मऊ। श्री रामलीला मेला समिति के तत्वावधान में नगर में चल रही रामलीला में कबंध वध, शबरी मिलन, राम हनुमान मिलन, सुग्रीव मित्रता, सात पेड़ बांधने की लीला सहित विभिन्न लीलाओं का मंचन किया गया। भगवान राम द्वारा कबंध वध करते ही दर्शकों के जयश्रीराम के जयघोष से पंडाल गूंज उठा। कबंध राक्षसों के भयानक रूप धारण कर प्रतिदिन किसी ना किसी ऋषि को डराया करता था। एक दिन उसने स्थूलशिरा ऋषि को भी डराने के लिए भयानक राक्षस का रूप धारण किया। ऋषि के पास कई दैवीय शक्तियां थीं। एक दिन वह दनु पर क्रोधित हो गए थे और उसे श्राप दिया कि वह जिस प्रकार का रूप धारण कर उन्हें डरा रहा हैं वही उसका हमेशा के लिए रूप हो जाएगा और वह राक्षसों के जैसा ही व्यवहार करेगा। ऋषि के श्राप स्वरुप दनु का शरीर वैसा ही हो गया। अपनी यह अवस्था देखकर दनु ऋषि के सामने गिड़गिड़ा कर क्षमा मांगने लगा। ऋषि ने उसे श्राप से मुक्त होने का उपाय बताया। कहा कि एक दिन भगवान श्रीराम अपने भाई लक्ष्मण के साथ माता सीता को ढूंढते हुए यहां आएंगे व तुम्हारी दोनों भुजाएं काट देंगे। इसके बाद जैसे ही वे तुम्हारा दाह संस्कार करेंगे तो तुम श्राप से मुक्त हो जाओगे। जब भगवान श्रीराम, लक्ष्मण के साथ सीता की खोज में वहां पहुंचे तो कबंध ने उन्हें अपनी भुजाओं में जकड़ लिया। इससे क्रोधित होकर लक्ष्मण ने उसकी दोनों भुजाएं काट दी। कबंध वध होते ही दर्शक जयश्रीराम का जयकारा लगाने लगे। दोहरीघाट : रामलीला समिति की तरफ से कस्बे में चल रही रामलीला में शूर्पणखा नासिका भंग, सीता हरण सहित विभिन्न लीलाओं का मंचन किया गया। सूर्पणखा की नाक कान लक्ष्मण द्वारा काटते ही दशकों के ठहाके से पूरा पंडाल गूंज उठा। कोपागंज : कस्बे के ओड़ियाना बाजार में चल रही रामलीला रविवार को दशरथ कैकेयी संवाद, राम वनगमन सहित विभिन्न लीला का मंचन किया गया। राम वनगमन का मंचन होते ही दर्शक भावुक हो उठे। लीला देख रही कई महिलाएं रोने लगी जबकि कई मूर्च्छित हो गईं। अमिला : श्री ठाकुर द्वारा रामलीला समिति अमिला के तत्वावधान में कस्बा में चल रही रामलीला में सीता का हरण सहित विभिन्न लीलाओं का मंचन किया गया। रावण के सीता को हर लेने से सीता विलाप करने लगती हैं। यह मंचन देख दर्शक भी भावुक हो उठते हैं। मधुबन : जजौली में चल रही रामलीला में शूर्पणखा नासिका भग्न, खरदूषण वध, मारीच वध, सीता हरण, जटायु-राम विलाप सहित विभिन्न लीलाओं का मंचन किया गया। सीता की तलाश करते हुए जब राम तक पहुंचते हैं तो जटायु सीता के हरण का सारा वृत्तांत बताता है। जटायु-राम विलाप पर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।