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मऊ डिपो में 53 बसों का बेड़ा, सड़कों पर दौड़ रहीं सिर्फ 28 ही बसें

Sun, 12 Sep 2021 09:26 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 12 Sep 2021 09:26 PM IST
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A fleet of 53 buses in Mau depot, only 28 buses running on the roads
मऊ। जिले से संचालित रोजवेज की बसों में काफी बसों का संचालन इन दिनों ठप होने के कारण यात्रियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई रोडवेज की बसें मरम्मत के अभाव में खराब पड़ी हैं। जबकि नगर के ताजोपुर में बने वर्कशाप में काफी बसें मरम्मत के लिए खड़ी कराई गई हैं। लेकिन विभागीय शिथिलता के चलते इन बसों की मरम्मत में तेजी नहीं दिखाई जा रही है। विभिन्न रूटों पर यात्रा करने के लिए यात्रियों को बस स्टेशन पर काफी देर तक बसों का इंतजार करना पड़ता है। बसों की कमी के कारण जिले में कई रूटों पर बसों का संचालन नहीं हो पा रहा है।
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मऊ डिपो की 53 बसों में इन दिनों 28 बसों का ही संचालन विभिन्न रूटों पर हो पा रहा है। मऊ डिपो से रोडवेज की बसों का बलिया, गोरखपुर, आजमगढ़, लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज सहित जिले के भीतर कई रूटों पर संचालन किया जाता है। इन दिनों गोरखपुर मार्ग पर बाढ़ के कारण गोरखपुर जाने वाली बसें दोहरीघाट तक ही जा रही हैं। नगर के ताजोपुर स्थित वर्कशाप में मऊ डिपो की काफी बसें मरम्मत के अभाव में खड़ी हैं। इन बसों के तत्काल मरम्मत के क्रम में अधिकारियों द्वारा कोई तेजी होती नहीं दिख रही है। जिस कारण आधे से कम बसों का ही संचालन हो पा रहा है। इससे बस स्टेशन पर यात्रियों की काफी भीड़ बसों का घंटों इंतजार करते दिख रहे हैं। एआरएम रमेश चंद्र का कहना है कि रोडवेज की बसें विभिन्न रूटों से चल कर आने के बाद उनमें खामियां मिलने पर ताजोपुर स्थित वर्कशाप पर भेजा जाता है। जिन बसों को जांच में ठीक पाया जाता है। उन्हें ही मऊ डिपो से रूटों पर भेजा जाता है। इन समय 28 बसों का ही संचालन हो पा रहा है। वर्कशाप में कर्मचारी बसों की नियमित रूप से मरम्मत कर रहे हैं। जिले की अधिकतर रोडवेज बसों की हालत काफी खराब है। इनमें यात्रा करना सुरक्षित है यह तो यात्री बखूबी जानते है। कौन सी बस कहां खराब हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता। कई बसों की स्थिति दयनीय हो चुकी है। सीटें जर्जर हैं, खिड़कियों से शीशे गायब हैं, ऐसे में अंदर आती धूल और बारिश में पानी से यात्री काफी परेशान रहते हैं। बसों के खटारा होने के चलते दुर्घटना की संभावना अधिक होती है। फिर भी लोग इन बसों में यात्रा करने को मजबूर हैं।
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