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Mau News: भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों में आक्रोश, डीएम से की शिकायत
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कलेक्ट्रेट पर आवास विकास प्राधिकरण में मुआवजे के विवाद को लेकर जिलाधिकारी को ज्ञापन देते पहुंचे
उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद द्वारा प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को लेकर सदर तहसील क्षेत्र के कई गांवों के किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
मंगलवार को ब्लाक के डाड़ी, रेवरीडीह, शहरोज, मेघई और मुहम्मदपुर शहरोज के किसानों ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर अधिग्रहण प्रक्रिया में अनियमितताओं और उचित मुआवजा न दिए जाने का आरोप लगाया है।
पूर्व प्रधान योगेश राय, हिमांशु राय, अरविन्द, दीपक उपाध्याय, संतोष यादव, रामदरश, विरेन्द्र राय, भोला पाल, रामबलो राजभर, छोटे लाल गौंड, अजय खरवार, राम गोपाल शर्मा, रामकृत यादव, रामनियादी पाल, ललन यादव, सोहन राम आदि किसानों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम-2013 के प्रावधानों का समुचित पालन नहीं किया जा रहा है।
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किसानों ने आरोप लगाया कि अधिग्रहण से पूर्व किसानों की सहमति, सामाजिक प्रभाव आकलन (एसआईए) तथा सार्वजनिक सुनवाई की प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से नहीं कराई गई। साथ ही अधिसूचनाओं और संबंधित अभिलेखों की जानकारी भी सभी प्रभावित किसानों तक विधिवत नहीं पहुंचाई गई।
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी आपत्तियों और सुझावों को सुनने एवं उनका निस्तारण करने की वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। मुआवजे की दरों के संबंध में भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है, जिससे किसानों में असुरक्षा की भावना बनी हुई है।
किसानों ने मांग की कि अधिनियम के तहत सर्वोत्तम भू-प्रतिकर, पुनर्वास, विस्थापन, आजीविका प्रभावित होने तथा परिवार के भरण-पोषण से जुड़े सभी प्रतिकर लाभों को मूल मुआवजे में शामिल करते हुए नियमानुसार ब्याज सहित भुगतान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही इसकी प्रति प्रथम अपीलीय अधिकारी एवं जिलाधिकारी आर्बिट्रेशन को भी भेजी जाए।
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मंगलवार को ब्लाक के डाड़ी, रेवरीडीह, शहरोज, मेघई और मुहम्मदपुर शहरोज के किसानों ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर अधिग्रहण प्रक्रिया में अनियमितताओं और उचित मुआवजा न दिए जाने का आरोप लगाया है।
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पूर्व प्रधान योगेश राय, हिमांशु राय, अरविन्द, दीपक उपाध्याय, संतोष यादव, रामदरश, विरेन्द्र राय, भोला पाल, रामबलो राजभर, छोटे लाल गौंड, अजय खरवार, राम गोपाल शर्मा, रामकृत यादव, रामनियादी पाल, ललन यादव, सोहन राम आदि किसानों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम-2013 के प्रावधानों का समुचित पालन नहीं किया जा रहा है।
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किसानों ने आरोप लगाया कि अधिग्रहण से पूर्व किसानों की सहमति, सामाजिक प्रभाव आकलन (एसआईए) तथा सार्वजनिक सुनवाई की प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से नहीं कराई गई। साथ ही अधिसूचनाओं और संबंधित अभिलेखों की जानकारी भी सभी प्रभावित किसानों तक विधिवत नहीं पहुंचाई गई।
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी आपत्तियों और सुझावों को सुनने एवं उनका निस्तारण करने की वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। मुआवजे की दरों के संबंध में भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है, जिससे किसानों में असुरक्षा की भावना बनी हुई है।
किसानों ने मांग की कि अधिनियम के तहत सर्वोत्तम भू-प्रतिकर, पुनर्वास, विस्थापन, आजीविका प्रभावित होने तथा परिवार के भरण-पोषण से जुड़े सभी प्रतिकर लाभों को मूल मुआवजे में शामिल करते हुए नियमानुसार ब्याज सहित भुगतान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही इसकी प्रति प्रथम अपीलीय अधिकारी एवं जिलाधिकारी आर्बिट्रेशन को भी भेजी जाए।