{"_id":"6a1b2d28571a60bae60db4a9","slug":"be-it-sunday-or-monday-expiry-date-is-not-known-on-6240-lakh-eggs-being-sold-every-day-mau-news-c-295-1-mau1002-146285-2026-05-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mau News: संडे हो या मंडे रोज बिक रहे 62.40 लाख अंडे पर एक्सपायरी डेट पता नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mau News: संडे हो या मंडे रोज बिक रहे 62.40 लाख अंडे पर एक्सपायरी डेट पता नहीं
विज्ञापन
मऊ नगर के आजमगढ़ मोड़ पर स्थित मछली मंडी में बिना एक्सपायरी डेट और मुहर लगा अंडा बेचता दुकानदार।
एक अप्रैल से अंडों पर उत्पादन तिथि और एक्सपायरी डेट की स्टैंपिंग अनिवार्य कर दी गई है, जिससे बिना तारीख वाले पुराने अंडों की बिक्री पर रोक लग सके। इसके बावजूद जिले में बिना एक्सपायरी डेट अंकित किए अंडों की बिक्री जारी है।
सड़क किनारे अंडा फ्राई, आमलेट और अंडा रोल बेचने वाले कई विक्रेताओं को भी अंडों की एक्सपायरी डेट की जानकारी नहीं है, जिससे वे ग्राहकों को ताजा अंडे उपलब्ध कराने की स्थिति में नहीं हैं।
दुकानदारों का कहना है कि बड़े व्यापारियों से जो अंडे उन्हें मिलते हैं, वही वे अपनी दुकानों पर बेचते हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में प्रतिदिन करीब 62.40 लाख अंडों की खपत होती है। यह संख्या एक माह में लगभग 18.72 करोड़ तक पहुंच जाती है।
विज्ञापन
बाजार में एक्सपायरी या बासी अंडों की बिक्री रोकने के लिए जिले में एक संयुक्त टीम गठित की गई है। इसमें पशुपालन विभाग, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन तथा उद्यान विभाग के अधिकारी शामिल हैं। टीम को जनपद में बिकने वाले अंडों की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।
नियम लागू हुए दो माह बीत चुके हैं, लेकिन कहीं भी इसका प्रभावी अनुपालन नहीं दिख रहा है। आरोप है कि गठित टीम ने भी अब तक कोई उल्लेखनीय कार्रवाई नहीं की है।
जिले की चारों तहसीलों सदर, मुहम्मदाबाद गोहना, मधुबन और घोसी में 540 पोल्ट्री फार्म हैं। इनमें से 390 का पंजीकरण किया गया है। इसके अलावा 1075 निजी पोल्ट्री फार्म संचालित हैं।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अनुसार जिले में प्रतिदिन आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, बिहार सहित अन्य राज्यों से आने वाले अंडों की खपत होती है। उत्तर प्रदेश में वर्तमान में अंडों के भंडारण के लिए केवल आगरा और झांसी में दो कोल्ड स्टोरेज उपलब्ध हैं।
ऐसे पहचानें ताजा और बासी अंडा
गहरे बर्तन या गिलास में पानी भरकर अंडा डालें। यदि अंडा पूरी तरह डूबकर तली में बैठ जाए तो वह ताजा है।
यदि अंडा तली में डूबा रहे, लेकिन उसका एक सिरा ऊपर उठ जाए, तो वह पुराना होने के बावजूद खाने योग्य हो सकता है।
यदि अंडा पानी की सतह पर तैरने लगे, तो वह काफी पुराना या खराब हो चुका है। उसका उपयोग नहीं करना चाहिए।
अंडे को कान के पास लाकर हल्के से हिलाएं। यदि कोई आवाज न आए तो अंडा ताजा है। छप-छप या पानी जैसी आवाज आने पर अंडा बासी हो सकता है।
ताजे अंडे का छिलका अपेक्षाकृत खुरदुरा और मजबूत होता है। अत्यधिक चिकना या असामान्य महसूस होने पर उसकी गुणवत्ता की जांच करनी चाहिए।
अंडे को प्लेट या कटोरी में फोड़ें। ताजे अंडे की जर्दी गोल और उभरी हुई होती है तथा सफेद भाग अपेक्षाकृत गाढ़ा होता है। जर्दी आसानी से टूट जाए और सफेद भाग पानी की तरह फैल जाए तो अंडा पुराना हो सकता है।
ताजे अंडे से दुर्गंध नहीं आती। फोड़ने पर सड़ी हुई, खट्टी या असामान्य गंध आने पर उसका उपयोग नहीं करना चाहिए।
