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बारिश से पहले दुरुस्त नहीं हो सके ट्रांसफार्मर
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Wed, 06 Jul 2016 11:42 PM IST
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खराब ट्रांसफार्मर
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नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में लगे ट्रांसफार्मरों का रख रखाव कागज पर होता नजर आ रहा है। विभाग की ओर से बरसात पूर्व ही ट्रांसफार्मरों की अर्थिंग दुरुस्त तथा तेल की जांच करने का काम पूरा कर लिया जाना था।
लेकिन हालत यह है कि बिजली कर्मियों द्वारा ट्रांसफार्मरों की अर्थिंग तथा तेल जांच करने के कार्य में खानापूर्ति कर इतिश्री कर दी जा रही है। इससे प्रतिमाह लाखों रुपये सरकारी राजस्व की चपत लग रही है। दो माह में जले 340 ट्रांसफार्मरों की मरम्मत कराई जा चुकी है। विभागीय लापरवाही की स्थिति यह है कि ट्रांसफार्मरों की अर्थिंग तथा ट्रांसफार्मरों के तेल जांच करने का विभागीय कार्यालय में कोई रिकार्ड सुरक्षित नहीं रखा गया है।
नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में 37 विद्युत उपकेंद्र हैं। विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाए जाने के लिए विद्युत उपकेंद्रों से संबद्ध 6244 ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं। बरसात के मौसम में ट्रांसफार्मर जलने की संभावना बढ गई है। इसके बावजूद विभाग की ओर से ट्रांसफार्मरों की अर्थिंग दुरुस्त करने का काम कागज पर ही चल रहा है।
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ग्रामीणों की मानें तो ट्रांसफार्मर का रख रखाव करने बिजलीकर्मी करने आते ही नहीं हैं। ट्रांसफार्मर जलने पर नया लगने में हफ्तों लग जाता है। इससे कृषि तथा कुटीर उद्योग पर विपरीत असर पड़ता है। विभाग की ओर से नगर में ट्रांसफार्मर जलने पर 24 घंटे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 72 घंटे में बदले जाने का प्रावधान है। फतहपुर मंडाव ब्लाक क्षेत्र मर्यादपर, ढिलई फिरोजपुर का ट्रांसफार्मर एक हफ्ते से जला पड़ा है। यह तो एक बानगी है।
आला अधिकारी रख रखाव का दावा कर रहे हैं। गत वर्ष जुलाई, अगस्त माह में जले ट्रांसफार्मर पर नजर डाला जाए तो जुलाई में 196 तथा अगस्त माह में 225 ट्रांसफार्मर जले थे। जबकि इस वर्ष 23 मई से 22 जून तक 228 जले ट्रांसफार्मरों की मरम्मत की गई। इसी तरह 23 जून से अब तक 112 जले ट्रांसफार्मरों की मरम्मत कराई जा चुकी है। विशेषज्ञों की मानें तो ट्रांसफार्मरों का सही तरीके से रख रखाव किया जाए तो ट्रांसफार्मरों के जलने में कमी आ सकती है।
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लेकिन हालत यह है कि बिजली कर्मियों द्वारा ट्रांसफार्मरों की अर्थिंग तथा तेल जांच करने के कार्य में खानापूर्ति कर इतिश्री कर दी जा रही है। इससे प्रतिमाह लाखों रुपये सरकारी राजस्व की चपत लग रही है। दो माह में जले 340 ट्रांसफार्मरों की मरम्मत कराई जा चुकी है। विभागीय लापरवाही की स्थिति यह है कि ट्रांसफार्मरों की अर्थिंग तथा ट्रांसफार्मरों के तेल जांच करने का विभागीय कार्यालय में कोई रिकार्ड सुरक्षित नहीं रखा गया है।
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नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में 37 विद्युत उपकेंद्र हैं। विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाए जाने के लिए विद्युत उपकेंद्रों से संबद्ध 6244 ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं। बरसात के मौसम में ट्रांसफार्मर जलने की संभावना बढ गई है। इसके बावजूद विभाग की ओर से ट्रांसफार्मरों की अर्थिंग दुरुस्त करने का काम कागज पर ही चल रहा है।
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ग्रामीणों की मानें तो ट्रांसफार्मर का रख रखाव करने बिजलीकर्मी करने आते ही नहीं हैं। ट्रांसफार्मर जलने पर नया लगने में हफ्तों लग जाता है। इससे कृषि तथा कुटीर उद्योग पर विपरीत असर पड़ता है। विभाग की ओर से नगर में ट्रांसफार्मर जलने पर 24 घंटे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 72 घंटे में बदले जाने का प्रावधान है। फतहपुर मंडाव ब्लाक क्षेत्र मर्यादपर, ढिलई फिरोजपुर का ट्रांसफार्मर एक हफ्ते से जला पड़ा है। यह तो एक बानगी है।
आला अधिकारी रख रखाव का दावा कर रहे हैं। गत वर्ष जुलाई, अगस्त माह में जले ट्रांसफार्मर पर नजर डाला जाए तो जुलाई में 196 तथा अगस्त माह में 225 ट्रांसफार्मर जले थे। जबकि इस वर्ष 23 मई से 22 जून तक 228 जले ट्रांसफार्मरों की मरम्मत की गई। इसी तरह 23 जून से अब तक 112 जले ट्रांसफार्मरों की मरम्मत कराई जा चुकी है। विशेषज्ञों की मानें तो ट्रांसफार्मरों का सही तरीके से रख रखाव किया जाए तो ट्रांसफार्मरों के जलने में कमी आ सकती है।