ।
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जनपद में साधन सहकारी समितियों, एग्रो और पीसीएफ के कुल 34 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। क्रय केंद्रों पर धान बेचने के लिए किसानों ने आनलाइन रजिस्ट्रेशन कराकर टोकन लिया। क्रय केंद्रों पर दो चार दिनों तक धीमी गति से धान क्रय किया गया इसके बाद खरीदारी बंद कर दी गई। केंद्र प्रभारियों ने किसानों से कहा कि बोरे खत्म हो गए हैं। कहीं गोदाम भर जाने की बात कही गई। धान का सरकारी समर्थन मूल्य 1868 रुपये प्रति क्विंटल है।
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किसान धान कटवाकर घर पर रख लिए हैं। मौसम खराब होने से धान के भीगने के डर से किसान परेशान हैं। शुरुआती दौर धान की खरीद हुई लेकिन एक सप्ताह के बाद बंद हो गई। इसके बाद बिचौलियों ने धान खरीदने के लिए किसानों से संपर्क करना शुरू किया। शुरुआती दिनों में 1300 रुपये प्रति क्विंटल तक धान बिचौलियों ने खरीद लिया। अब भी अधिकतम 1500 रुपये प्रति क्विंटल धान बिचौलिये खरीद रहे हैं। इस प्रकार समर्थन मूल्य से 368 रुपये प्रति क्विंटल कम कीमत किसानों को मिल रही है।
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धान की खरीद के लिए चार एजेंसियां बोरे उपलब्ध कराती हैं। खाद्य विभाग, एग्रो, पीसीएफ और भारतीय खाद्य निगम। इनमें से तीन एजेंसियां तो बोरों की उपलब्धता कर रही हैं। लेकिन पीसीएफ इसमें सबसे पीछे है।
लक्ष्य के सापेक्ष अब तक हुई खरीद
जनपद में धान खरीद का लक्ष्य पांच लाख क्विंटल है। इसके सापेक्ष अब तक 2423 किसानों से दस हजार आठ सौ ग्यारह एमटी खरीद की जा चुकी है। इनमें से 62 प्रतिशत किसानों के खाते में भुगतान भेज दिया गया है। जनपद में 8963 किसानों ने धान खरीद के लिए पंजीकरण कराया है।
इंदारा ब्राह्मणपुरा निवासी सुनील कुमार सिंह ने धान की अच्छी खेती करते हैं। एक महीना पहले कसारा स्थित क्रय केंद्र पर पंजीकरण कराये थे। क्रय केंद्र पर खरीद नहीं हुई तो बिचौलिये के हाथ 1500 रुपये प्रति क्विंटल में धान बेच दिया।
मुहम्मदपुर बाबूपुर निवासी विवेक सिंह का कहना है कि 24 दिन पहले रजिस्ट्रेशन कराकर क्रय केंद्र पर धान बेचने की उम्मीद कर रहे थे। धान खरीद की धीमी प्रक्रिया से निराश होने पर धान बिचौलिये को बेच दिया।
जरूरत वाले केंद्रों पर रोजाना बोरे भेजवाए जा रहे हैं। लक्ष्य के सापेक्ष धान की खरीद की जाएगी। किसान घबराएं नहीं। किसानों के खातों में भुगतान भी आ रहा है। अभी तक 62 प्रतिशत किसानों को भुगतान किया जा चुका है।
- एके सिंहा, डिप्टी आरएमओ, मऊ।