{"_id":"66390e41abfc8557150278cb","slug":"adj-sent-letter-to-dgp-to-produce-the-witness-mau-news-c-295-1-mau1002-112338-2024-05-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mau News: कागजों में पूरा, धरातल पर अधूरे हैं अमृत सरोवर, पानी नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mau News: कागजों में पूरा, धरातल पर अधूरे हैं अमृत सरोवर, पानी नहीं
विज्ञापन
कोपागंज। आजादी का अमृत महोत्सव पर तय हुआ था कि कोपागंज की 15 ग्राम पंचायतों में अमृत सरोवर बना कर स्वतंत्रता दिवस पर वहीं ध्वजारोहण होगा। लेकिन आज भी अमृत सरोवर कागजों में पूरा हो गए हैं। लेकिन वह धरातल पर अधूरे हैं। अमृत सरोवर सूख चुके हैं। केवल बरसात के दिनों में ही इनमें पानी रहता है। अदरी देहात, बुढ़ावे, चोरपाखुर्द, फैज़ुल्लाहपुर, कसारा, लाड़नपु, रईसा, सरवा गरीबपुर, शहरोज, चौबेपुर, जोगरी, धवरियासाथ, एकौना और पारा मुबारकपुर शामिल हैं। कुछ में जमा कीचड़ और चारों तरफ उगी बड़ी बड़ी झाड़ियां इनकी खूबसूरती के दावों का सच बयां कर रही हैं। ग्राम पंचायत धवरियासाथ में अमृत सरोवर का निर्माण अधूरा है। एक ओर कुछ सीढ़ियां बनाकर छोड़ दी गई हैं। जबकि सरोवर के चारों तरफ सीढ़ी और टहलने के लिए इंटरलॉकिंग का निर्माण और वहां बैठने के लिए बेंच लगाना था। वहां फूल पौधे लगाकर रात में उजाले के लिए स्ट्रीट लाइट लगानी थी। लेकिन ये सभी काम कागज में हुए हैं। इन अमृत सरोवरों की हकीकत जिले के उचच्चाधिकारियों ने भी कभी जानने की कोशिश नहीं की। यही हाल सरवा गरीबपुर में बने अमृत सरोवर का हाल है। इंटरलॉकिंग के चारों तरफ बड़ी-बड़ी झाड़ियां उगी हैं। सीढ़ी बनाई गई है, लेकिन कहीं बेंच नहीं लगाए गए हैं। वहीं लाड़नपुर, पारा मुबारकपुर, रईसा, जोगरी, एकौना, फैज़ुल्लाहपुर में अमृत सरोवर पानी के लिए तरस रहे हैं। इस विषय में ब्लॉक के अधिकारी अधूरे अमृत सरोवरों की बात नहीं स्वीकारते हैं। जबकि निर्माण पूरा दिखाकर उन्हीं के द्वारा मौके पर पहुंचकर निर्माण पूरा होने का सत्यापन किया गया है।
-- -- -- -- -- -- -- -
अमृत सरोवर बरसात के पानी का संचयन करने के लिए बनाए गए हैं। इनमें पानी भरने के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं है। रही बात झाड़ियों की तो चुनाव के चलते टेंडर नहीं हो सका है।
- ओमप्रकाश सिंह, खंड विकास अधिकारी, कोपागंज
विज्ञापन
अमृत सरोवर बरसात के पानी का संचयन करने के लिए बनाए गए हैं। इनमें पानी भरने के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं है। रही बात झाड़ियों की तो चुनाव के चलते टेंडर नहीं हो सका है।
विज्ञापन
- ओमप्रकाश सिंह, खंड विकास अधिकारी, कोपागंज