{"_id":"5dc858928ebc3e5b1b5dd4c8","slug":"fair-held-at-karahan-guradari-temple-tomorrow-mau-news-vns493686327","type":"story","status":"publish","title_hn":"करहां गुरादारी मंदिर पर मेले का आयोजन कल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
करहां गुरादारी मंदिर पर मेले का आयोजन कल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुहम्मदाबाद गोहना। कल गुरुपूर्णिमा पर्व के अवसर पर करहां के गुरादरी मठ स्थित बाबा घनश्याम दास की तपोस्थली पर लगने वाले मेले की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं।
गुरुपूर्णिमा पर जनपद के कोने कोने से पहुँचने वाले श्रद्धालु अपनी मन्नतें मांगते है और यहां के पवित्र सरोवर में स्नान कर शारीरिक विकारों से छुटकारा पाते हैं। गुरादरी मठ से जुड़े किवदंतियों और इसके महत्व के बारे में कहा जाता है कि लगभग 400 वर्ष पूर्व मुहम्मदाबाद गोहना तहसील मुख्यालय के दक्षिण दिशा में स्थित चकजाफरी गांव निवासी बाबा घनश्याम दास गांव के जंगल में अपनी गाय चराया करते थे। इस दौरान उनके गांव से उनकी माता दिन प्रतिदिन दोपहर का भोजन लेकर आती थी। एक दिन भोजन लाने के दौरान उनकी मो पानी लाना भूल गयी। खाने के बाद बाबा घनश्याम को पानी की कमी महसूस हुई तो मां ने कहा कि मैं गांव जाकर कुएं से तुम्हारे लिए पानी लेकर आती हूं। तपती दोपहरी में अपनी मां की परेशानी को देखते हुए बाबा घनश्याम ने कहा कि हे मां पास में ही पड़े इस पत्थर को हटा दें तो उसमें से पानी निकल जाए गा। बेटे के बार बार आग्रह करने पर मां ने वैसा ही किया तो वहां शुद्ध जल की धारा फूट पड़ी। अब यही धारा पोखरे के रूप में विद्यमान है। बाद में बाबा के शुभचिंतकों ने यहां पर एक आकर्षक पोखरे का निर्माण् कराया। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस पोखरे का जल आज तक भी कभी सूखा नहीं है। मान्यता है की पोखरे में स्नान करने से चर्म रोग समाप्त हो जाता है। इस कुटी के आठवें मठाधीश गुरु बाबा धुरंधर दास ने एक दशक पूर्व इस तालाब को भव्य रुप दिया। इस पोखरे में भारत के सात समुद्रों का जल डाला गया है। इस पवित्र पोखरे में लोग कार्तिक पूर्णिमा व रामनवमी पर लगने वाले भव्य मेले के दिन विशेष रूप से स्नान कर अपने को कृतार्थ करते हैं। साथ ही तालाब के किनारे बनी बाबा की मजार पर मत्था टेककर अपने व अपने परिवार की सलामती की मन्नतें मांगते है।
विज्ञापन
गुरुपूर्णिमा पर जनपद के कोने कोने से पहुँचने वाले श्रद्धालु अपनी मन्नतें मांगते है और यहां के पवित्र सरोवर में स्नान कर शारीरिक विकारों से छुटकारा पाते हैं। गुरादरी मठ से जुड़े किवदंतियों और इसके महत्व के बारे में कहा जाता है कि लगभग 400 वर्ष पूर्व मुहम्मदाबाद गोहना तहसील मुख्यालय के दक्षिण दिशा में स्थित चकजाफरी गांव निवासी बाबा घनश्याम दास गांव के जंगल में अपनी गाय चराया करते थे। इस दौरान उनके गांव से उनकी माता दिन प्रतिदिन दोपहर का भोजन लेकर आती थी। एक दिन भोजन लाने के दौरान उनकी मो पानी लाना भूल गयी। खाने के बाद बाबा घनश्याम को पानी की कमी महसूस हुई तो मां ने कहा कि मैं गांव जाकर कुएं से तुम्हारे लिए पानी लेकर आती हूं। तपती दोपहरी में अपनी मां की परेशानी को देखते हुए बाबा घनश्याम ने कहा कि हे मां पास में ही पड़े इस पत्थर को हटा दें तो उसमें से पानी निकल जाए गा। बेटे के बार बार आग्रह करने पर मां ने वैसा ही किया तो वहां शुद्ध जल की धारा फूट पड़ी। अब यही धारा पोखरे के रूप में विद्यमान है। बाद में बाबा के शुभचिंतकों ने यहां पर एक आकर्षक पोखरे का निर्माण् कराया। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस पोखरे का जल आज तक भी कभी सूखा नहीं है। मान्यता है की पोखरे में स्नान करने से चर्म रोग समाप्त हो जाता है। इस कुटी के आठवें मठाधीश गुरु बाबा धुरंधर दास ने एक दशक पूर्व इस तालाब को भव्य रुप दिया। इस पोखरे में भारत के सात समुद्रों का जल डाला गया है। इस पवित्र पोखरे में लोग कार्तिक पूर्णिमा व रामनवमी पर लगने वाले भव्य मेले के दिन विशेष रूप से स्नान कर अपने को कृतार्थ करते हैं। साथ ही तालाब के किनारे बनी बाबा की मजार पर मत्था टेककर अपने व अपने परिवार की सलामती की मन्नतें मांगते है।
विज्ञापन