कितने दिन तक खाने योग्य होता है अंडा
खाद्य विभाग के अनुसार बिना धुले अंडे फ्रिज में 3 से 5 सप्ताह तक सुरक्षित रह सकते हैं। सामान्य तापमान (लगभग 30 डिग्री सेल्सियस) पर रखे गए अंडे अधिकतम 14 दिन तक खाने योग्य रहते हैं। छिलके सहित उबले हुए अंडों को फ्रिज में एक सप्ताह तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
कोट-- -
अंडों पर एक्सपायरी डेट का लेबल लगाने का निर्देश एफएसएसएआई से प्राप्त हुआ है। मार्च माह में अंडों पर एक्सपायरी डेट अंकित करने का निर्देश मिला था, लेकिन प्रदेश और जिले के कारोबारियों के पास फिलहाल उस प्रकार के संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। इसी कारण उन्हें छह माह का समय दिया गया है। वर्तमान में मुहर लगाकर तिथि अंकित करने का निर्देश दिया गया है, जिससे कुछ हद तक अंडों की समय-सीमा का पता चल सके। -देवेंद्र सिंह यादव, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी, मऊ
खराब अंडे खाने से प्रभावित हो सकता है पाचन तंत्र
जिला अस्पताल में तैनात फिजिशियन डॉ. अनिल कुमार ने खराब अंडों के सेवन से होने वाली बीमारियों और शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खराब अंडों में साल्मोनेला जैसे हानिकारक बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं। ऐसे अंडों का सेवन करने पर बैक्टीरिया पाचन तंत्र को प्रभावित करते हैं, जिससे तेज पेट दर्द, बार-बार दस्त, उल्टी और कभी-कभी डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है। उन्होंने बताया कि छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा क्षमता वाले लोगों के लिए यह स्थिति अधिक खतरनाक हो सकती है। जब शरीर में बैक्टीरियल संक्रमण बढ़ता है, तो उसे समाप्त करने के लिए प्रतिरक्षा तंत्र सक्रिय हो जाता है। इस प्रक्रिया में शरीर का तापमान बढ़ सकता है, जिससे बुखार आ सकता है। साथ ही शरीर में कमजोरी, थकान और सुस्ती महसूस हो सकती है। उन्होंने बताया कि बार-बार खराब या एक्सपायर खाद्य पदार्थों का सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ सकती है। इससे व्यक्ति छोटी-छोटी बीमारियों की चपेट में भी आसानी से आ सकता है और स्वस्थ होने में अधिक समय लग सकता है।
विज्ञापन
सड़क किनारे अंडा फ्राई, आमलेट और अंडा रोल बेचने वाले कई विक्रेताओं को भी अंडों की एक्सपायरी डेट की जानकारी नहीं है, जिससे वे ग्राहकों को ताजा अंडे उपलब्ध कराने की स्थिति में नहीं हैं।
विज्ञापन
दुकानदारों का कहना है कि बड़े व्यापारियों से जो अंडे उन्हें मिलते हैं, वही वे अपनी दुकानों पर बेचते हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में प्रतिदिन करीब 62.40 लाख अंडों की खपत होती है। यह संख्या एक माह में लगभग 18.72 करोड़ तक पहुंच जाती है।
विज्ञापन
बाजार में एक्सपायरी या बासी अंडों की बिक्री रोकने के लिए जिले में एक संयुक्त टीम गठित की गई है। इसमें पशुपालन विभाग, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन तथा उद्यान विभाग के अधिकारी शामिल हैं। टीम को जनपद में बिकने वाले अंडों की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।
नियम लागू हुए दो माह बीत चुके हैं, लेकिन कहीं भी इसका प्रभावी अनुपालन नहीं दिख रहा है। आरोप है कि गठित टीम ने भी अब तक कोई उल्लेखनीय कार्रवाई नहीं की है।
