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गुरु जीवन जीने की कला सिखाता है : ओपी त्रिपाठी
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नगर के पुरानी तहसील स्थित एक प्लाजा में आयोजित गुरु वंदन एवं शैक्षिक उन्नयन संगोष्ठी में ओ.पी
मऊ। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के तत्वावधान में शनिवार को नगर स्थित एक पैलेस में राष्ट्रीय गुरु वंदन एवं शैक्षिक उन्नयन संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद के सचिव ओपी त्रिपाठी और विशिष्ट अतिथि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संतोष कुमार उपाध्याय रहे। अतिथियों ने इस वर्ष सेवानिवृत्त हुए शिक्षकों को अंगवस्त्रम प्रदान कर सम्मानित किया।
मुख्य अतिथि ओपी त्रिपाठी ने कहा कि गुरु की महिमा सर्वोपरि है। आज के तकनीकी युग में गूगल समेत विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म से सूचनाएं आसानी से मिल जाती हैं, लेकिन जीवन की वास्तविक चुनौतियों का सामना करने और जीवन जीने की कला अपने आचरण के माध्यम से गुरु ही सिखाता है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में अनुशासन, सेवा भाव और कर्तव्यपरायणता विकसित करने की आवश्यकता है। शिक्षकों की भूमिका केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में अच्छे संस्कार और मानवीय मूल्यों का विकास करना भी उनका दायित्व है।
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संगठन के जिलाध्यक्ष रुपेश पांडेय ने अतिथियों, शिक्षकों, सेवानिवृत्त अध्यापकों और राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के संरक्षक राजा आनंद ज्योति सिंह के प्रति आभार जताया। कार्यक्रम में इस वर्ष सेवानिवृत्त हुए शिक्षकों को मुख्य अतिथियों ने अंगवस्त्रम देकर सम्मानित किया।
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मुख्य अतिथि ओपी त्रिपाठी ने कहा कि गुरु की महिमा सर्वोपरि है। आज के तकनीकी युग में गूगल समेत विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म से सूचनाएं आसानी से मिल जाती हैं, लेकिन जीवन की वास्तविक चुनौतियों का सामना करने और जीवन जीने की कला अपने आचरण के माध्यम से गुरु ही सिखाता है।
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उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में अनुशासन, सेवा भाव और कर्तव्यपरायणता विकसित करने की आवश्यकता है। शिक्षकों की भूमिका केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में अच्छे संस्कार और मानवीय मूल्यों का विकास करना भी उनका दायित्व है।
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संगठन के जिलाध्यक्ष रुपेश पांडेय ने अतिथियों, शिक्षकों, सेवानिवृत्त अध्यापकों और राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के संरक्षक राजा आनंद ज्योति सिंह के प्रति आभार जताया। कार्यक्रम में इस वर्ष सेवानिवृत्त हुए शिक्षकों को मुख्य अतिथियों ने अंगवस्त्रम देकर सम्मानित किया।