{"_id":"5fdba6598ebc3e41a512c4cf","slug":"express-way-mau-news-vns564013266","type":"story","status":"publish","title_hn":"यदि पिपरीडीह में बनता लिंक मार्ग तो बदल जाती गांव के साथ क्षेत्र और जिले की सूरत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यदि पिपरीडीह में बनता लिंक मार्ग तो बदल जाती गांव के साथ क्षेत्र और जिले की सूरत
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मऊ। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे भले ही जिले की सीमा से 26 किमी की दूरी तय कर गुजरी हो, लेकिन जिले में लिंक न होने से यहां के वासियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा। ‘अमर उजाला’ में खबर प्रकाशित करने पर लोग इस मुहिम से जुड़ने लगे हैं। इस दौरान पिपरीडीह बाजार के लोगों ने निर्माणाधीन पूूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का लिंक जिले में खोलने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना था कि पिपरीडीह के ताजपुर गांव से होकर एक्सप्रेस-वे गुजर रहा है। ऐसे में चिरैयाकोट-मऊ मार्ग पर एक्सप्रेस-वे का लिंक बनाया जाए। इससे शहर के लोग भी जुड़ेंगे साथ ही क्षेत्र के साथ जिले का विकास होगा।
मऊ जिले की सीमा से पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे 26 किमी की दूरी तय कर रही, लेकिन जिले की सीमा में कहीं भी इस एक्सप्रेस-वे से चढ़ने या फिर उतरने की सुविधा प्रदान नहीं की गई है। यदि ऐसा होता तो जिले के व्यापारियों, किसानों से लेकर अन्य तरह का कारोबार करने वालों के साथ आम जनता और रोगियों को इसका लाभ मिलता। यही नहीं कम समय में लखनऊ या दिल्ली की यात्रा इस हाईवे से पूरी की जा सकती है। सीधा जुड़ाव होने पर माल से लेकर अन्य समानों की आवक भी आसानी से होती। जिले से गुजरे हिस्से को यूपीडा ने पैकेज नंबर सात का नाम दिया है, इसका मतलब आजमगढ़ के सठियांव और गाजीपुर के हैदरा में चढ़ने उतरने की व्यवस्था है। ऐसे में एक गेट से दूसरे गेट को पैकेज में डिवाइड किया गया है। इस तरह से मऊ जिले का हिस्सा भले की पैकेज सात में है, लेकिन यहां इसकी सुविधा नहीं है। बृहस्पतिवार को प्रदर्शन करने वाले ग्रामीणों में बिमलेश यादव ,राजकुमार चौहान, संतलाल चौहान, संजीव गुप्ता, विपिन यादव, चंद्रजीत यादव, अनिल प्रजापति, लव गुप्ता, प्रदीप मद्धेशिया, विनोद यादव ,गिरीश, छोटेलाल गुप्ता, संतोष आदि शामिल रहें, सभी ने शासन से मांग किया कि मऊ जनपदवासियों की सुविधा को देखते हुए पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर चढ़ने उतरने का लिंक मार्ग ताजपुर में बनाया जाए।
प्रतिक्रिया ग्रामीणों की
मुहम्मदाबाद गोहना तहसील क्षेत्र से पूर्वांचल एक्सप्रेस वे शुरु हो रहा, इस दौरान जिला मुख्यालय के इर्दगिर्द अवश्य लिंक मार्ग की व्यवस्था करनी चाहिए थी। ताकि जिले के लोग भी जरूरत पड़ने पर हाईवे की सुविधा का लाभ उठाते।- सुनील पांडेय, किसान और पिपरीडीह निवासी
विज्ञापन
--
जिले के मुहम्मदाबाद क्षेत्र से शुरु होकर पलिया, बस्ती इटौरा अहिलाद, ओन्हाईच, सुअराबोझ, मजखनी, खरगजेपुर, ताजपुर, उस्मानपुर आदि दर्जन भर से अधिक गांवों से होकर पूर्वांचल एक्सप्रेस गाजीपुर निकल रही है। ऐसे में क्या मऊ जिले के लोगों को एक्सप्रेस-वे पर चढ़ने और उतरने की सुविधा क्यों प्रदान नहीं की गई? क्या एक्सप्रेस वे को गुजारने के लिए यहां की जमीन का उपयोग किया गया। यदि ऐसा है तो पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे जनपद वासियों के लिए छलावा मात्र है।-अनिल यादव, सपा युवा नेता
