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धनतेरस पर बाजार में जमकर व्यापार
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Tue, 10 Nov 2015 12:04 AM IST
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धनतेरस पर लोगों ने खूब जमकर खरीदारी की। दिन भर स्वर्णाभूषण, सोने-चांदी के सिक्के और बर्तनों की खरीदारी हुई। इस वर्ष धनतेरस पर सोने का मूल्य दशक का सबसे सस्ता रहा। देर शाम तक ग्राहक सराफा दूकानों पर आभूषण की खरीदारी करते रहे।
इस वर्ष धनतेरस पर 24 कैरेट के 10 ग्राम वजन के सोने की कीमत 27 हजार रुपये रही। जबकि एक तोला पुरानी चांदी का सिक्का 900 रुपये में बिका। सोने के आभूषण 24,500 रुपये प्रति दस ग्राम की दर से बिके।
सोने की यह कीमत पिछले तीन दिनों से स्थिर है। शहर के ख्यातिलब्ध सराफा विजय आर्य ने बताया कि इस वर्ष सोने की दर कम रहने से सोने के आभूषणों की बिक्री काफी अच्छी रही।
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हीरे के आभूषणों पर ब्रांडेड कंपनियों के द्वारा आकर्षक आफर दिए गए। उसका लाभ ग्राहकों ने उठाया। हीरों के आभूषणों की भी अच्छी बिक्री रही। सोने के आभूषणों पर मेकिंग चार्ज निशुल्क कर दिए जाने का लाभ भी ग्राहकों ने उठाया। शहर के सभी सराफा दुकानों पर सोमवार की देर तक खरीददारी करते लोगों को देखा गया।
बर्तनों की दूकानों पर सुबह से ही ग्राहकों की भारी भीड़ रही। देर शाम तक लोग खरीददारी करते रहे । बर्तन के दुकानदारों ने आगे टेंट लगाकर बर्जनों की विभिन्न बेरायटी सजा रखे थे।
ग्राहकों की भीड़ का आलम यह रहा कि दुकानदार अथवा उनके सेल्समैन बर्तनों के दाम नहीं बता पा रहे थे। अधिकांश लोगों ने पूजा के तांबे और पीतल के सामानों की खरीददारी की। बहुत सी गृहिणियों ने छठ पूजा में प्रयोग किए जाने वाले पीतल और तांबे के बर्तन खरीदे।
दीपावली पर मिठाइयाें की दूकानें सज गई हैं। लेकिन खपत और उत्पादन में कोई समन्वय न दिखने के बावजूद खोवा और छेना की भारी मात्रा में आपूर्ति मिठाइयों की शुद्घता पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं। भरोसेमंद सूत्र बताते हैं कि खोवा, छेना, पनीर और दही आदि सिंथेटिक पाउडर से बनाए जा रहे हैं।
शहर में सिंथेटिक पाउडरों की आपूर्ति भारी मात्र में हो रही है। अधिकांश दूकानदारों की दीपावली से दो हफ्ते पहले से ही खोवा खरीद कर रख लेते हैं, उसे हल्की आंच पर भूनकर उसे रख देते हैं क्योंकि दीपावली के सम खोवा महंगा हो जाता है। हालांकि खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने कई बाजारों में दूकानों पर छापे मारकर नमूने लिए और उसे जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजा है।
लगभग 60 किलो मिलावटी मिठाई भी अधिकारियों ने नष्ट कराया। इस बाबत डा. ओपी सिंह कहते हैं कि सिंथेटिक मिठाइयां मनुष्य को कई तरह से नुकसान पहुंचाती हैं। इसलिए उनसे यथा संभव बचना चाहिए। उनका कहना है कि छेने , खोवे और दूध से बनने वाली मिठाइयों की जगह बेसन अथवा धोई की मिठाइयों का सेवन करना चाहिए।
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इस वर्ष धनतेरस पर 24 कैरेट के 10 ग्राम वजन के सोने की कीमत 27 हजार रुपये रही। जबकि एक तोला पुरानी चांदी का सिक्का 900 रुपये में बिका। सोने के आभूषण 24,500 रुपये प्रति दस ग्राम की दर से बिके।
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सोने की यह कीमत पिछले तीन दिनों से स्थिर है। शहर के ख्यातिलब्ध सराफा विजय आर्य ने बताया कि इस वर्ष सोने की दर कम रहने से सोने के आभूषणों की बिक्री काफी अच्छी रही।
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हीरे के आभूषणों पर ब्रांडेड कंपनियों के द्वारा आकर्षक आफर दिए गए। उसका लाभ ग्राहकों ने उठाया। हीरों के आभूषणों की भी अच्छी बिक्री रही। सोने के आभूषणों पर मेकिंग चार्ज निशुल्क कर दिए जाने का लाभ भी ग्राहकों ने उठाया। शहर के सभी सराफा दुकानों पर सोमवार की देर तक खरीददारी करते लोगों को देखा गया।
बर्तनों की दूकानों पर सुबह से ही ग्राहकों की भारी भीड़ रही। देर शाम तक लोग खरीददारी करते रहे । बर्तन के दुकानदारों ने आगे टेंट लगाकर बर्जनों की विभिन्न बेरायटी सजा रखे थे।
ग्राहकों की भीड़ का आलम यह रहा कि दुकानदार अथवा उनके सेल्समैन बर्तनों के दाम नहीं बता पा रहे थे। अधिकांश लोगों ने पूजा के तांबे और पीतल के सामानों की खरीददारी की। बहुत सी गृहिणियों ने छठ पूजा में प्रयोग किए जाने वाले पीतल और तांबे के बर्तन खरीदे।
दीपावली पर मिठाइयाें की दूकानें सज गई हैं। लेकिन खपत और उत्पादन में कोई समन्वय न दिखने के बावजूद खोवा और छेना की भारी मात्रा में आपूर्ति मिठाइयों की शुद्घता पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं। भरोसेमंद सूत्र बताते हैं कि खोवा, छेना, पनीर और दही आदि सिंथेटिक पाउडर से बनाए जा रहे हैं।
शहर में सिंथेटिक पाउडरों की आपूर्ति भारी मात्र में हो रही है। अधिकांश दूकानदारों की दीपावली से दो हफ्ते पहले से ही खोवा खरीद कर रख लेते हैं, उसे हल्की आंच पर भूनकर उसे रख देते हैं क्योंकि दीपावली के सम खोवा महंगा हो जाता है। हालांकि खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने कई बाजारों में दूकानों पर छापे मारकर नमूने लिए और उसे जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजा है।
लगभग 60 किलो मिलावटी मिठाई भी अधिकारियों ने नष्ट कराया। इस बाबत डा. ओपी सिंह कहते हैं कि सिंथेटिक मिठाइयां मनुष्य को कई तरह से नुकसान पहुंचाती हैं। इसलिए उनसे यथा संभव बचना चाहिए। उनका कहना है कि छेने , खोवे और दूध से बनने वाली मिठाइयों की जगह बेसन अथवा धोई की मिठाइयों का सेवन करना चाहिए।