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रसूलपुर आश्रम के पास हो रही बैकरोलिंग
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दोहरीघाट के रसूलपुर आश्रम के पास घाघरा नदी द्वारा हो रही कटान।
- फोटो : MAU
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सूरजपुर। दोहरीघाट विकास खंड क्षेत्र के रसूलपुर आश्रम के पास घाघरा नदी में बैकरोलिंग होने से तटवर्ती इलाके के लोगों की नींद उड़ गई है। नदी में एकाएक तीन फीट पानी बढ़ते ही बैकरोलिंग शुरू हो गई। दिन भर में लगभग 30 मीटर की चौड़ाई में आठ फीट जमीन नदी में विलीन हो गई। उधर, सिंचाई विभाग कटान रोकने के लिए उदासीन बना रहा।
क्षेत्र के रसूलपुर आश्रम के पास घाघरा नदी में बैकरोलिंग होने से तटवर्ती इलाके के लोगों को नदी के कहर बरपाने का खतरा सताने लगा है। रसूलपुर आश्रम पर कटान तेज हो गया है। सोमवार को 30 मीटर की चौड़ाई में लगभग आठ फीट जमीन घाघरा नदी में समाहित हो जाने से आसपास के गांवों के लोग दहशत में रहे। कटान पीड़ितों को भूमिहीन होने डर सताने लगा है। पिछले साल सितंबर से लेकर अक्तूबर माह के अंत तक हुए भीषण कटान का खौफ अभी लोगों के जेहन से उतरा नहीं है।
अक्तूबर माह में हुए भीषण कटान से घाघरा नदी के किनारे रहने वाले पांच परिवारों का घर नदी में समाहित हो गया। साथ ही साथ नदी के किनारे दो सौ मीटर तक की लंबाई में लगभग बीस बीघा जमीन घाघरा नदी की आगोश में चली गई। हिंदू युवा वाहिनी नेता पंकज त्रिपाठी, श्रीधर प्रसाद, महेंद्र यादव, श्रीप्रकाश ने बताया कि नदी में हो रही कटान रोकने के लिए सिंचाई विभाग की तरफ से ठोस उपाय नहीं किया गया। प्रतिवर्ष खानापूर्ति की जा रही। उन्होंने समस्या का अविलंब समाधान करने की मांग की।
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क्षेत्र के रसूलपुर आश्रम के पास घाघरा नदी में बैकरोलिंग होने से तटवर्ती इलाके के लोगों को नदी के कहर बरपाने का खतरा सताने लगा है। रसूलपुर आश्रम पर कटान तेज हो गया है। सोमवार को 30 मीटर की चौड़ाई में लगभग आठ फीट जमीन घाघरा नदी में समाहित हो जाने से आसपास के गांवों के लोग दहशत में रहे। कटान पीड़ितों को भूमिहीन होने डर सताने लगा है। पिछले साल सितंबर से लेकर अक्तूबर माह के अंत तक हुए भीषण कटान का खौफ अभी लोगों के जेहन से उतरा नहीं है।
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अक्तूबर माह में हुए भीषण कटान से घाघरा नदी के किनारे रहने वाले पांच परिवारों का घर नदी में समाहित हो गया। साथ ही साथ नदी के किनारे दो सौ मीटर तक की लंबाई में लगभग बीस बीघा जमीन घाघरा नदी की आगोश में चली गई। हिंदू युवा वाहिनी नेता पंकज त्रिपाठी, श्रीधर प्रसाद, महेंद्र यादव, श्रीप्रकाश ने बताया कि नदी में हो रही कटान रोकने के लिए सिंचाई विभाग की तरफ से ठोस उपाय नहीं किया गया। प्रतिवर्ष खानापूर्ति की जा रही। उन्होंने समस्या का अविलंब समाधान करने की मांग की।
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