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उत्पाद की कीमत तय करने का अधिकार हो किसान को : वीरेंद्र सिंह
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया
Updated Fri, 22 May 2015 11:53 PM IST
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स्वयंसेवी संस्था नेफोर्ड की ओर से शुक्रवार को नगर के ताजोपुर मोड़ के समीप नंद खरीफ किसान मेला का आयोजन किया गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि वीरेंद्र सिंह को उनकी किसान सेवा भावना तथा सहयोग के लिए कृषक मित्र सम्मान से सम्मानित किया। वहीं हरपुर गांव के किसान डा. रामाकांत सिंह को उत्कृष्ट कृषक सम्मान से सम्मानित किया गया। सम्मान जिले के उप निदेशक कृषि डा. आशुतोष मिश्र ने प्रदान किया। इस मौके पर नेफोर्ड द्वारा प्रकाशित नंद प्रसार ज्योति का बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में स्थाई व उन्नतिशील खेती विशेषांक का लोकार्पण किया गया।
किसान मेले को संबोधित करते हुए नेफोर्ड निदेशक डा. रामकठिन सिंह ने कहा कि किसानों को प्रतिकूल मौसम में अवरोधी प्रजातियों व तकनीकों को अपनाने की सलाह दी। आजादी के दशकों बीत जाने के बाद भी किसानों को समय से खाद, बीज, पानी नहीं मिल पाने पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि बीज उत्पादन व भंडारण गांव स्तर पर कराने की व्यवस्था करानी चाहिए।
उन्होंने सूक्ष्म सिंचाई विधियों जैसे ट्रिप और स्प्रीकलर विधि के प्रचार प्रसार की भी सलाह दी। इसके साथ ही विपणन व गांवों में कम से कम प्राइमरी प्रोसेसिंग व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने वर्तमान सरकार के कृषि नीतियों पर प्रकाश डाला। प्रमुख रूप से प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, स्वायल हेल्थ कार्ड योजना से लेकर कृषि उत्पादों की मार्केटिंग में मदद की भी चर्चा की।
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भूमि अधिग्रहण बिल पर चर्चा करते हुए कहा कि इसके जरिए सरकार की योजना ग्रामीण क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने की है। सांसद ने किसानों को देश का हनुमान बताते हुए कहा कि किसानों को अपने उत्पाद की कीमत तय करने का अधिकार होना चाहिए। उन्हाेंने आरगेनिक खेती में अनुदान दिए जाने के साथ ही सघन डेयरी कार्यक्रम चलाने पर भी बल दिया। इसी क्रम में उप निदेशक कृषि डा. आशुतोष मिश्र ने सरकार की ओर से चलाई जा रही परियोजनाओं की विस्तार से चर्चा किया।
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किसान मेले को संबोधित करते हुए नेफोर्ड निदेशक डा. रामकठिन सिंह ने कहा कि किसानों को प्रतिकूल मौसम में अवरोधी प्रजातियों व तकनीकों को अपनाने की सलाह दी। आजादी के दशकों बीत जाने के बाद भी किसानों को समय से खाद, बीज, पानी नहीं मिल पाने पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि बीज उत्पादन व भंडारण गांव स्तर पर कराने की व्यवस्था करानी चाहिए।
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उन्होंने सूक्ष्म सिंचाई विधियों जैसे ट्रिप और स्प्रीकलर विधि के प्रचार प्रसार की भी सलाह दी। इसके साथ ही विपणन व गांवों में कम से कम प्राइमरी प्रोसेसिंग व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने वर्तमान सरकार के कृषि नीतियों पर प्रकाश डाला। प्रमुख रूप से प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, स्वायल हेल्थ कार्ड योजना से लेकर कृषि उत्पादों की मार्केटिंग में मदद की भी चर्चा की।
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भूमि अधिग्रहण बिल पर चर्चा करते हुए कहा कि इसके जरिए सरकार की योजना ग्रामीण क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने की है। सांसद ने किसानों को देश का हनुमान बताते हुए कहा कि किसानों को अपने उत्पाद की कीमत तय करने का अधिकार होना चाहिए। उन्हाेंने आरगेनिक खेती में अनुदान दिए जाने के साथ ही सघन डेयरी कार्यक्रम चलाने पर भी बल दिया। इसी क्रम में उप निदेशक कृषि डा. आशुतोष मिश्र ने सरकार की ओर से चलाई जा रही परियोजनाओं की विस्तार से चर्चा किया।