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Mau News: इंदारा-दोहरीघाट रेल मार्ग पर और ट्रेनों के संचालन की मांग
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इंदारा-दोहरीघाट रेल मार्ग पर एक वर्ष से एकमात्र ट्रेन का संचालन हो रहा है। ट्रेन का समय दोपहर का होने के चलते व्यापारियों और जिला मुख्यालय पर कार्य करने वालों को इसका कोई फायदा नहीं मिल रहा है। इसके चलते लोगों को निजी सवारी वाहनाें का सहारा लेना पड़ता है। अब सुबह और शाम में इस मार्ग पर ट्रेन संचालन की मांग उठने लगी है। व्यापारियों ने रेल मंत्री को पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।
इंदारा दोहरीघाट तक छोटी लाइन को बड़ी लाइन में बदलने के लिए आमान परिवर्तन की स्वीकृति मिली। 35 किलोमीटर लंबी रेल लाइन के लिए 165 करोड़ रुपये बजट में स्वीकृत हुए। लोगो को उम्मीद और ज्यादा पुख्ता हो गई, जब 20 अक्तूबर 2016 को तत्कालीन रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने इंदारा जंक्शन पर आमान परिवर्तन की आधारशिला रखी थी। तभी से इस रेलमार्ग पर चलने वाली रेल बस को बंद कर दिया गया था ।
इसके बाद वर्ष 2019 में इंदारा दोहरीघाट आमान परिवर्तन को पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन कुछ अड़चनों के चलते कार्य पूरा नहीं हुआ। कार्य पूर्ण करने के समय सीमा से चार वर्ष अधिक समय में किसी तरह रेलवे लाइन का कार्य पूरा हुआ। इसके बाद रेलवे के अधिकारियों की मौजूदगी में रेलवे ट्रैक के सफल निरीक्षण के बाद इस मार्ग पर 17 दिसंबर को ट्रेन का संचालन प्रारंभ हो गया।
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इस मार्ग पर एक मात्र ट्रेन जो दोहरीघाट से चलकर प्रयागराज तक जाती है, उसका समय दोपहर बाद होने के कारण दोहरीघाट, बड़हलगंज, अमिला, घोसी सहित विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिदिन जिला मुख्यालय आकर काम करने वालों को इसका कोई फायदा नहीं मिल रहा है। इससे व्यापारियों को भी कोई फायदा नहीं मिलता। इस संबंध में क्षेत्र के जितेंद्र गोयल का कहना है कि व्यापारियों, सर्विसमैन और बुनकरों के लिए सुबह और शाम ट्रेन की सुविधा प्रारंभ की जाए।
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इंदारा दोहरीघाट तक छोटी लाइन को बड़ी लाइन में बदलने के लिए आमान परिवर्तन की स्वीकृति मिली। 35 किलोमीटर लंबी रेल लाइन के लिए 165 करोड़ रुपये बजट में स्वीकृत हुए। लोगो को उम्मीद और ज्यादा पुख्ता हो गई, जब 20 अक्तूबर 2016 को तत्कालीन रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने इंदारा जंक्शन पर आमान परिवर्तन की आधारशिला रखी थी। तभी से इस रेलमार्ग पर चलने वाली रेल बस को बंद कर दिया गया था ।
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इसके बाद वर्ष 2019 में इंदारा दोहरीघाट आमान परिवर्तन को पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन कुछ अड़चनों के चलते कार्य पूरा नहीं हुआ। कार्य पूर्ण करने के समय सीमा से चार वर्ष अधिक समय में किसी तरह रेलवे लाइन का कार्य पूरा हुआ। इसके बाद रेलवे के अधिकारियों की मौजूदगी में रेलवे ट्रैक के सफल निरीक्षण के बाद इस मार्ग पर 17 दिसंबर को ट्रेन का संचालन प्रारंभ हो गया।
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इस मार्ग पर एक मात्र ट्रेन जो दोहरीघाट से चलकर प्रयागराज तक जाती है, उसका समय दोपहर बाद होने के कारण दोहरीघाट, बड़हलगंज, अमिला, घोसी सहित विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिदिन जिला मुख्यालय आकर काम करने वालों को इसका कोई फायदा नहीं मिल रहा है। इससे व्यापारियों को भी कोई फायदा नहीं मिलता। इस संबंध में क्षेत्र के जितेंद्र गोयल का कहना है कि व्यापारियों, सर्विसमैन और बुनकरों के लिए सुबह और शाम ट्रेन की सुविधा प्रारंभ की जाए।