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एसडीएम ने अभिलेखों में दर्ज कराई ग्रामी समाज की जमीन
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मुहम्मदाबाद गोहना। तहसील क्षेत्र के बड़ागांव में धोखा धड़ी कर गांव समाज की 8 बीघा जमीन अपने नाम कराने के प्रकरण की अभी चर्चा ही हो रही थी, कि अब तहसील क्षेत्र के बिजौली गांव में भी कूट रचित और फ्रॉड कर ग्राम समाज की लगभग साढ़े 4 बीघा जमीन को अपने नाम कराने का मामला प्रकाश में आया । उपजिलाधिकारी अतुल वत्स ने प्रकरण को संज्ञान लेकर मामले की जांच कराई। रिपोर्ट आने पर सात लोगों द्वारा ग्राम समाज की जमीन को अपने नाम कराने की कार्रवाई को निरस्त कर जमीन ग्राम समाज के खाते में दर्ज कराने का आदेेश दिया।
तहसील क्षेत्र के बिजौली गांव निवासी रामयादी ने तहसील दिवस पर शिकायती पत्र दिया था, इसमें उन्होंने बताया कि गांव के दुर्जन, श्री राम, लालचंद, बेचन ,लोकई आदि ने गलत तरीके से ग्राम समाज की जमीन को पट्टा करा लिया है। पट्टा भूमि को कमिश्नर द्वारा निरस्त किए जाने के बाद भी कूट रचित ढंग से चकबंदी विभाग से इसकी मालियत लगवाकर अपने अन्य चको में समाहित करा लिया है। जांचोपरांत शिकायत सही मिलने पर एसडीएम न्यायालय के शासकीय अधिवक्ता दिनेश राय ने संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ वाद दाखिल कर ग्राम समाज की जमीन को पुन: ग्राम समाज, नवीन परती और बंजर खाते में अंकित किए जाने का पक्ष रखा। दोनों पक्षों को सुनने के बाद उपजिलाधिकारी अतुल वत्स ने पाया कि पूर्व में ही फ्रॉड तरीके से पट्टा करा कर आवंटन कराया गया था। उक्त प्रक्रिया को मुख्य राजस्व अधिकारी द्वारा 12 जनवरी 1987 को निरस्त कर दिया गया था। इसके खिलाफ मंडलायुक्त के यहां अपील की गई लेकिन मंडलायुक्त ने भी 17 अगस्त 1996 को सभी लोगों की अपील निरस्त कर दिया। इसके बाद गॉव की चकबंदी प्रक्रिया के दैरान उक्त सात व्यक्तियों ने चकबंदी प्रक्रिया में जालसाजी करते हुए उक्त आराजी के नंबरों की मालियत लगवाकर उतनी जमीन अपने अन्य चकों में समायोजित करा लिया। पक्षों को सुनने के बाद उपजिलाधिकारी/ अतुल वत्स ने बिजौली गांव की 7 आराजी नंबरों की लगभग साढ़े चार बीघा जमीन को निजी खातों से निरस्त करते हुए ग्राम सभा के खाते में दर्ज किए जाने का आदेश दिया है। इस बारे में एसडीएम श्री वत्स ने कहा कि तहसील में ऐसे कई प्रकरण सामने आ रहे हैं। कहा कि किसी भी मामले की जानकारी होने पर फ्राड करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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तहसील क्षेत्र के बिजौली गांव निवासी रामयादी ने तहसील दिवस पर शिकायती पत्र दिया था, इसमें उन्होंने बताया कि गांव के दुर्जन, श्री राम, लालचंद, बेचन ,लोकई आदि ने गलत तरीके से ग्राम समाज की जमीन को पट्टा करा लिया है। पट्टा भूमि को कमिश्नर द्वारा निरस्त किए जाने के बाद भी कूट रचित ढंग से चकबंदी विभाग से इसकी मालियत लगवाकर अपने अन्य चको में समाहित करा लिया है। जांचोपरांत शिकायत सही मिलने पर एसडीएम न्यायालय के शासकीय अधिवक्ता दिनेश राय ने संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ वाद दाखिल कर ग्राम समाज की जमीन को पुन: ग्राम समाज, नवीन परती और बंजर खाते में अंकित किए जाने का पक्ष रखा। दोनों पक्षों को सुनने के बाद उपजिलाधिकारी अतुल वत्स ने पाया कि पूर्व में ही फ्रॉड तरीके से पट्टा करा कर आवंटन कराया गया था। उक्त प्रक्रिया को मुख्य राजस्व अधिकारी द्वारा 12 जनवरी 1987 को निरस्त कर दिया गया था। इसके खिलाफ मंडलायुक्त के यहां अपील की गई लेकिन मंडलायुक्त ने भी 17 अगस्त 1996 को सभी लोगों की अपील निरस्त कर दिया। इसके बाद गॉव की चकबंदी प्रक्रिया के दैरान उक्त सात व्यक्तियों ने चकबंदी प्रक्रिया में जालसाजी करते हुए उक्त आराजी के नंबरों की मालियत लगवाकर उतनी जमीन अपने अन्य चकों में समायोजित करा लिया। पक्षों को सुनने के बाद उपजिलाधिकारी/ अतुल वत्स ने बिजौली गांव की 7 आराजी नंबरों की लगभग साढ़े चार बीघा जमीन को निजी खातों से निरस्त करते हुए ग्राम सभा के खाते में दर्ज किए जाने का आदेश दिया है। इस बारे में एसडीएम श्री वत्स ने कहा कि तहसील में ऐसे कई प्रकरण सामने आ रहे हैं। कहा कि किसी भी मामले की जानकारी होने पर फ्राड करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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