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जिला अस्पताल के डाक्टर के इस्तीफा देने से बढ़ी दुश्वारी
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मऊ। कोरोना संक्रमण काल में मंगलवार को अस्पताल के फिजिशियन डाक्टर अनिल ने सीएमएस को अपना त्याग पत्र सौंप दिया। हालांकि सीएमएस डा. वृज कुमार का कहना है कि डाक्टर अनिल ने इस्तीफा दिया है। लेकिन अभी मेरे सामने उनका कागज नहीं आया है। ऐसे में यदि वो नौकरी नहीं करना चाहते तो कोई उनसे जबरी नौकरी नहीं करा सकता। हम उनके इस्तीफे को स्वीकार नहीं करेंगे बल्कि शासन को अग्रसारित करेंगे।
डा. अनिल के इस्तीफा देने से सदर अस्पताल में इमरजेंसी ड्युटी करने की समस्या उत्पन्न हो गई। बात करने पर डा. अनिल ने सिर्फ इतना ही कहा कि फिजिशियन होने के बाद भी उन्हे इमरजेंसी की ड्युटी करनी पड़ रही थी। जिला अस्पताल के डाक्टर और स्कीन रोग विशेषज्ञ एके रंजन ने बताया कि कहने को जिला अस्पताल में 17 डाक्टरों की तैनाती है। असल में सारी ड्युटी हम सीनियर डाक्टरों को करनी होती है। सूत्रों से पता चला कि जिला अस्पताल में चार संविदा डाक्टरों को लेकर कुल 17 डाक्टरों की तैनाती है। इसमें संविदा डाक्टर ना तो इमरजेंसी की ड्युटी कर सकते हैं, ना ही पोस्टमार्टम की। ऐसे में वो ओपीडी के बाद अपने घर जाते है। शेष बचे 13 डाक्टरों में एक महिला डाक्टर है, दूसरे सप्ताह में दो से तीन दिन के लिए मऊ में आकर बैठते है। शेष बचे 11 डाक्टरों में छह सीनियर लेबल के है। जिन्हे पोस्टमार्टम से लेकर इमरजेेंसी तक की ड्युटी करनी होती है। सारी समस्या का कारण इमरजेंसी प्रभारी डाक्टर का न होना है। इसके चलते उत्पन्न हुई, और डाक्टर अनिल ने त्यागपत्र दिया।
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डा. अनिल के इस्तीफा देने से सदर अस्पताल में इमरजेंसी ड्युटी करने की समस्या उत्पन्न हो गई। बात करने पर डा. अनिल ने सिर्फ इतना ही कहा कि फिजिशियन होने के बाद भी उन्हे इमरजेंसी की ड्युटी करनी पड़ रही थी। जिला अस्पताल के डाक्टर और स्कीन रोग विशेषज्ञ एके रंजन ने बताया कि कहने को जिला अस्पताल में 17 डाक्टरों की तैनाती है। असल में सारी ड्युटी हम सीनियर डाक्टरों को करनी होती है। सूत्रों से पता चला कि जिला अस्पताल में चार संविदा डाक्टरों को लेकर कुल 17 डाक्टरों की तैनाती है। इसमें संविदा डाक्टर ना तो इमरजेंसी की ड्युटी कर सकते हैं, ना ही पोस्टमार्टम की। ऐसे में वो ओपीडी के बाद अपने घर जाते है। शेष बचे 13 डाक्टरों में एक महिला डाक्टर है, दूसरे सप्ताह में दो से तीन दिन के लिए मऊ में आकर बैठते है। शेष बचे 11 डाक्टरों में छह सीनियर लेबल के है। जिन्हे पोस्टमार्टम से लेकर इमरजेेंसी तक की ड्युटी करनी होती है। सारी समस्या का कारण इमरजेंसी प्रभारी डाक्टर का न होना है। इसके चलते उत्पन्न हुई, और डाक्टर अनिल ने त्यागपत्र दिया।
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