--
यदि ताजपुर गांव के पास से ही पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर चढ़ने और उतरने की सुविधा प्रदान की जाती तो, पिपरीडीह बाजार के साथ साथ पूरे क्षेत्र का कायाकल्प होता। साथ ही जिले के लोगों को भी सहूलियत मिलती। क्योंकि यहां से थोड़ी ही दूरी पर बीज शोध संस्थान डीएसआर है, जिसका मुख्यालय लखनऊ और दिल्ली है। ऐसे में यहां वैज्ञानिकों के आने जाने की सुविधा मिलती। साथ ही पिपरीडीह और मऊ जिले की दूरी कम हो जाती।- श्रवण गुप्ता, किराना व्यापारी
--
हार्डवेयर का सामान बड़े महानगरों से आता है, लेकिन यूपीडा की चाल से मऊ जिले के लोगों को बनने के बाद भी पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की सुविधा अपने जिले से नहीं मिलेगी। ऐसे में यह पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे बनकर भी हम लोगों के उपयोग के लिए उतना हितकारी नहीं होगा, जितना होना चाहिए। बोले एक्सप्रेस वे की सुविधा पाने के लिए जिले के लोगों को गाजीपुर या फिर आजमगढ़ जाना होगा।-आनंद सिंह, हार्डवेयर कारोबारी
--
पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का वर्तमान स्वरुप मऊ जिले की जनता के लिए छलावा से कम नहीं है, यदि स्थानीय नेता और जिला प्रशासन चाहता तो जिलेवासियों को भी पूर्वांचल एक्सप्रेस वे की सुविधा सीधे अपने जिले से जरूर मुहैया होती। वर्तमान स्वरुप ऐसा हो गया है कि जितना समय पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से बचेगा, उससे ज्यादा समय हैदरा या फिर सठियाव आने जाने में लग जाएगा।-अमित सिंह, अधिवक्ता
--
पूर्वांचल एक्सप्रेस वे की इस सूरत की जानकारी अमर उजाला से हुई, ऐसे में जरूरत पड़ने पर इस सुविधा की बहाली के लिए हम लोग आंदोलन करेंगे। क्या फायदा कि जिले से होकर सड़क गुजरे, लेकिन यात्रा करने के लिए जिले के लोगों को गाजीपुर और आजमगढ़ जाना पड़े। इस सुविधा से अच्छा ये भी सुविधा न प्रदान की जाए।-श्रीकांत यादव, समाजसेवी
विज्ञापन
मऊ जिले की सीमा से पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे 26 किमी की दूरी तय कर रही, लेकिन जिले की सीमा में कहीं भी इस एक्सप्रेस-वे से चढ़ने या फिर उतरने की सुविधा प्रदान नहीं की गई है। यदि ऐसा होता तो जिले के व्यापारियों, किसानों से लेकर अन्य तरह का कारोबार करने वालों के साथ आम जनता और रोगियों को इसका लाभ मिलता। यही नहीं कम समय में लखनऊ या दिल्ली की यात्रा इस हाईवे से पूरी की जा सकती है। सीधा जुड़ाव होने पर माल से लेकर अन्य समानों की आवक भी आसानी से होती। जिले से गुजरे हिस्से को यूपीडा ने पैकेज नंबर सात का नाम दिया है, इसका मतलब आजमगढ़ के सठियांव और गाजीपुर के हैदरा में चढ़ने उतरने की व्यवस्था है। ऐसे में एक गेट से दूसरे गेट को पैकेज में डिवाइड किया गया है। इस तरह से मऊ जिले का हिस्सा भले की पैकेज सात में है, लेकिन यहां इसकी सुविधा नहीं है। बृहस्पतिवार को प्रदर्शन करने वाले ग्रामीणों में बिमलेश यादव ,राजकुमार चौहान, संतलाल चौहान, संजीव गुप्ता, विपिन यादव, चंद्रजीत यादव, अनिल प्रजापति, लव गुप्ता, प्रदीप मद्धेशिया, विनोद यादव ,गिरीश, छोटेलाल गुप्ता, संतोष आदि शामिल रहें, सभी ने शासन से मांग किया कि मऊ जनपदवासियों की सुविधा को देखते हुए पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर चढ़ने उतरने का लिंक मार्ग ताजपुर में बनाया जाए।
