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इंटर की परीक्षा रद्द होने से छात्र-छात्राओं में मायूसी

Thu, 03 Jun 2021 11:33 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 03 Jun 2021 11:33 PM IST
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Disappointment among students due to cancellation of Inter exam
मऊ। यूपी बोर्ड ने हाईस्कूल के बाद इंटरमीडिएट की परीक्षा को भी रद्द करने का फरमान जारी किया है। कड़ी मेहनत से परीक्षा की तैयारी कर रहे मेधावी छात्र-छात्राओं को निराशा हुई। इस मुद्दे पर विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा प्रधानाचार्यों से बातचीत की गई तो सभी ने कोरोना काल की परिस्थितियों के अनुसार बोर्ड के निर्णय का स्वागत तो किया, लेकिन कई प्रधानाचार्यों ने भविष्य को ध्यान में रखते हुए देर से सही परीक्षा कराने की वकालत की। परीक्षा रद्द होने से छात्र भी मायूस नजर आए।
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जिले में यूपी बोर्ड से संबद्ध 517 माध्यमिक विद्यालय हैं। यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा में 42177 परीक्षार्थी पंजीकृत हैं। यूपी बोर्ड हाईस्कूल की परीक्षा निरस्त होने के बाद बृहस्पतिवार को इंटरमीडिएट परीक्षा को लेकर छात्रों, अभिभावकों तथा शिक्षकों में उहापोह की स्थिति थी। बोर्ड के निर्देश पर विकल्प के रूप में हाईस्कूल की तरह इंटरमीडिएट के छात्रों का प्री बोर्ड, छमाही परीक्षा सहित विभिन्न परीक्षाओं का अंक बोर्ड के वेबसाइट पर अपलोड कराया गया था। यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट की परीक्षा रद्द होने से मेधावी छात्र छात्राओं में मायूसी दिखी। कई विद्यालयों के शिक्षकों तथा प्रधानाचार्यों ने परीक्षा रद्द करने को विकल्प को सही नहीं माना। इस संबंध में जीवन राम इंटर कॉलेज के छात्र आनंद कुमार कहना था कि कड़ी मेहनत से परीक्षा की तैयारी कर रहा था। प्रतियोगी तथा कोर्स के लिए दोहरी तैयारी करनी पड़ रही थी। परीक्षा में शामिल होकर मेरिट लिस्ट में जगह बनाया होता, लेकिन परीक्षा रद्द होने से निराशा हाथ लगी। क्योंकि किस नियम के तहत कितना नंबर मिलेगा, तय नहीं है। देर से ही सही लेकिन परीक्षा कराई जानी चाहिए थी। इसी क्रम में बाबा विश्वनाथ इंटर कॉलेज के छात्र अमन वर्मा का कहना था कि परीक्षा की तैयारी बेहतर तरीके से हो रही थी। ऐन समय पर परीक्षा रद्द करने का फरमान सही नहीं है। परीक्षा के माध्यम से मूल्यांकन सही रहता है।
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तालीमुद्दीन इंटर कालेज के प्रधानाचार्य मुहम्मद मजहर का कहना था कि कोरोना संक्रमण काल में परीक्षार्थियों के स्वास्थ्य को लेकर लिया गया बोर्ड का निर्णय स्वागत योग्य कदम है। लेकिन छात्र-छात्राओं के भविष्य को लेकर परीक्षा के विकल्प पर विचार किया जाना चाहिए था। इसी क्रम में डीएवी इंटर कालेज के प्रधानाचार्य देवभाष्कर तिवारी का कहना था कि कोरोना काल की परिस्थिति को देखते हुए छात्र हित में बोर्ड का निर्णय सही कदम है।
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