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करवाचौथः पूर्व संध्या पर बाजार में भीड़
ब्यूरो, अमर उजाला/ मऊ
Updated Tue, 18 Oct 2016 11:48 PM IST
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करवाचौथः पूर्व संध्या पर बाजार में भीड़
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पति के लंबी उम्र की कामना लिए 19 अक्तूबर को महिलाएं निर्जला व्रत रखेंगी। सुहाग के जोड़े में सजी महिलाएं मंदिरों में भगवान शंकर, मां पार्वती और गणेश का पूजन-अर्चन करेंगी। साथ ही चंद्रमा का दर्शन कर व्रत तोड़ेंगी। चंद्रदर्शन के साथ ही पति का दर्शन कर पूजन-अर्चन करेंगी। पति के मंगलमय जीवन के लिए महिलाएं मंगलवार को व्रत की तैयारियों में जुटी रहीं।
करवाचौथ का व्रत करने के लिए महिलाओं में उत्साह है। कथा के अनुसार एक राजकुमारी ने अपने मायके में इसी दिन उपवास किया था। उपवास पूर्ण होने पर उसे पता चला कि उसके मांग का सिंदूर उजड़ गया है। उसके पति की मौत सर्पदंश से हो गई थी। रोती बिलखती राजकुमारी ससुराल के लिए रवाना हुई। इस बीच रास्ते से गुजर रहे भगवान शंकर और मां पार्वती ने उसे बिलखता देख अपने पास बुलाकर रोने का कारण पूछा। विधवा ने आपबीती सुनाई।
उसके पति प्रेम को देखकर भाव विह्वल हुई मां पार्वती ने अपनी अंगुली को चीरकर रक्त दिया। देवी मां के कहने पर उस रक्त को अपनी मृत पति के ऊपर छिड़क दिया। इससे उसका पति जीवित हो उठा। इसी मान्यता के तहत विवाहित महिलाएं बुधवार को विधि विधान से व्रत रहेंगी। महिलाएं मिट्टी से बने करवे को चावलों के रंग बिरंगे लेप से सजाती हैं। ज्यादातर महिलाएं सूर्य, चंद्रमा और करवे का जमीन पर चित्र भी बनाती हैं। रात्रि में चंद्रमा का दर्शन महिलाएं चलनी में दीपक रखकर कर अर्ध्य देती हैं। चलनी ही अपने पति का दर्शन भी करती हैं। जिन महिलाओं के पति घर पर नहीं होते हैं उनका फोटो देखकर ही उपवास तोड़ती हैं। महिलाओं को विश्वास है कि करवाचौथ के दिन व्रत रखने से उनके अखंड सौभाग्य की कामना पूर्ण होती है।
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करवाचौथ का व्रत करने के लिए महिलाओं में उत्साह है। कथा के अनुसार एक राजकुमारी ने अपने मायके में इसी दिन उपवास किया था। उपवास पूर्ण होने पर उसे पता चला कि उसके मांग का सिंदूर उजड़ गया है। उसके पति की मौत सर्पदंश से हो गई थी। रोती बिलखती राजकुमारी ससुराल के लिए रवाना हुई। इस बीच रास्ते से गुजर रहे भगवान शंकर और मां पार्वती ने उसे बिलखता देख अपने पास बुलाकर रोने का कारण पूछा। विधवा ने आपबीती सुनाई।
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उसके पति प्रेम को देखकर भाव विह्वल हुई मां पार्वती ने अपनी अंगुली को चीरकर रक्त दिया। देवी मां के कहने पर उस रक्त को अपनी मृत पति के ऊपर छिड़क दिया। इससे उसका पति जीवित हो उठा। इसी मान्यता के तहत विवाहित महिलाएं बुधवार को विधि विधान से व्रत रहेंगी। महिलाएं मिट्टी से बने करवे को चावलों के रंग बिरंगे लेप से सजाती हैं। ज्यादातर महिलाएं सूर्य, चंद्रमा और करवे का जमीन पर चित्र भी बनाती हैं। रात्रि में चंद्रमा का दर्शन महिलाएं चलनी में दीपक रखकर कर अर्ध्य देती हैं। चलनी ही अपने पति का दर्शन भी करती हैं। जिन महिलाओं के पति घर पर नहीं होते हैं उनका फोटो देखकर ही उपवास तोड़ती हैं। महिलाओं को विश्वास है कि करवाचौथ के दिन व्रत रखने से उनके अखंड सौभाग्य की कामना पूर्ण होती है।
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