UP Politics: घोसी लोकसभा क्षेत्र से चुनावी ताल ठोंक सकते हैं दारा सिंह चौहान, इस्तीफे के बाद घर वापसी की चर्चा
दारा सिंह चौहान राजनीति के मझे खिलाड़ी हैं। वह एक बार लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं। दो बार राज्यसभा सदस्य रहे, फिर दोबारा विधायक बने हैं। बसपा की राजनीति के दौरान संसदीय दल के नेता भी रह चुके हैं।
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पहले मधुवन, फिर घोसी से विधानसभा का चुनाव जीतने वाले दारा सिंह चौहान फिर भाजपा का दामन थाम सकते हैं। इसकी चर्चा राजनीतिक हल्के में भी है। सब कुछ ठीक रहा तो दारा सिंह चौहान भाजपा के टिकट पर मऊ की घोसी लोकसभा सीट से चुनावी ताल ठोंक सकते हैं। वह बसपा के टिकट पर 2009 का लोकसभा चुनाव घोसी से ही जीते थे।
दारा सिंह चौहान राजनीति के मझे खिलाड़ी हैं। वह एक बार लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं। दो बार राज्यसभा सदस्य रहे, फिर दोबारा विधायक बने हैं। बसपा की राजनीति के दौरान संसदीय दल के नेता भी रह चुके हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले दारा ने भाजपा से बगावत की और सपा ज्वाइन कर लिया।
घोसी विधानसभा क्षेत्र से सपा के टिकट पर चुनाव लड़े और जीतकर लखनऊ पहुंच गए। दारा ने भाजपा प्रत्याशी विजय राजभर को 22 हजार से ज्यादा मतों के अंतर से चुनाव हराया था। अब इस्तीफा दे दिया है। चर्चा है कि दारा घर वापसी करेंगे। इस सिलसिले में पार्टी आलाकमान से बात भी हो गई है।
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मौका देखकर बदलते रहे हैं पाला
दारा सिंह चौहान मौका देखकर पाला बदलते रहे हैं। एक भाजपा नेता ने बताया कि 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें लगा कि प्रदेश में सपा की सरकार बन रही है, इसलिए वन मंत्री का पद छोड़ दिया। इस्तीफा देकर सपा में चले गए। अब पता चला कि सपा की सरकार नहीं बनेगी। भाजपा की राजनीति लंबी चलेगी, इसलिए इस्तीफा देकर भाजपा में आना चाहते हैं। केंद्र की राजनीति करना चाहते हैं।
बसपा से की राजनीति की शुरूआत
दारा सिंह चौहान मूलरूप से आजमगढ़ के रहने वाले हैं। शुरूआती राजनीति बसपा से की और लंबी पारी खेली। बसपा ने पहली बार 1996 में उन्हें राज्यसभा भेजा। 2000 में दोबारा राज्यसभा का प्रतिनिधित्व दिया। 2009 में घोसी लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ाया और जीतकर वह नई दिल्ली पहुंच गए। 2014 के चुनाव में दोबारा बसपा के टिकट से चुनाव मैदान में उतरे, लेकिन हार का सामना करना पड़ा।
वर्ष 2015 में वह भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने उन्हें पिछड़ा वर्ग मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया। 2017 के चुनाव में मऊ की मधुबन विधानसभा सीट से टिकट दिया, जहां से 30 हजार से अधिक वोटों से जीत कर वह प्रदेश सरकार में मंत्री बने।