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कमाऊ बेटे के गम में पथरा गई आंखें
Updated Thu, 17 May 2018 12:05 AM IST
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वाराणसी में मंगलवार को फ्लाइओवर हादसे में हुई एनडीआरएफ के जवान की मौत के गम में उसके बूढ़े माता-पिता की आखें गम से पथरा गई हैं। घोसी कोतवाली के बरुहा गांव निवासी जवान राम मिलन चौहान परिवार का अकेला कमाऊ था। सेना में भर्ती होने पर बूढे माता पिता को बेहतर जीवन की आस जगी, लेकिन हादसा उनके सपनों को लील गया। राम मिलन की मौत से पूरा गांव स्तब्ध था।
राममिलन चौहान 15 मई को अपने साथियों के साथ मिनी बस से कैंट की तरफ आ रहा था, तभी फ्लाई ओवर की बीम गिरने से हादसे में उसकी मौत हो गई। पास में मिले आधार कार्ड से उसकी पहचान हुई। अमर उजाला के माध्यम से ग्राम प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष विवेकानंद यादव से सूचना मिलने पर मंगलवार की रात 11 बजे उसके पिता हरिनाथ वाराणसी गए थे। अपने दो भाइयों में राममिलन सबसे बड़ा होने के साथ नौकरी करने वाला परिवार का एकमात्र सदस्य था। छोटा भाई रामाश्रय चौहान बीए अंतिम वर्ष का छात्र है। दो बहनों संगीत व रीना की शादी हो गई है। पड़ोस के रामजतन चौहान, गंगा चौहान, नागेंद्र चौहान, अरविंद चौहान आदि शोकाकुल परजिनों को संभालने में लगे थे। पिता ने बिलखते हुए बताया कि अभी उन्हे अपने बेटे की शादी करनी थी, इसके बाद उसके हंसते खेलते घर को बसते हुए देखना था। लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। बूढे पिता और परिवार के सदस्यों के साथ गांव के लोग भी राम मिलने के शव के गांव पहुंचने का इंतजार कर रहे थे।
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राममिलन चौहान 15 मई को अपने साथियों के साथ मिनी बस से कैंट की तरफ आ रहा था, तभी फ्लाई ओवर की बीम गिरने से हादसे में उसकी मौत हो गई। पास में मिले आधार कार्ड से उसकी पहचान हुई। अमर उजाला के माध्यम से ग्राम प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष विवेकानंद यादव से सूचना मिलने पर मंगलवार की रात 11 बजे उसके पिता हरिनाथ वाराणसी गए थे। अपने दो भाइयों में राममिलन सबसे बड़ा होने के साथ नौकरी करने वाला परिवार का एकमात्र सदस्य था। छोटा भाई रामाश्रय चौहान बीए अंतिम वर्ष का छात्र है। दो बहनों संगीत व रीना की शादी हो गई है। पड़ोस के रामजतन चौहान, गंगा चौहान, नागेंद्र चौहान, अरविंद चौहान आदि शोकाकुल परजिनों को संभालने में लगे थे। पिता ने बिलखते हुए बताया कि अभी उन्हे अपने बेटे की शादी करनी थी, इसके बाद उसके हंसते खेलते घर को बसते हुए देखना था। लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। बूढे पिता और परिवार के सदस्यों के साथ गांव के लोग भी राम मिलने के शव के गांव पहुंचने का इंतजार कर रहे थे।
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