विज्ञापन
प्रतिक्रिया ग्रामीणों की
मुहम्मदाबाद गोहना तहसील क्षेत्र से पूर्वांचल एक्सप्रेस वे शुरु हो रहा, इस दौरान जिला मुख्यालय के इर्दगिर्द अवश्य लिंक मार्ग की व्यवस्था करनी चाहिए थी। ताकि जिले के लोग भी जरूरत पड़ने पर हाईवे की सुविधा का लाभ उठाते।- सुनील पांडेय, किसान और पिपरीडीह निवासी
विज्ञापन
--
जिले के मुहम्मदाबाद क्षेत्र से शुरु होकर पलिया, बस्ती इटौरा अहिलाद, ओन्हाईच, सुअराबोझ, मजखनी, खरगजेपुर, ताजपुर, उस्मानपुर आदि दर्जन भर से अधिक गांवों से होकर पूर्वांचल एक्सप्रेस गाजीपुर निकल रही है। ऐसे में क्या मऊ जिले के लोगों को एक्सप्रेस-वे पर चढ़ने और उतरने की सुविधा क्यों प्रदान नहीं की गई? क्या एक्सप्रेस वे को गुजारने के लिए यहां की जमीन का उपयोग किया गया। यदि ऐसा है तो पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे जनपद वासियों के लिए छलावा मात्र है।-अनिल यादव, सपा युवा नेता
--
यदि ताजपुर गांव के पास से ही पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर चढ़ने और उतरने की सुविधा प्रदान की जाती तो, पिपरीडीह बाजार के साथ साथ पूरे क्षेत्र का कायाकल्प होता। साथ ही जिले के लोगों को भी सहूलियत मिलती। क्योंकि यहां से थोड़ी ही दूरी पर बीज शोध संस्थान डीएसआर है, जिसका मुख्यालय लखनऊ और दिल्ली है। ऐसे में यहां वैज्ञानिकों के आने जाने की सुविधा मिलती। साथ ही पिपरीडीह और मऊ जिले की दूरी कम हो जाती।- श्रवण गुप्ता, किराना व्यापारी
--
हार्डवेयर का सामान बड़े महानगरों से आता है, लेकिन यूपीडा की चाल से मऊ जिले के लोगों को बनने के बाद भी पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की सुविधा अपने जिले से नहीं मिलेगी। ऐसे में यह पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे बनकर भी हम लोगों के उपयोग के लिए उतना हितकारी नहीं होगा, जितना होना चाहिए। बोले एक्सप्रेस वे की सुविधा पाने के लिए जिले के लोगों को गाजीपुर या फिर आजमगढ़ जाना होगा।-आनंद सिंह, हार्डवेयर कारोबारी
--
पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का वर्तमान स्वरुप मऊ जिले की जनता के लिए छलावा से कम नहीं है, यदि स्थानीय नेता और जिला प्रशासन चाहता तो जिलेवासियों को भी पूर्वांचल एक्सप्रेस वे की सुविधा सीधे अपने जिले से जरूर मुहैया होती। वर्तमान स्वरुप ऐसा हो गया है कि जितना समय पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से बचेगा, उससे ज्यादा समय हैदरा या फिर सठियाव आने जाने में लग जाएगा।-अमित सिंह, अधिवक्ता
--
पूर्वांचल एक्सप्रेस वे की इस सूरत की जानकारी अमर उजाला से हुई, ऐसे में जरूरत पड़ने पर इस सुविधा की बहाली के लिए हम लोग आंदोलन करेंगे। क्या फायदा कि जिले से होकर सड़क गुजरे, लेकिन यात्रा करने के लिए जिले के लोगों को गाजीपुर और आजमगढ़ जाना पड़े। इस सुविधा से अच्छा ये भी सुविधा न प्रदान की जाए।-श्रीकांत यादव, समाजसेवी