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Mau News: सावधान...मरीजों को धोखे में रखकर कर रहे हैं इलाज...शिकायत पर खुल रही पोल

Sat, 05 Oct 2024 03:21 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 05 Oct 2024 03:21 AM IST
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Be careful... patients are being treated by deceiving them... the truth is coming out on complaint
जिले को वाराणसी के बाद दूसरे मेडिकल सिटी के नाम पर जाना जाता है, लेकिन मेडिकल सिटी में ऐसे धरती के भगवान भी हैं जो आयुर्वेद विधा में पंजीयन करा रखे हैं। लेकिन वह धोखे में रखकर मरीजों का ऐलोपैथ विधा से इलाज कर रहे हैं। यह बात हम नहीं बीते दिनों प्रशासन की पहल पर स्वास्थ्य विभाग और आयुष विभाग द्वारा एक अस्पताल पर कार्रवाई में सामने आया था। जहां अस्पताल का पंजीयन आयुर्वेद में था। लेकिन नियमों को दरकिनार कर ऐलौपेथ में उपचार करते मिले थे। इससे पहले 2020 में कोपागंज में भी ऐसा मामला उजागार हो चुका है।
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यूं तो जिले में झोलाछाप की भरमार है। जो किसी डॉक्टर के यहां प्रैक्टिस करने के बाद किसी चट्टी चौराहे पर क्लीनिक खोल कर बैठे हैं। लेकिन सबसे विकट समस्या उन अस्पतालों से उत्पन्न हो रही, जो पंजीकृत आयुर्वेद और यूनानी में है, लेकिन मरीजों का उपचार एलोपैथ पद्धति से कर रहें। 29 सितंबर को नगर के भीटी में संचालित एक अस्पताल की शिकायत प्रशासन के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग को मिली, इसके बाद एसीएमओ डॉ. आरएन सिंह के नेतृत्व में टीम ने छापेमारी की तो पता चला कि यह अस्पताल आयुर्वेद विधा से पंजीकृत है। इसके बाद आयुष विभाग के अधिकारी भी पहुंचे तो यह पंजीयन भी एक्सपायर होना मिला। वहीं नियम को दरकिनार कर यहां न केवल ऐलौपेथ विधा से इलाज होना मिला। जांच में पता चला कि यहां भर्ती मरीजों का ऑपरेशन भी किया जाता है। इसके बाद इस अस्पताल को क्षेत्रीय आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी डॉ. सतेंद्र साहू ने सील कर दिया था।
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इससे पहले सितंबर 2020 में कोपागंज के दोस्तपुरा मुहल्ला में संचालित एक अस्पताल में प्रसव के दौरान नवजात की मौत और प्रसूता की बच्चेदानी निकालने की शिकायत पर छापामारा गया था। जहां अस्पताल का पंजीकरण आयुर्वेद विधा से था, लेकिन अस्पताल ऐलौपेथ विधा से संचालित होता मिला था। इस मामले में उस समय पीड़ित मरीज के ससुर की तहरीर पर अस्पताल संचालक के विरुद्ध मुकदमा भी दर्ज करने की कार्रवाई हुई थी। यह दो मामले केवल बानगी हैं कि जिले में आयुर्वेद विधा से पंजीयन लेकर धड़ल्ले से ऐलौपेथ विधा में प्रैक्टिस की जा रही है। वहीं इन अस्पतालों पर कार्रवाई तभी हो पा रही, जब मरीज अस्पताल के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराते हैं।
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इन आंकड़ों से समझे आप, क्या है सच
सीएमओ कार्यालय के आंकड़े के हिसाब से जिले एलोपैथ पद्धति से लोगों का उपचार कराने के लिए अस्पताल, क्लीनिक, नर्सिंग होम मिलाकर 115 तो प्राइवेट प्रैक्टिसनर की संख्या 44 और 17 पैथालॉजी का पंजीकरण है। इसी क्रम में क्षेत्रीय आयुर्वेद युनानी अधिकारी कार्यालय से आयुर्वेदिक पद्धति से 216 तो 226 यूनानी पद्धति से लोगों का उपचार कराने के लिए 140 नर्सिंग होम शामिल हैं। जबकि दो साल पहले तक आयुर्वेद विधा से पंजीकृत डाक्टरों की संख्या 178 तो यूनानी पद्धति से लोगों का उपचार कराने के लिए 140 थी।

शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाती है, बीते दिन शिकायत मिलने पर आयुष विभाग के साथ मिलकर कार्रवाई की गई थी। आयुर्वेदिक पद्धति के डॉक्टरों को कुछ दवा की प्रैक्टिस पर छूट दी गई है। लेकिन वो आईवी सेट का प्रयोग नहीं कर सकते। लेकिन ये पंजीकरण की आड़ में धड़ल्ले से एलोपैथ की दवाओं का प्रयोग कर मरीजों का उपचार करते हैं। ऐसे में इन अस्पतालों के खिलाफ तभी कार्रवाई हो पाती है, जब उनके विरुद्ध मरीज शिकायत करते हैं। -डॉ. आरएन सिंह, एसीएमओ
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