{"_id":"6771926e7d2abe699c0d32bd","slug":"despite-the-ban-heavy-vehicles-are-passing-through-the-dilapidated-bridge-of-saryu-mau-news-c-295-1-mau1002-122253-2024-12-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mau News: प्रतिबंध के बाद भी सरयू के जर्जर पुल से गुजर रहे भारी वाहन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mau News: प्रतिबंध के बाद भी सरयू के जर्जर पुल से गुजर रहे भारी वाहन
विज्ञापन
दोहरीघाट। जर्जर हो चुके दोहरीघाट-बड़हलगंज पुल पर लोक निर्माण विभाग की ओर से भारी वाहनों के आवागमन पर रोक के बाद भी ट्रक और बसों का आवागमन जारी है। प्रतिबंध बेअसर है। भारी वाहन दिन रात पुल से होकर थाने के सामने से गुजरते हैं। लोक निर्माण विभाग ने दोनों तरफ चेतावनी बोर्ड लगाकर पुल को जर्जर घोषित कर दिया है। पुलिस ने दोनों तरफ बैरिकेडिंग लगाई थी, जो केवल 10 दिन तक ही रही। दोबारा भारी वाहनों के प्रवेश से दोहरीघाट कस्बे में फिर से जाम की समस्या शुरू हो गई है। यदि जल्द ही वाहनों पर रोक नहीं लगाई गई तो हादसा हो सकता है।
मऊ और गोरखपुर की सीमा पर सरयू नदी के ऊपर वर्ष 1972 में पुल का निर्माण हुआ, उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किया था। पुल से दोनों जनपद जुड़े और आसपास के क्षेत्रों का विकास हुआ। समय के साथ अब पुल जर्जर हो चुका है। एक दिसंबर को लोक निर्माण विभाग ने अपनी जांच के बाद पुल को जर्जर बता दिया। इसके बाद भारी वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध का चेतावनी बोर्ड लगा। साथ ही पुल के दोनों तरफ मऊ और गोरखपुर की सीमा पर लोहे के मजबूत खंभों के ऊपर 10 फीट ऊंची बैरिकेडिंग लगाई गई। इससे केवल छोटे वाहनों का आवागमन होता रहे। लेकिन लगाने के 10 दिन बाद ही किसी बड़े वाहन ने पुल से घुसते ही बैरेकेडिंग तोड़ दी, जिसके बाद से अब लगातार भारी वाहन वहां से गुजरते हैं। जल्द ही इसपर रोक नहीं लगाई गई तो हादसा हो सकता है, जिसमें सैकड़ों लोग घायल हो सकते हैं। लेकिन दोनों जनपदों के जिम्मेदार इसको लेकर किसी तरह का इंतजाम नहीं कर रहे हैं। गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन बाईपास होने के बावजूद दूरी कम होने समय बचाने के चक्कर में वाहन चालक अपने साथ दूसरों की जान जोखिम में डाल रहे हैं।
-- -- -- -- -- -- -
कोट -
बैरिकेडिंग टूटने की घटना से लोक निर्माण विभाग को अवगत करा दिया गया है। पुलिस द्वारा बैरिकेट लगाकर भारी वाहनों को रोका जाता है।
- प्रमेंद्र सिंह, थाना प्रभारी निरीक्षक, दोहरीघाट
विज्ञापन
मऊ और गोरखपुर की सीमा पर सरयू नदी के ऊपर वर्ष 1972 में पुल का निर्माण हुआ, उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किया था। पुल से दोनों जनपद जुड़े और आसपास के क्षेत्रों का विकास हुआ। समय के साथ अब पुल जर्जर हो चुका है। एक दिसंबर को लोक निर्माण विभाग ने अपनी जांच के बाद पुल को जर्जर बता दिया। इसके बाद भारी वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध का चेतावनी बोर्ड लगा। साथ ही पुल के दोनों तरफ मऊ और गोरखपुर की सीमा पर लोहे के मजबूत खंभों के ऊपर 10 फीट ऊंची बैरिकेडिंग लगाई गई। इससे केवल छोटे वाहनों का आवागमन होता रहे। लेकिन लगाने के 10 दिन बाद ही किसी बड़े वाहन ने पुल से घुसते ही बैरेकेडिंग तोड़ दी, जिसके बाद से अब लगातार भारी वाहन वहां से गुजरते हैं। जल्द ही इसपर रोक नहीं लगाई गई तो हादसा हो सकता है, जिसमें सैकड़ों लोग घायल हो सकते हैं। लेकिन दोनों जनपदों के जिम्मेदार इसको लेकर किसी तरह का इंतजाम नहीं कर रहे हैं। गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन बाईपास होने के बावजूद दूरी कम होने समय बचाने के चक्कर में वाहन चालक अपने साथ दूसरों की जान जोखिम में डाल रहे हैं।
विज्ञापन
कोट -
बैरिकेडिंग टूटने की घटना से लोक निर्माण विभाग को अवगत करा दिया गया है। पुलिस द्वारा बैरिकेट लगाकर भारी वाहनों को रोका जाता है।
- प्रमेंद्र सिंह, थाना प्रभारी निरीक्षक, दोहरीघाट