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कार्यों को ईमानदारी पूर्वक करने वाला व्यक्ति रहता है खुश : सद्गुरु
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दोहरीघाट। मातेश्वरी परिवार की तरफ से सरयू नदी के तट पर बसा अंतरराष्ट्रीय मातेश्वरी महाधाम पर चल रहे छठवां अश्वमेध महायज्ञ के दूसरे दिन मातेश्वरी परिवार के संस्थापक सद्गुरु महाराज ने कहा कि यह जीवन जो मानव रूप में उस परम सत्ता आदि शक्ति द्वारा दिया गया है वह अपने आप में अनमोल है।
इतना अमूल्य जीवन मिलने के बाद भी लोग दुखी होते हैं। जिसका मुख्य कारण है अपने आप को मानना है, मैंने महान कार्य कर दिया जब-जब मनुष्य अपने आप को कर्ता मानते रहेंगे तब तब आप दुखी होते रहेंगे। क्योंकि यह सब भौतिक सुख है। स्थायी सुख तो उस परम सत्ता के चरणों में होता है, जो मनुष्य अपने जीवन में अपने दैनिक कार्यों को करते हुए किसी न किसी सद्गुरु के चरणों में रह कर उस परम सत्ता के प्रति अटूट प्रेम रखते हुए जीवन में हमेशा प्रसन्नचित रहना चाहिए।
साथ इस शरीर रूपी मंदिर को भी हमेशा स्वच्छ रखने और अपने कार्यों को ईमानदारी पूर्वक करने वाला व्यक्ति जीवन में हमेशा प्रसन्नचित होता है तथा निर्भय होकर जीवन जीता है। अंत समय में उस परम सत्ता आदि शक्ति के चरणों में स्थान प्राप्त कर लेता है अर्थात जीवन को सुखमय जीते हुए मोक्ष को प्राप्त कर लेता है।
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इतना अमूल्य जीवन मिलने के बाद भी लोग दुखी होते हैं। जिसका मुख्य कारण है अपने आप को मानना है, मैंने महान कार्य कर दिया जब-जब मनुष्य अपने आप को कर्ता मानते रहेंगे तब तब आप दुखी होते रहेंगे। क्योंकि यह सब भौतिक सुख है। स्थायी सुख तो उस परम सत्ता के चरणों में होता है, जो मनुष्य अपने जीवन में अपने दैनिक कार्यों को करते हुए किसी न किसी सद्गुरु के चरणों में रह कर उस परम सत्ता के प्रति अटूट प्रेम रखते हुए जीवन में हमेशा प्रसन्नचित रहना चाहिए।
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साथ इस शरीर रूपी मंदिर को भी हमेशा स्वच्छ रखने और अपने कार्यों को ईमानदारी पूर्वक करने वाला व्यक्ति जीवन में हमेशा प्रसन्नचित होता है तथा निर्भय होकर जीवन जीता है। अंत समय में उस परम सत्ता आदि शक्ति के चरणों में स्थान प्राप्त कर लेता है अर्थात जीवन को सुखमय जीते हुए मोक्ष को प्राप्त कर लेता है।
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