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जांच दर जांच पर नतीजा सिफर
mau
Updated Tue, 11 Dec 2018 11:47 PM IST
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- फोटो : SELF
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समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित आंबेडकर विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्तियों में अनियमितताओं की जांच होती रह गई लेकिन न तो नियुक्तियों में अनियमितता करने वालों और न ही फर्जी डिग्री वाले अध्यापकों के ही खिलाफ कोई कार्रवाई हो सकी। ऐसे में यह हर माह अपनी तनख्वाह उठा रहे। इतना ही नहीं लगभग दस सालों के बकाया वेेतन दर्शाकर इन्हें करोड़ों रुपयों का एरियर भी दिया जा चुका है।
जिले में अनुदानित आंबेडकर स्कूलों की संख्या 59 है। दो साल पहले तक इन स्कूलों में अध्यापकों की संख्या 511 थी। पिछले साल जिले के 32 आंबेडकर स्कूलों में 76 अध्यापकों की नियुक्तियां कर दी गई। लेकिन इन नियुक्तियों में भारी अनियमितताएं की गईं। समाज कल्याण विभाग के ही एक अवकाश प्राप्त अधिकारी एसएन सिंह ने जिलाधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री तक से शिकायत की। इस प्रकरण की जांच सीडीओ की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच कर रही थी। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने अपने स्तर से जांच कराई तो पाया कि आधे से अधिक अध्यापकों की नियुक्तियों के अनुमोदन फर्जी हैं। उधर तीन सदस्यीय टीम की जांच में भी 35 ऐसे अध्यापक पाए गए जिनके बीएड और टीईटी के प्रमाण पत्र नेट पर शो नहीं कर रहे थे। संयुक्त निदेशक के निर्देश पर आई इस टीम ने केवल जांच का दिखावा किया था।
इस बीच नवनियुक्त अध्यापकों ने पिछले दस सालों के वेतन के बकाया का एरियर का लगभग दो करोड़ 35 लाख रुपयों का भुगतान भी करा लिया। सूत्र बताते हैं कि इन 76 अध्यापकों में समाज कल्याण निदेशालय में कार्यरत एक उच्च अधिकारी के रिश्तेदार और एक कर्मचारी तथा जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय के एक कर्मचारी का एक बेटा और एक बेटी की नियुक्ति भी शामिल हैं। सूत्र बताते हैं कि 31 दिसंबर 2018 को निदेशालय में कार्यरत एक उच्चाधिकारी सेवानिवृत्त होने वाले हैं। लोग उम्मीद जता रहे हैं कि अगले साल संभवत: प्रकरण की जांच गति पकड़े।
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जिले में अनुदानित आंबेडकर स्कूलों की संख्या 59 है। दो साल पहले तक इन स्कूलों में अध्यापकों की संख्या 511 थी। पिछले साल जिले के 32 आंबेडकर स्कूलों में 76 अध्यापकों की नियुक्तियां कर दी गई। लेकिन इन नियुक्तियों में भारी अनियमितताएं की गईं। समाज कल्याण विभाग के ही एक अवकाश प्राप्त अधिकारी एसएन सिंह ने जिलाधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री तक से शिकायत की। इस प्रकरण की जांच सीडीओ की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच कर रही थी। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने अपने स्तर से जांच कराई तो पाया कि आधे से अधिक अध्यापकों की नियुक्तियों के अनुमोदन फर्जी हैं। उधर तीन सदस्यीय टीम की जांच में भी 35 ऐसे अध्यापक पाए गए जिनके बीएड और टीईटी के प्रमाण पत्र नेट पर शो नहीं कर रहे थे। संयुक्त निदेशक के निर्देश पर आई इस टीम ने केवल जांच का दिखावा किया था।
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इस बीच नवनियुक्त अध्यापकों ने पिछले दस सालों के वेतन के बकाया का एरियर का लगभग दो करोड़ 35 लाख रुपयों का भुगतान भी करा लिया। सूत्र बताते हैं कि इन 76 अध्यापकों में समाज कल्याण निदेशालय में कार्यरत एक उच्च अधिकारी के रिश्तेदार और एक कर्मचारी तथा जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय के एक कर्मचारी का एक बेटा और एक बेटी की नियुक्ति भी शामिल हैं। सूत्र बताते हैं कि 31 दिसंबर 2018 को निदेशालय में कार्यरत एक उच्चाधिकारी सेवानिवृत्त होने वाले हैं। लोग उम्मीद जता रहे हैं कि अगले साल संभवत: प्रकरण की जांच गति पकड़े।
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