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मऊ। अपर जिलाधिकारी एवं जिला स्टांप अधिकारी डीपी पाल ने एक मामले की सुनवाई के बाद व्यवसायिक प्लाट का बैनामा के मामले में 37 लाख 92 हजार 90 रुपये के स्टांप की कमी पाई। इसके बाद उन्होंने डुमराव गांव निवासी राम अवध सिंह को कम स्टांप का दोषी पाते हुए 37 लाख 92 हजार 90 रुपया स्टांप शुल्क के साथ ही 45 हजार रुपया अर्थदंड निर्धारित किया तथा कुल 38 लाख 37 हजार 90 रुपया की वसूली का आदेश जारी किया। इसके साथ इस रकम पर 1.5 प्रतिशत प्रति माह के साधारण ब्याज भी वसूली दर से वसूले जाने का आदेश दिया है। मामले के अनुसार बहरीपुर गांव निवासी संतोष कुमार सिंह की ओर से एक प्रार्थना पत्र इस आशय का दिया गया कि डुमराव गांव निवासी राम अवध सिंह पुत्र बनवारी सिंह ने एक व्यवसायिक प्लाट बहरीपुर मौजा में खरीदा है, जिसमें लाखों रुपये के स्टांप की चोरी की गई है। इस शिकायत पर जांच हुई, उप निबंधक ने जांच कर आख्या प्रेषित किया कि भूखंड के आसपास औद्योगिक गतिविधियां विद्यमान हैं। मूल्यांकन सूची के अनुसार अपेक्षित स्टांप ड्यूटी अदा नहीं की गई है। शिकायत और उप निबंधक की आख्या के बाद अपर जिलाधिकारी ने स्टांप अधिनियम की धारा 47 ए के तहत विपक्षी डुमरांव गांव निवासी रामअवध सिंह को नोटिस जारी करते हुए 37 लाख 92 हजार 90 रुपये की स्टांप की कमी होने का नोटिस जारी किया। दोनों पक्षों को सुनवाई के बाद एडीएम ने आदेश जारी करते हुए कहा कि विपक्षी द्वारा जानबूझकर तथ्य छुपा कर कम मूल्य के स्टांप लगाकर बैनामा पंजीकृत कराया। असत्य कथनों पर आधारित बयान हल्फी दी गई। जबकि बिक्रीत भूमि राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है और पेट्रोल पंप तथा इंडस्ट्रियल क्षेत्र में स्थित है, जहां आसपास व्यवसाय एवं औद्योगिक गतिविधियां विद्यमान हैं। इस प्रकार विक्रेता द्वारा जानबूझकर बिक्रित आराजी से संबंधित वास्तविक तथ्य छुपाया गया है। एडीएम ने उप निबंधक के शपथ पत्र को सही मानते हुए निर्माणाधीन भवन की मालियत और स्टांप शुल्क का आकलन को सही मानते हुए विपक्षी रामअवध सिंह को आदेश दिया कि वह 37 लाख 92 हजार 90 रुपए के स्टांप शुल्क के साथ ही 45 हजार रुपया अर्थदंड आरोपित किया। साथ ही कुल 38 लाख 37 लाख 90 रुपया 1.5 प्रतिशत प्रतिमाह के साधारण ब्याज की दर से वसूले जाने का आदेश दिया।
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