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Mau News: अपना कोर वोट भी बचाने में विफल रही बसपा, पूर्व सांसद पर भी नहीं जताया भरोसा
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मऊ। घोसी चुनाव में अभी तक दलित वोटर महत्वपूर्ण भूमिका में होते थे। यह सभी वोट बसपा को हर चुनाव में मजबूत करते थे। लेकिन घोसी विधानसभा उपचुनाव के बाद से हुए लोकसभा चुनाव में यह वोट तेजी से सपा के पाले में गए हैं। यही कारण है कि विधानसभा उपचुनाव के बाद लोक सभा के चुनाव में भी सपा ने सबसे बड़ी ऐतिहासिक जीत दर्ज की है।
घोसी लोकसभा में कुल करीब पौने चार लाख दलित मतदाता है। यह बसपा के परंपरागत वोटर होते थे। पहली बार 1999 में यह सीट बसपा के खाते गई थी। जहां बालकृष्ण चौहान ने जीत दर्ज की। जबकि 2004 में हुए आम चुनाव में सपा के चंद्रदेव प्रसाद राजभर ने बसपा के दारा सिंह चौहान को हराया था। वर्ष 2014 में देश में मोदी लहर के दौरान भाजपा के हरिनारायण राजभर को बसपा के दारा सिंह चौहान ने ही टक्कर दी थी। वर्ष 2019 में भी बसपा और सपा के चुनावी मैदान में होने के बाद बसपा ने अतुल राय को मैदान में उतारा था। जहां अतुल ने 50 फीसद से अधिक मत पाकर जीत दर्ज की। घोसी लोकसभा में उदय के बाद बसपा तेजी से अस्त होने लगी। बसपा का स्थानीय असरदार नेता का न होना भी कारण है। जिस मजबूत कैडर वोटर के दम पर हर कोई लोकसभा से लेकर चार विधानसभाओं में बसपा के टिकट पाने के कतार में लगते थे। लेकिन बीते कुछ सालों से बसपा का बेस वोट तेजी से छटकने लगा है। घोसी उपचुनाव में बसपा के चुनावी मैदान में नहीं होने से उम्मीद थी कि बसपा से भाजपा में आए दारा सिंह चौहान को फायदा मिलेगा। लेकिन वह सपा के पाले में शिफ्ट हो गया। सपा के सुधाकर सिंह ने घोसी में ऐतिहासिक 45 हजार मतों से जीत दर्ज की थी। आम चुनाव में भी एक बार फिर बसपा को वोट सपा के पाले में गया जिससे सपा के राजीव राय ने रिकॉर्ड एक लाख 62 हजार मतों से विजयी हुए हैं।
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घोसी लोकसभा में कुल करीब पौने चार लाख दलित मतदाता है। यह बसपा के परंपरागत वोटर होते थे। पहली बार 1999 में यह सीट बसपा के खाते गई थी। जहां बालकृष्ण चौहान ने जीत दर्ज की। जबकि 2004 में हुए आम चुनाव में सपा के चंद्रदेव प्रसाद राजभर ने बसपा के दारा सिंह चौहान को हराया था। वर्ष 2014 में देश में मोदी लहर के दौरान भाजपा के हरिनारायण राजभर को बसपा के दारा सिंह चौहान ने ही टक्कर दी थी। वर्ष 2019 में भी बसपा और सपा के चुनावी मैदान में होने के बाद बसपा ने अतुल राय को मैदान में उतारा था। जहां अतुल ने 50 फीसद से अधिक मत पाकर जीत दर्ज की। घोसी लोकसभा में उदय के बाद बसपा तेजी से अस्त होने लगी। बसपा का स्थानीय असरदार नेता का न होना भी कारण है। जिस मजबूत कैडर वोटर के दम पर हर कोई लोकसभा से लेकर चार विधानसभाओं में बसपा के टिकट पाने के कतार में लगते थे। लेकिन बीते कुछ सालों से बसपा का बेस वोट तेजी से छटकने लगा है। घोसी उपचुनाव में बसपा के चुनावी मैदान में नहीं होने से उम्मीद थी कि बसपा से भाजपा में आए दारा सिंह चौहान को फायदा मिलेगा। लेकिन वह सपा के पाले में शिफ्ट हो गया। सपा के सुधाकर सिंह ने घोसी में ऐतिहासिक 45 हजार मतों से जीत दर्ज की थी। आम चुनाव में भी एक बार फिर बसपा को वोट सपा के पाले में गया जिससे सपा के राजीव राय ने रिकॉर्ड एक लाख 62 हजार मतों से विजयी हुए हैं।
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