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Mau News: कोर्ट के आदेश के 24 घंटे के भीतर जिला पूर्ति अधिकारी और लिपिक पर केस दर्ज
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मऊ। कोर्ट के आदेश और भाजपा नेता की तहरीर पर बुधवार को पुलिस तत्कालीन जिला पूर्ति अधिकारी और लिपिक के खिलाफ कोतवाली में पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने की करवाई की।पुलिस केस दर्ज करने के बाद मामले की जांच में जुटी है।उधर जिले के एक बड़े अधिकारी और चर्चित लिपिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने को लेकर पूरे जिले में चर्चा होती रही।
दर्ज मुकदमे के अनुसार भाजपा नेता रामप्रवेश राजभर ने आरोप लगाया कि मऊ जिला पूर्ति कार्यालय में लिपिक गगन सिंह की नियुक्ति वर्ष 1992 में हुई है। उस समय प्रदेश में नियुक्ति से संबंधित प्रकाशित विज्ञापनों में रोजगार दफ्तरों में पंजीकरण कराए जाने संबंधित प्रमाण पत्र अनिवार्य शर्त थी। गगन सिंह मूल रूप से बिहार प्रदेश के गुलनी कुशहां गांव के रहने वाले है, ऐसी स्थिति में रोजगार दफ्तर में पंजीकरण संभव नहीं था। बावजूद लिपिक की नियुक्ति नियमों की अनदेखी करके की गई है।आरोप लगाया कि जनसूचना अधिकार के तहत प्राप्त सूचना के में लिपिक गगन सिंह ने हाईस्कूल वर्ष 1983 में पास होना मिला, जबकि हाईस्कूल उत्तीर्ण होने का प्रमाण पत्र वर्ष 2005 में जारी किया गया है। ऐसे में हाईस्कूल पास करने के आठ साल बाद इंटरमीडिएट वर्ष 1991 में पास किया है।जबकि इसका प्रमाण पत्र स्कूल से 28 जनवरी 2016 को जारी किया गया है।
वहीं अंक पत्र की छायाप्रति पर छह जनवरी 2016 अंकित है। ऐसे में आरोपी लिपिक ने दूसरे योग्य व्यक्ति के स्थान पर नौकरी हासिल कर फर्जी तरीके से राजकीय कोष से धन प्राप्त किया जा रहा है। वहीं जिला पूर्ति अधिकारी विकास गौतम से शिकायत के बाद भी उनके द्वार संरक्षण किया जा रहा था।इस मामले में कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए कोतवाली पुलिस को दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था। उधर इस मामले में एसपी इलामारन जी ने बताया कि मामला संज्ञान में है, पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज मामले की जांच में जुटी है।
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दर्ज मुकदमे के अनुसार भाजपा नेता रामप्रवेश राजभर ने आरोप लगाया कि मऊ जिला पूर्ति कार्यालय में लिपिक गगन सिंह की नियुक्ति वर्ष 1992 में हुई है। उस समय प्रदेश में नियुक्ति से संबंधित प्रकाशित विज्ञापनों में रोजगार दफ्तरों में पंजीकरण कराए जाने संबंधित प्रमाण पत्र अनिवार्य शर्त थी। गगन सिंह मूल रूप से बिहार प्रदेश के गुलनी कुशहां गांव के रहने वाले है, ऐसी स्थिति में रोजगार दफ्तर में पंजीकरण संभव नहीं था। बावजूद लिपिक की नियुक्ति नियमों की अनदेखी करके की गई है।आरोप लगाया कि जनसूचना अधिकार के तहत प्राप्त सूचना के में लिपिक गगन सिंह ने हाईस्कूल वर्ष 1983 में पास होना मिला, जबकि हाईस्कूल उत्तीर्ण होने का प्रमाण पत्र वर्ष 2005 में जारी किया गया है। ऐसे में हाईस्कूल पास करने के आठ साल बाद इंटरमीडिएट वर्ष 1991 में पास किया है।जबकि इसका प्रमाण पत्र स्कूल से 28 जनवरी 2016 को जारी किया गया है।
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वहीं अंक पत्र की छायाप्रति पर छह जनवरी 2016 अंकित है। ऐसे में आरोपी लिपिक ने दूसरे योग्य व्यक्ति के स्थान पर नौकरी हासिल कर फर्जी तरीके से राजकीय कोष से धन प्राप्त किया जा रहा है। वहीं जिला पूर्ति अधिकारी विकास गौतम से शिकायत के बाद भी उनके द्वार संरक्षण किया जा रहा था।इस मामले में कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए कोतवाली पुलिस को दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था। उधर इस मामले में एसपी इलामारन जी ने बताया कि मामला संज्ञान में है, पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज मामले की जांच में जुटी है।
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