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वसंत पंचमी से ही घर-घर शुरू हो जाते थे फाग गीत

Wed, 17 Mar 2021 12:10 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 17 Mar 2021 12:10 AM IST
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Fag songs used to start door-to-door from Vasant Panchami
मऊ। पहले वसंतपंचमी के साथ ही घर घर फाग गीत शुरू हो जाते थे। फाग गीत गाने वाली मंडली ढोलक झाल के साथ किसी सम्मानित व्यक्ति के दरवाजे पर पहुंच जाती थी और देर रात तक फाग गीत गाती थी। फाग गीत में धार्मिकता का पुट होता था। राधा कृष्ण और राम से जुडे़ होरी गीत गाए जाते थे। अब फूहड़ और द्विअर्थी बोल वाले गीत बजाए जा रहे हैं। ये कहना है रतनपुरा ब्लाक के बुजुर्गों का। उनका मानना है कि होली का स्वरूप बदल गया है।
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रतनपुरा ब्लाक क्षेत्र के करउत ग्राम पंचायत निवासी लालता यादव (75) ने बताया कि पहले गांव की महिलाएं किसी के भी ऊपर गोबर, रंग या मिट्टी फेंक देती थीं और कोई बुरा नहीं मानता था। होली के दिन लोग रंजिश भुलाकर सभी के घर मिलने जाते थे। रंग खेलते और अबीर लगाकर गले मिलते थे। हम लोगों के बचपन के समय बसंत पंचमी के दिन से ही गांव में होली के गीत दरवाजे-दरवाजे गाए जाते थे लेकिन अब ऐसा नहीं दिखता। अब किसी के ऊपर होली के दिन भी रंग पड़ जाए तो वह नाराज हो जाता है। तब की और अब की होली में बड़ा परिवर्तन देखने को मिल रहा है।
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मधुबन निवासी भुल्लन सिंह कहते हैं अब पहले जैसी होली नहीं खेली जाती है। पहले लोगों में इतनी कटुता वैमनस्यता नहीं थी। लोगों में प्रेम और भाई चारे का भाव था। बसंत पंचमी की शाम से होली गीत शुरु हो जाते थे। मुहल्लों में घूम घूम और लोगों के दरवाजों पर बैठकर वसंत ऋतु के आगमन से लेकर होली तक के गीत गाए जाते थे। कमरौली निवासी चंद्रिका यादव कहते हैं कि सबसे प्रसिद्ध और पावन गीत होरी खेलें रघुबीरा अवध में होरी खेलें रघुबीरा, केकरे हाथे कनक पिचकारी केकरे हाथे अबीरा अवध में होरी खेलें रघुबीरा गाया जाता था। गौरीडीह गांव निवासी बुद्धिराम चौहान बताते हैं कि वे भी युवावस्था में होली गीत गाते थे। कहा कि पहले गीतों में फुहड़ता नहीं अपितु स्वस्थ मनोरंजन होता था। लोक मर्यादा का ख्याल रखा जाता था लेकिन अब ऐसा नहीं है। परिस्थितियां बदल गई हैं।
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