मऊ। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर-5 नीलम ढाका ने साक्ष्य के लिए सिपाही के कोर्ट में उपस्थित न होने पर पुलिस अधीक्षक बलिया को पत्र भेजकर 15 जुलाई तक साक्षी सहित लिखित स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है। कहा कि, क्यों न साक्षी शेषनाथ पांडेय और उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए उच्च न्यायालय को अवगत कराया जाए। मामला कोतवाली मुहम्मदाबाद गोहना का है। मामले के अनुसार अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर-5 की अदालत में कोतवाली मुहम्मदाबाद गोहना क्षेत्र का एक मुकदमा विचाराधीन है। जिसमे साक्ष्य की कार्रवाई होनी है। मामले में साक्षी सिपाही शेषनाथ पांडेय को उपस्थित होना था, वह बलिया में तैनात हैं। लेकिन उपस्थित नहीं हुए। न ही इस बाबत कोर्ट को सूचना दी। इसे गंभीरता से लेते हुए एडीजे ने पुलिस अधीक्षक बलिया को पत्र भेजकर उनसे साक्षी सहित 15 जुलाई तक लिखित स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है।
एसपी बलिया को भेजे पत्र में एडीजे ने उल्लेख किया है कि साथी शेषनाथ पांडेय 29 जून को न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए और न ही उनके द्वारा न्यायालय को सूचित किया गया। पत्रावली अति प्राचीनतम वाद की सूची में शामिल है। साक्षी शेषनाथ पांडेय का साक्ष्य न होने के कारण पत्रावली का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि आप न्यायालय द्वारा जारी आदेशों का अनुपालन करने में रुचि नहीं रखते हैं। यह न्यायालय के आदेशों की अवमानना के अंतर्गत आता है। यदि उच्च न्यायालय से कोई प्रतिकूल आदेश प्राप्त होता है तो इसकी समस्त जिम्मेदारी आपकी होगी।