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मदरसों की होगी जांच
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Sun, 28 Aug 2016 11:38 PM IST
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अंबेडकरनगर के बीएन इंटर काॅलेज मूल्यांकन केंद्र पर यूपी बोर्ड परीक्षा की काॅपियों का मूल्यांकन करते परीक्षक।
- फोटो : अमर उजाला
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जनपद के सभी मदरसों की जमीनी हकीकत जांची जाएगी। इसके लिए चारों तहसीलों में एक एक जांच कमेटी का गठन किया जाएगा। इसके अध्यक्ष उपजिलाधिकारी होंगे। इसके अलावा चार सदस्य शामिल किए जाएंगे। समितियां अपने अपने तहसील क्षेत्र में स्थित सभी मदरसों में जाकर शासन द्वारा निर्देश 23 बिंदुओं की बारीकी से जांच करेंगीं।
समितियां देखेंगी कि मान्यता के प्रावधानों का अनुपालन ये मदरसे कर रहे हैं अथवा नहीं। इनके पास भूमि भवन, स्वयं अथवा किराए का है या नहीं। छात्र और अध्यापक संख्या कितनी हैं। इन जांच समितियों की स्थलीय निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी को अपनी आख्या दो महीनों के अंदर शासन को देनी है।
जनपद में कुल 290 मान्यता प्राप्त मदरसे संचालित हैं। इनमें से 38 मदरसे एडेड यानी अनुदानित हैं। इसके अलावा 252 मदरसे नान एडेड हैं। अनुदानित मरदसों को तो अध्यापकों और कर्मचारियों को वेतन से लेकर अन्य आर्थिक मदद सरकार देती है। लेकिन गैर अनुदानित मदरसों को भी राज्य सरकार और केंद्र सरकार अल्पसंख्यकों और अल्पसंख्यक संस्थानों के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं के तहत धनराशि भी मिलती रहती है।
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शासन को ऐसी कई गंभीर शिकायतें मिली हैं कि कई मदरसे मान्यता संबंधी प्रावधानों को पूरा किए बगैर सिर्फ कागजों पर चल रहे हैं और ऐसे मदरसे सरकारों द्वारा प्रदत्त भारी भरकम धनराशि हड़प रहे हैं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रमुख सचिव अल्पसंख्यक कल्याण एसपी सिंह ने 25 अगस्त को जिलाधिकारी को पत्र भेजकर जिले के सभी 290 मदरसों की जांच के निर्देश दिए हैं। मदरसों की जांच के लिए तहसीलवार जांच समितियां गठित करने के निर्देश हैं। जिलाधिकारी को ये रिपोर्ट देने के लिए दो माह का समय दिया गया है।
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समितियां देखेंगी कि मान्यता के प्रावधानों का अनुपालन ये मदरसे कर रहे हैं अथवा नहीं। इनके पास भूमि भवन, स्वयं अथवा किराए का है या नहीं। छात्र और अध्यापक संख्या कितनी हैं। इन जांच समितियों की स्थलीय निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी को अपनी आख्या दो महीनों के अंदर शासन को देनी है।
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जनपद में कुल 290 मान्यता प्राप्त मदरसे संचालित हैं। इनमें से 38 मदरसे एडेड यानी अनुदानित हैं। इसके अलावा 252 मदरसे नान एडेड हैं। अनुदानित मरदसों को तो अध्यापकों और कर्मचारियों को वेतन से लेकर अन्य आर्थिक मदद सरकार देती है। लेकिन गैर अनुदानित मदरसों को भी राज्य सरकार और केंद्र सरकार अल्पसंख्यकों और अल्पसंख्यक संस्थानों के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं के तहत धनराशि भी मिलती रहती है।
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शासन को ऐसी कई गंभीर शिकायतें मिली हैं कि कई मदरसे मान्यता संबंधी प्रावधानों को पूरा किए बगैर सिर्फ कागजों पर चल रहे हैं और ऐसे मदरसे सरकारों द्वारा प्रदत्त भारी भरकम धनराशि हड़प रहे हैं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रमुख सचिव अल्पसंख्यक कल्याण एसपी सिंह ने 25 अगस्त को जिलाधिकारी को पत्र भेजकर जिले के सभी 290 मदरसों की जांच के निर्देश दिए हैं। मदरसों की जांच के लिए तहसीलवार जांच समितियां गठित करने के निर्देश हैं। जिलाधिकारी को ये रिपोर्ट देने के लिए दो माह का समय दिया गया है।