जिले की चारों तहसीलों सदर, मुहम्मदाबाद गोहना, मधुबन और घोसी में 540 पोल्ट्री फार्म हैं। इनमें से 390 का पंजीकरण किया गया है। इसके अलावा 1075 निजी पोल्ट्री फार्म संचालित हैं।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अनुसार जिले में प्रतिदिन आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, बिहार सहित अन्य राज्यों से आने वाले अंडों की खपत होती है। उत्तर प्रदेश में वर्तमान में अंडों के भंडारण के लिए केवल आगरा और झांसी में दो कोल्ड स्टोरेज उपलब्ध हैं।
ऐसे पहचानें ताजा और बासी अंडा
गहरे बर्तन या गिलास में पानी भरकर अंडा डालें। यदि अंडा पूरी तरह डूबकर तली में बैठ जाए तो वह ताजा है।
यदि अंडा तली में डूबा रहे, लेकिन उसका एक सिरा ऊपर उठ जाए, तो वह पुराना होने के बावजूद खाने योग्य हो सकता है।
यदि अंडा पानी की सतह पर तैरने लगे, तो वह काफी पुराना या खराब हो चुका है। उसका उपयोग नहीं करना चाहिए।
अंडे को कान के पास लाकर हल्के से हिलाएं। यदि कोई आवाज न आए तो अंडा ताजा है। छप-छप या पानी जैसी आवाज आने पर अंडा बासी हो सकता है।
ताजे अंडे का छिलका अपेक्षाकृत खुरदुरा और मजबूत होता है। अत्यधिक चिकना या असामान्य महसूस होने पर उसकी गुणवत्ता की जांच करनी चाहिए।
अंडे को प्लेट या कटोरी में फोड़ें। ताजे अंडे की जर्दी गोल और उभरी हुई होती है तथा सफेद भाग अपेक्षाकृत गाढ़ा होता है। जर्दी आसानी से टूट जाए और सफेद भाग पानी की तरह फैल जाए तो अंडा पुराना हो सकता है।
ताजे अंडे से दुर्गंध नहीं आती। फोड़ने पर सड़ी हुई, खट्टी या असामान्य गंध आने पर उसका उपयोग नहीं करना चाहिए।
कितने दिन तक खाने योग्य होता है अंडा
खाद्य विभाग के अनुसार बिना धुले अंडे फ्रिज में 3 से 5 सप्ताह तक सुरक्षित रह सकते हैं। सामान्य तापमान (लगभग 30 डिग्री सेल्सियस) पर रखे गए अंडे अधिकतम 14 दिन तक खाने योग्य रहते हैं। छिलके सहित उबले हुए अंडों को फ्रिज में एक सप्ताह तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
कोट
अंडों पर एक्सपायरी डेट का लेबल लगाने का निर्देश एफएसएसएआई से प्राप्त हुआ है। मार्च माह में अंडों पर एक्सपायरी डेट अंकित करने का निर्देश मिला था, लेकिन प्रदेश और जिले के कारोबारियों के पास फिलहाल उस प्रकार के संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। इसी कारण उन्हें छह माह का समय दिया गया है। वर्तमान में मुहर लगाकर तिथि अंकित करने का निर्देश दिया गया है, जिससे कुछ हद तक अंडों की समय-सीमा का पता चल सके। -देवेंद्र सिंह यादव, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी, मऊ
खराब अंडे खाने से प्रभावित हो सकता है पाचन तंत्र
जिला अस्पताल में तैनात फिजिशियन डॉ. अनिल कुमार ने खराब अंडों के सेवन से होने वाली बीमारियों और शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खराब अंडों में साल्मोनेला जैसे हानिकारक बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं। ऐसे अंडों का सेवन करने पर बैक्टीरिया पाचन तंत्र को प्रभावित करते हैं, जिससे तेज पेट दर्द, बार-बार दस्त, उल्टी और कभी-कभी डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है। उन्होंने बताया कि छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा क्षमता वाले लोगों के लिए यह स्थिति अधिक खतरनाक हो सकती है। जब शरीर में बैक्टीरियल संक्रमण बढ़ता है, तो उसे समाप्त करने के लिए प्रतिरक्षा तंत्र सक्रिय हो जाता है। इस प्रक्रिया में शरीर का तापमान बढ़ सकता है, जिससे बुखार आ सकता है। साथ ही शरीर में कमजोरी, थकान और सुस्ती महसूस हो सकती है। उन्होंने बताया कि बार-बार खराब या एक्सपायर खाद्य पदार्थों का सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ सकती है। इससे व्यक्ति छोटी-छोटी बीमारियों की चपेट में भी आसानी से आ सकता है और स्वस्थ होने में अधिक समय लग सकता है।