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कथित डाक्टर की डिग्री आयुर्वेद की, करता था आपरेशन:
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मऊ। फतेहपुर मंडाव में एक झोला छाप डाक्टर के पास कथित आयुर्वेदिक की डिग्री है, लेकिन वह अस्पताल में आने वाले मरीजों का आपेरशन करता था। कथित डाक्टर ने एक कसबे में एक चिकित्सक के पास रहकर दो साल तक कंपाउंडरी किया। वहां पर डाक्टर के साथ हाइड्रोसिल और फोड़े फुंसी का आपरेशन भी करता था। बाद में उसने आयुर्वेंद की डिग्री का जुगाड़ कर लिया और फतेहपुर मंडाव में नीजी अस्स्पताल खोलकर बड़े बड़े आपरेशन भी करना शुुरु कर दिया। चार दिन पहले 11 जुलाई की रात इसी प्रयास में उसने एक गर्भवती महिला का पेट चीर दिया। इस दौरान प्रसूता की मौत हो गई।
देवारा के एक गांव की गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने पर उसके परिवार वाले फतेहपुर मंडाव में चलने वाले एक नीजी अस्पताल में ले गए। यहां पर हालांकि कोई महिला चिकित्सक नहीं है और न ही कोई प्रशिक्षित महिला जीएनएम अथवा एएनएम ही है। यहां पर एक पुरुष कथित डाक्टर है। जिसे क्षेत्र के लोगों ने कभी नहीं जाना कि कब उसने मेडिकल अथवा डाक्टरी की पढ़ाई किया।
क्षेत्र के लोगों के अनुसार वह कुछ समय पहले एक कसबे के डाक्टर की क्लीनिक पर रहकर कंपाउंडरी करता था। उसी दौरान उसने कुछ दवाइयों के नाम, रोगों के लक्षण और उनके उपचार तथा हाइड़्रोसिल अथवा फोड़े फुंसियों का आपरेशन करना सीख लिया। दो साल तक कंपांडरी करने के बाद कथित डाक्टर ने आयुर्वेद की एक मेडिकल डिग्री का जुगाड़ कर लिया और फतेहपुर मंडाव बाजार में ही रोड के किनारे एक भवन में अस्पताल खोल लिया। इस अस्पताल में एक दाई और एक कंपाउंडर काम करते हैं, ये दोनों भी अप्रशिक्षित ही हैं।
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क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि इस अस्पताल में कोई प्रशिक्षित कर्मचारी नहीं है और न ही कथित डाक्टर के पास वैध मेडिकल डिग्री ही है। प्रसूता की मौत के बाद फंसने के डर से कथित डाक्टर अचेत होने का नाटक करता रहा।हालांकि पीड़ित परिजन मुकदमे आदि के झंझट से बचने के लिए व्यवस्था को कोसते हुए वापस लौट गए। सिर्फ कमीशन के चक्कर में दलाल इस अस्पताल में मरीजों को भेजते हैं। इस बाबत सीएमओ डा. एससी सिंह का कहना है कि कथित डाक्टर की जांच कराई जाएगी और मामला संदिग्ध पाए जाने पर विधि सम्मत कार्रवाईकी जाएगी।
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देवारा के एक गांव की गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने पर उसके परिवार वाले फतेहपुर मंडाव में चलने वाले एक नीजी अस्पताल में ले गए। यहां पर हालांकि कोई महिला चिकित्सक नहीं है और न ही कोई प्रशिक्षित महिला जीएनएम अथवा एएनएम ही है। यहां पर एक पुरुष कथित डाक्टर है। जिसे क्षेत्र के लोगों ने कभी नहीं जाना कि कब उसने मेडिकल अथवा डाक्टरी की पढ़ाई किया।
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क्षेत्र के लोगों के अनुसार वह कुछ समय पहले एक कसबे के डाक्टर की क्लीनिक पर रहकर कंपाउंडरी करता था। उसी दौरान उसने कुछ दवाइयों के नाम, रोगों के लक्षण और उनके उपचार तथा हाइड़्रोसिल अथवा फोड़े फुंसियों का आपरेशन करना सीख लिया। दो साल तक कंपांडरी करने के बाद कथित डाक्टर ने आयुर्वेद की एक मेडिकल डिग्री का जुगाड़ कर लिया और फतेहपुर मंडाव बाजार में ही रोड के किनारे एक भवन में अस्पताल खोल लिया। इस अस्पताल में एक दाई और एक कंपाउंडर काम करते हैं, ये दोनों भी अप्रशिक्षित ही हैं।
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क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि इस अस्पताल में कोई प्रशिक्षित कर्मचारी नहीं है और न ही कथित डाक्टर के पास वैध मेडिकल डिग्री ही है। प्रसूता की मौत के बाद फंसने के डर से कथित डाक्टर अचेत होने का नाटक करता रहा।हालांकि पीड़ित परिजन मुकदमे आदि के झंझट से बचने के लिए व्यवस्था को कोसते हुए वापस लौट गए। सिर्फ कमीशन के चक्कर में दलाल इस अस्पताल में मरीजों को भेजते हैं। इस बाबत सीएमओ डा. एससी सिंह का कहना है कि कथित डाक्टर की जांच कराई जाएगी और मामला संदिग्ध पाए जाने पर विधि सम्मत कार्रवाईकी जाएगी।