फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mau News ›   Doctors face problems due to pressure during treatment, no one wants the case to get worse

Mau News: इलाज के समय दबाव से डाॅक्टरों को होती है दिक्कत, कोई नहीं चाहता केस बिगड़े

Tue, 01 Jul 2025 11:51 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 01 Jul 2025 11:51 PM IST
विज्ञापन
Doctors face problems due to pressure during treatment, no one wants the case to get worse
मऊ। तीन रूप में सरकारी डॉक्टरों को अपने अनुसार देखते हैं मरीज और उसके परिजन। इलाज के समय दबाव से डाॅक्टरों को होती है दिक्कत, कोई डाॅक्टर नहीं चाहता है कि अपने मरीज का केस बिगड़े। यह बातें मंगलवार को सीएमओ कार्यालय में अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में डॉक्टरों ने कहीं। एक घंटे तक चले कार्यक्रम में उपचार में डॉ. को आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों के साथ उन्हें किस तरह का बाहरी दबाव झेलना पड़ता है, उसको लेकर डॉक्टरों ने अपने विचार रखे।
विज्ञापन

मंगलवार को दोपहर दो बजे सीएमओ डॉ. राहुल सिंह की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सीएमओ ने कहा कि सरकारी डॉक्टरों को इलाज के दौरान सबसे ज्यादा दिक्कत बेवजह के दवाब से होती है। कई बार तो बिना समझे मरीज के परिजन डॉक्टरों से अभद्रता करते हैं। डॉक्टरोंकी सुरक्षा को लेकर एक्ट तो है लेकिन वो ज्यादा प्रभावी नहीं होने से अक्सर डॉक्टरों से अभद्रता होती है।
विज्ञापन

वहीं एसीएमओ और डॉ. आरएन सिंह ने कहा कि सरकारी डॉक्टरों को लेकर लोगों की सोच में बदलाव आया है। कोरोना काल में कई सरकारी डॉक्टरों ने सेवा सैकड़ों जान बचाई। इस दौरान कई डॉ. और स्वास्थ्यकर्मी इसके जद में आए और इसमें कुछ की मौत भी हो गई लेकिन इसके बाद भी सरकारी अस्पताल में इस विषम परिस्थितियों में डॉ. अपनी टीम के साथ लोगों की सेवा में जुटे रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

वहीं टड़ियाव अस्पताल के सीएमएस डॉ. दिनेश चंद्रा ने कहा कि डॉक्टरों को लोग अपने अनुसार तीन श्रेणी में बांटते हैं, इसमें कई लोग डॉक्टरों को धरती के भगवान मानते हैं। वहीं कुछ लोग सब ठीक होने के बाद डॉ. को आम इंसान मानते हुए इसे डॉ. का फर्ज करार देते हैं।

वहीं कई तो ऐसे है अगर मरीज के साथ कोई बात हो जाती है तो जिस डॉ. को वो कुछ देर पहले धरती का भगवान मानते है, वह उसे शैतान करार देते हैं।
इसी क्रम में डॉ. कंचन आजाद ने कहा कि डॉक्टरों को उनका मूल काम के अलावा कई सारी जिम्मेदारी दी जाती है। अतिरिक्त दबाव के चलते उन्हें बाहर रहने पर इससे मरीजों को भी दिक्कत होती है। वहीं डिप्टी सीएमओ और डॉ. वकील अली ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में कई बार मरीजों के साथ ऐसे लोग भी आ जाते हैं जो बेवजह डॉक्टरों से उलझ जाते हैं, इससे डॉक्टरों के साथ उस मरीज को भी दिक्कत होती है। बताया कि कोई भी डाक्टर नहीं चाहता है उससे किसी मरीज का केस बिगड़े। इसी तरह से एसीएमओ डॉ. एचएन मौर्य, डॉ. संजय गुप्ता, डॉ. यूके, डॉ. अभिषेक, डॉ. जावेद, डॉ. आकांक्षा सिंह, डॉ. रवि यादव, डॉ. मिथिलेश कुमार ने भी अपने विचार रखा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed